ईरान-इजरायल युद्ध का असर, एमपी का बासमती निर्यात ठप, बंदरगाहों पर फंसा चावल, कारोबारियों की बढ़ी चिंता

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By Pinal PatidarPublished On: March 7, 2026

नर्मदापुरम जिले में बासमती चावल का कारोबार इन दिनों गंभीर संकट का सामना कर रहा है। मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और युद्ध जैसे हालात का असर अब सीधे जिले के चावल निर्यात पर दिखाई देने लगा है। ईरान और इज़राइल के बीच बढ़ते संघर्ष के कारण खाड़ी क्षेत्र में समुद्री गतिविधियां प्रभावित हुई हैं, जिससे नर्मदापुरम से होने वाला बासमती चावल का निर्यात पूरी तरह ठप हो गया है। इसका सीधा असर जिले के राइस मिल उद्योग पर पड़ रहा है, जहां करोड़ों रुपये का चावल बंदरगाहों और समुद्री रास्तों में अटका हुआ है।

निर्यात बंद होने से मिलों में बढ़ी परेशानी

पिछले लगभग छह दिनों से निर्यात प्रक्रिया रुकने के कारण जिले के राइस मिल संचालकों को भारी आर्थिक दबाव का सामना करना पड़ रहा है। इटारसी और पिपरिया के कई राइस मिलों का तैयार माल बंदरगाहों तक पहुंचने के बाद आगे नहीं बढ़ पा रहा है। कुछ खेप समुद्र में जहाजों में फंसी हुई है, जबकि कई ट्रक बंदरगाहों पर खड़े हैं। निर्यात बंद होने से मिलों में माल का उठाव रुक गया है और गोदाम तेजी से भरते जा रहे हैं, जिससे उद्योग के सामने बड़ा संकट खड़ा हो गया है।

रोजाना हजारों टन चावल जाता था विदेश

नर्मदापुरम जिले से सामान्य दिनों में बड़ी मात्रा में बासमती चावल खाड़ी देशों में भेजा जाता है। सिर्फ इटारसी और आसपास के कारखानों से ही प्रतिदिन लगभग 20 से 25 टन बासमती चावल गल्फ देशों के लिए रवाना किया जाता था। वहीं पूरे जिले से रोजाना करीब 1200 टन चावल का निर्यात होता है। लेकिन समुद्री मार्गों पर युद्ध के प्रभाव के कारण अचानक निर्यात रुक गया है, जिससे स्थानीय व्यापारियों और उद्योगों को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है।

खाड़ी देशों में नर्मदापुरम के चावल की बड़ी मांग

मध्य प्रदेश के इस इलाके के बासमती चावल की खाड़ी देशों में काफी मांग रहती है। इराक, जॉर्डन, कुवैत और दुबई जैसे देशों में बड़े होटल, रेस्टोरेंट और शाही भोजों में इसी चावल का उपयोग किया जाता है। यहां तक कि शेखों की बिरयानी में भी नर्मदापुरम का बासमती चावल पसंद किया जाता है। जिले का लगभग 60 प्रतिशत चावल इन्हीं देशों में सप्लाई होता है, लेकिन वर्तमान हालात में अधिकांश खेप समुद्री रास्तों या बंदरगाहों पर अटकी हुई है।

व्यापारियों के साथ किसानों और मजदूरों की चिंता

इस स्थिति से सिर्फ व्यापारी ही नहीं बल्कि किसान और मजदूर भी प्रभावित हो रहे हैं। नर्मदापुरम के चावल कारोबारी पंकज अग्रवाल के अनुसार जिले के निर्यातकों का करोड़ों रुपये का माल पोर्ट और समुद्री मार्गों में फंसा हुआ है। कई ट्रक जो पहले ही फैक्ट्रियों से बंदरगाहों की ओर भेजे जा चुके थे, उन्हें वापस लौटना पड़ा। गोदाम पहले से ही माल से भरे हुए हैं और अब नई प्रोसेसिंग रोकनी पड़ रही है। इससे राइस मिलों में काम करने वाले मजदूरों के सामने रोजगार का संकट पैदा हो गया है, वहीं मंडियों में धान के दाम भी गिरने लगे हैं, जिससे किसानों की चिंता बढ़ गई है।

लंबे समय तक हालात रहे तो उद्योग पर संकट

कारोबारियों का मानना है कि यदि अगले 10 से 15 दिनों तक यही स्थिति बनी रही तो नर्मदापुरम का बासमती चावल उद्योग गंभीर आर्थिक संकट में फंस सकता है। बासमती सेला 1509, 1121, सुगंधा और शरबती जैसी किस्मों की खाड़ी देशों में भारी मांग रहती है, लेकिन युद्ध जैसे हालात के कारण इनकी खेप बंदरगाहों और समुद्र में अटक गई है। इससे साफ है कि हजारों किलोमीटर दूर चल रही जंग का असर अब सीधे मध्य प्रदेश के किसानों, मजदूरों और व्यापारियों की आजीविका पर पड़ने लगा है।