होली से पहले योगी सरकार की बड़ी सौगात, शिक्षामित्रों को अप्रैल से हर माह मिलेगा 18 हजार रुपए का मानदेय

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By Raj RathorePublished On: February 20, 2026
yogi adityanath

उत्तर प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र में शिक्षा से जुड़ा मुद्दा प्रमुखता से उठा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सदन में कहा कि उनकी सरकार ने शिक्षा मित्रों और अनुदेशकों का मानदेय दोगुना किया है। सरकार ने इसे उन कर्मियों के लिए राहत बताया, जो लंबे समय से स्कूलों में सहायक शैक्षणिक भूमिका निभा रहे हैं।

लखनऊ में हुए बजट सत्र की कार्यवाही के दौरान यह बात तब सामने आई जब शिक्षा व्यवस्था, स्कूलों में मानव संसाधन और जमीनी क्रियान्वयन पर चर्चा चल रही थी। मुख्यमंत्री ने अपने जवाब में कहा कि सरकार ने बुनियादी शिक्षा ढांचे में सुधार के साथ-साथ मानदेय आधारित कर्मियों की आर्थिक स्थिति पर भी काम किया है।

सदन में सरकार का रुख यह रहा कि शिक्षा मित्र और अनुदेशक दोनों ही स्कूल तंत्र की निरंतरता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। खासकर प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्तर पर पढ़ाई, गतिविधियों और नियमित संचालन में इनकी जिम्मेदारी रहती है। ऐसे में मानदेय बढ़ाने को सरकार ने प्रशासनिक निर्णय के बजाय सेवा-समर्थन के रूप में प्रस्तुत किया।

बजट सत्र में शिक्षा पर राजनीतिक बहस

बजट सत्र में विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच शिक्षा की गुणवत्ता, संसाधनों और कर्मियों की स्थिति पर बहस हुई। इसी क्रम में मुख्यमंत्री ने यह दावा रखा कि सरकार ने अपने कार्यकाल में शिक्षा मित्रों और अनुदेशकों के मानदेय में दोगुनी बढ़ोतरी की। सरकार ने इसे अपनी उपलब्धियों में शामिल किया और कहा कि निर्णय का उद्देश्य स्कूलों में काम कर रहे कर्मियों का मनोबल बढ़ाना भी है।

सरकारी पक्ष ने यह भी संकेत दिया कि शिक्षा क्षेत्र में सुधार केवल भवन, फर्नीचर या योजनाओं से नहीं होता, बल्कि कक्षा से जुड़े कर्मियों की स्थिरता भी जरूरी है। मानदेय में बढ़ोतरी को इसी दृष्टि से जोड़ा गया। हालांकि सदन में इस पर अलग-अलग राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आईं, लेकिन सरकार अपने दावे पर कायम रही।

शिक्षा मित्र और अनुदेशक क्यों अहम

राज्य के सरकारी स्कूलों में शिक्षा मित्र और अनुदेशक लंबे समय से पूरक शैक्षणिक व्यवस्था का हिस्सा हैं। कई स्कूलों में विषयगत जरूरत, गतिविधि-आधारित शिक्षण और छात्र उपस्थिति बनाए रखने में इनकी भूमिका रहती है। बजट सत्र में इस वर्ग का जिक्र आने से यह संकेत भी मिला कि सरकार आने वाले समय में शिक्षा से जुड़े मानव संसाधन को लेकर संदेश देना चाहती है।

नीतिगत तौर पर सरकार की यह लाइन रही कि शिक्षा क्षेत्र में एक साथ कई मोर्चों पर काम किया जाए। इसमें विद्यालयों के भौतिक सुधार, डिजिटल हस्तक्षेप, और शिक्षण सहयोगी कर्मियों की स्थिति को साथ लेकर चलना शामिल है। मुख्यमंत्री के बयान ने इस बात को फिर रेखांकित किया कि मानदेय आधारित कर्मियों को पूरी तरह नजरअंदाज कर शिक्षा सुधार की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकती।

प्रशासनिक और सामाजिक असर

मानदेय बढ़ोतरी का असर दो स्तर पर देखा जा रहा है। पहला, इससे शिक्षा मित्रों और अनुदेशकों के बीच आर्थिक स्थिरता का भरोसा बढ़ता है। दूसरा, स्कूल प्रबंधन के स्तर पर नियमित शैक्षणिक गतिविधियों में निरंतरता बनाए रखने में मदद मिलती है। सरकार ने सदन में यही संदेश देने की कोशिश की कि शिक्षा क्षेत्र में लिए गए फैसले केवल घोषणात्मक नहीं, बल्कि क्रियान्वयन से जुड़े हैं।

बजट सत्र के दौरान दिए गए इस बयान के बाद शिक्षा कर्मियों के मुद्दे पर प्रशासनिक फॉलोअप की चर्चा भी तेज हुई है। ध्यान अब इस पर रहेगा कि बढ़े हुए मानदेय से जुड़ी प्रक्रिया सभी पात्र कर्मियों तक समय पर और पारदर्शी तरीके से पहुंचे।

फिलहाल, विधानसभा में मुख्यमंत्री का यह बयान सरकार की शिक्षा संबंधी राजनीतिक और प्रशासनिक प्राथमिकताओं का संकेत माना जा रहा है। शिक्षा मित्रों और अनुदेशकों का मानदेय दोगुना करने का दावा आने वाले समय में नीति और जमीनी असर, दोनों के संदर्भ में परखा जाएगा।