मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह सहित अन्य वरिष्ठ भाजपा नेताओं से हुई मुलाकातों को भले ही औपचारिक बताया जा रहा हो, लेकिन इस दौरे ने प्रदेश की राजनीति में हलचल तेज कर दी है। माना जा रहा है कि इन बैठकों का असर योगी मंत्रिमंडल के संभावित विस्तार और भाजपा के प्रदेश संगठन में बदलाव के रूप में सामने आ सकता है।
सूत्रों के अनुसार, मुख्यमंत्री की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से हुई मुलाकात में मंत्रिमंडल विस्तार के संभावित ढांचे पर विचार-विमर्श हुआ। इसके साथ ही प्रदेश अध्यक्ष की नियुक्ति के बाद संगठनात्मक बदलावों को लेकर भी मुख्यमंत्री ने अपने सुझाव साझा किए। हाल ही में मुख्यमंत्री आवास पर सरकार और संगठन से जुड़े पदाधिकारियों की कोर कमेटी की बैठक भी आयोजित हुई थी, जिसे भाजपा के नवनियुक्त प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी के साथ परिचयात्मक बैठक के रूप में देखा जा रहा है।
दौरे से बढ़ी मंत्रिमंडल की सियासी सरगर्मी
मुख्यमंत्री के दिल्ली दौरे से मंत्री बनने की आस लगाए विधायकों की धड़कनें तेज हो गई हैं। कई विधायक पहले से ही दिल्ली में डटे हुए हैं। इनमें कुछ ऐसे भी हैं, जिन्होंने पहले प्रदेश अध्यक्ष पद पर उम्मीदें लगाई थीं, लेकिन वहां मौका न मिलने के बाद अब उनकी नजरें मंत्रिमंडल में जगह पाने पर टिक गई हैं।
मंत्रिमंडल में अभी भी छह रिक्त पद
सीएम योगी की वर्तमान मंत्रिपरिषद में कुल 54 मंत्री हैं, जबकि छह पद अब भी रिक्त हैं। ऐसे में आगामी मंत्रिमंडल विस्तार में छह नए विधायकों के मंत्री बनने की संभावना जताई जा रही है। सूत्रों के अनुसार, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी सहित ओबीसी वर्ग के कुछ विधायकों को मंत्रिमंडल में स्थान मिल सकता है। हालांकि अभी किसी नाम पर औपचारिक मुहर नहीं लगी है, लेकिन भूपेंद्र चौधरी, पूजा पाल, महेंद्र सिंह और मुकेश चौधरी जैसे नामों की चर्चाएं तेज हैं।









