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मजदूरों के पलायान पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, स्वतः लिया संज्ञान

नई दिल्ली। देश में कोरोना वायरस से बचाव के मद्देनजर लॉक डाउन लागू है। ऐसे में विभिन्न प्रवासी मजदूर अलग-अलग शहरों में फंसे हुए हैं और जिसके चलते उन्हे तमाम समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। वहीं अब इस मामले में शीर्ष अदालत ने स्वतः संज्ञान लिया है और इस मामले को 28 मई के लिए सूचीबद्ध किया है। साथ ही कोर्ट ने सॉलिटर जनरल तुषार मेहता से इस मामले में मदद करने के लिए भी कहा है।

सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि मजदूरों के मामले में राज्य और केंद्र सरकार दोनों की तरफ से कमी रही है। प्रवासी मजदूरों को आवास भोजन और यात्रा की सुविधा मुहैया कराने के लिए तुरंत कदम उठाने की आवश्यकता है।

गौरतलब है कि लॉक डाउन के चलते बड़ी संख्या में मजदूरों अनेक शहरों एवं राज्यों में फंसे हुए हैं। जहां इन्हें भोजन एवं रोजगार की समस्या से दो चार होना पड़ रहा है। जिसके चलते वे पैदल अपने घरों की ओर लौटने लगे हैं। हालांकि केंद्र सरकार अब इनके लिए श्रमिक स्पेशल ट्रेन भी चला रही है।

वहीं मजदूरों के पलायन को लेकर कई झकझोर देने वाली तस्वीरें भी सामने आई है। जहां एक महिला ने सड़क पर ही बच्चे को जन्म दे दिया था उसके बाद वह पैदल ही घर की ओर चली गई। जबकि एक युवती को बारह सौ किलोमीटर साइकिल चलाकर अपने घरों की ओर लौटना पड़ा था। इतना ही नहीं कुछ मजदूरों की ट्रेन से मौत भी हो गई थी जिस ने सरकार पर सवाल खड़े किए थे।