योगी आदित्यनाथ विदेश दौरे से लौटने के बाद दो दिवसीय प्रवास पर वाराणसी पहुंचे। गोरक्षपीठाधीश्वर के रूप में अपनी धार्मिक परंपरा का निर्वहन करते हुए उन्होंने काशी आगमन के तुरंत बाद प्रमुख मंदिरों में दर्शन-पूजन किया। जापान और सिंगापुर की आधिकारिक यात्रा से लौटने के बाद उनका यह दौरा आध्यात्मिक और जनसंपर्क दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
काल भैरव दरबार में पूजा, आरती और आत्मीय संवाद
दौरे के पहले चरण में मुख्यमंत्री ने काल भैरव मंदिर में पहुंचकर विधिवत दर्शन किए। यहां उन्होंने आरती में सहभागिता कर प्रदेश की सुख-समृद्धि और शांति की कामना की। मंदिर परिसर में मौजूद बच्चों से उन्होंने स्नेहपूर्वक मुलाकात की, उन्हें चॉकलेट वितरित की और पढ़ाई-लिखाई के बारे में बातचीत की। बच्चों ने उत्साह में “हैप्पी होली बाबा जी” कहकर उनका अभिवादन किया, जिस पर मुख्यमंत्री मुस्कुराते हुए उनके बीच पहुंचे और हालचाल जाना। इसी दौरान उन्होंने एक लस्सी विक्रेता को स्वच्छता बनाए रखने के लिए दही ढककर रखने की सलाह भी दी, जो उनके जनसरोकार वाले व्यवहार को दर्शाता है।
काशी विश्वनाथ धाम में षोडशोपचार पूजन और अभिषेक
इसके उपरांत मुख्यमंत्री ने काशी विश्वनाथ मंदिर में पहुंचकर बाबा विश्वनाथ का षोडशोपचार पूजन और अभिषेक किया। गर्भगृह में प्रवेश कर उन्होंने पूर्ण विधि-विधान से आराधना की और लोककल्याण की भावना से प्रार्थना अर्पित की। मंदिर परिसर “हर-हर महादेव” के जयघोष से गूंज उठा। उपस्थित श्रद्धालुओं ने उनका स्वागत किया, वहीं मुख्यमंत्री ने भी भक्तों का अभिवादन स्वीकार करते हुए सभी को होली की शुभकामनाएं दीं।
धार्मिक आस्था और जनसंपर्क का संगम
दो दिवसीय काशी प्रवास के पहले दिन मुख्यमंत्री की धार्मिक गतिविधियां और आमजन, विशेषकर बच्चों के साथ उनका सहज संवाद चर्चा में रहा। एक ओर उन्होंने परंपरागत विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर अपनी आध्यात्मिक प्रतिबद्धता दर्शाई, तो दूसरी ओर जनसामान्य से आत्मीय जुड़ाव दिखाकर सामाजिक संदेश भी दिया। उनका यह दौरा आस्था, प्रशासनिक जिम्मेदारी और जनसंपर्क का संतुलित उदाहरण माना जा रहा है।










