CM Yogi Adityanath : मुख्यमंत्री योगी ने उत्तर प्रदेश और अन्य राज्यों में चुनावी माहौल के बीच राजनीतिक बयानबाजी को तेज करते हुए विपक्ष पर तीखा हमला बोला। सोमनाथ स्वाभिमान यात्रा के फ्लैग-ऑफ कार्यक्रम में उन्होंने ‘गोमाता को कटने नहीं देंगे, हिंदुओं को बंटने नहीं देंगे’ का नारा देकर बहुसंख्यक समाज को एकजुट करने की कोशिश की।
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू को भी निशाने पर लिया। उन्होंने दावा किया कि सोमनाथ मंदिर के पुनरुद्धार के समय पंडित नेहरू इसके खिलाफ थे और इस प्रक्रिया में बाधाएं खड़ी की गईं। इस मौके पर डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्या भी मौजूद रहे।
सोमनाथ मंदिर पुनरुद्धार को लेकर क्या बोले सीएम?
मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘लौह पुरुष’ सरदार वल्लभाई पटेल ने सोमनाथ मंदिर की स्थिति देखकर उसके पुनर्निर्माण का संकल्प लिया था। लेकिन उस समय पंडित नेहरू इस पहल के समर्थन में नहीं थे। उन्होंने कहा कि सरदार पटेल की दृढ़ इच्छाशक्ति के कारण ही मंदिर का पुनरुद्धार संभव हो पाया और तमाम बाधाओं के बावजूद यह कार्य पूरा हुआ।
सीएम योगी ने आगे कहा कि जब मंदिर निर्माण पूरा होने के बाद प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम की तैयारी हुई, तो आयोजन समिति ने तत्कालीन राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद को आमंत्रित किया। उन्होंने आरोप लगाया कि उस समय की कांग्रेस सरकार और पंडित नेहरू ने राष्ट्रपति को इस कार्यक्रम में शामिल होने से रोकने की कोशिश की और इसे धर्मनिरपेक्षता के खिलाफ बताया।
आस्था पर प्रहार का आरोप
मुख्यमंत्री ने कांग्रेस पर हमला जारी रखते हुए कहा कि उस दौर में हिंदुओं की आस्था को लगातार नजरअंदाज किया गया। उन्होंने कहा कि सोमनाथ मंदिर के कार्यक्रम में राष्ट्रपति की भागीदारी का विरोध इस बात का उदाहरण है। उन्होंने यह भी कहा कि उस समय धर्मनिरपेक्षता के नाम पर सनातन परंपराओं को कमजोर करने का प्रयास किया गया।
तुष्टिकरण की राजनीति का आरोप
सीएम योगी ने कांग्रेस की पहली सरकार पर तुष्टिकरण की राजनीति करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि उसी दौर में कश्मीर में धारा 370 लागू की गई, जिसने आगे चलकर कई समस्याओं को जन्म दिया। उन्होंने कहा कि एक ओर जहां देश में आतंकवाद की नींव पड़ रही थी, वहीं दूसरी ओर सांस्कृतिक और धार्मिक कार्यक्रमों में भी बाधाएं डाली जा रही थीं।
डॉ. राजेंद्र प्रसाद के फैसले की सराहना
मुख्यमंत्री ने कहा कि तमाम विरोध के बावजूद तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने सोमनाथ मंदिर के प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम में भाग लिया, जो एक साहसिक और ऐतिहासिक निर्णय था।उन्होंने इसके लिए उनका आभार जताते हुए कहा कि यह कदम देश की सांस्कृतिक विरासत और आस्था के सम्मान का प्रतीक था।











