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प्रधानमंत्री ने शुरू किया गरीब कल्याण रोजगार अभियान, इन लोगों को होगा फायदा

नई दिल्ली। लाॅकडाउन के कारण प्रवासी मजदूरों की समस्या भी बड़ी है। ऐसे में उनके पलायन के बाद उनकी रोजी रोटी का भी सवाल उठता है। इस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार को रोजगार गारंटी योजना और ‘गरीब कल्याण रोजगार अभियान’ की शुरुआत की हैै।

दरअसल वर्चुअल बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 20 जवानों की शहादत का जिक्र करते हुए कहा कि हर बिहारी को गर्व होना चाहिए कि हमारे बिहार रेजीमेंट के लोगों ने शहादत दी। लद्दाख में हमारे बहादुरों द्वारा किए गए बलिदान पर देश को गर्व है। मैं उन बहादुरों को श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं जिन्होंने राष्ट्र के लिए अपना जीवन दांव पर लगा दिया। इसके अलावा उन्होंने योजना को लेकर कई अहम बाते कहीं जो इस प्रकार है।

  • आज का दिन बहुत ऐतिहासिक है। आज गरीब के कल्याण के लिए, उसके रोजगार के लिए एक बहुत बड़ा अभियान शुरू हुआ है। ये अभियान हमारे श्रमिक भाई-बहनों के लिए, हमारे गांवों में रहने वाले नौजवानों-बहनों-बेटियों के लिए समर्पित है।
  • इस अभियान के जरिए श्रमिकों और कामगारों को घर के पास ही काम दिया जाएगा।
  • देश के हर शहर को गति और प्रगति देने वाला श्रम और हुनर जब खगड़िया जैसे ग्रामीण इलाकों में लगेगा, तो इससे बिहार के विकास को भी कितनी गति मिलेगी।
  • गरीब कल्याण रोजगार अभियान के तहत आपके गांवों के विकास के लिए आपको रोजगार देने के लिए 50 हजार करोड़ रुपए खर्च किए जाने हैं।
  • इसके लिए करीब 25 कार्यक्षेत्रों की पहचान की गई है। ये 25 काम या प्रोजेक्ट्स ऐसे हैं, जो गांव की मूलभूत सुविधाओं से जुड़े हैं।
  • आज से आंगनबाड़ी भवन, सामुदायिक शौचालय, ग्रामीण मंडी और कुआं बनाने का काम शुरू किया किया जा रहा है। इसी तरह हर गांव की जरूरतों को अब गरीब कल्याण रोजगार अभियान के माध्यम से पूरा किया जाएगा।
  • आप श्रमेव जयते, श्रम की पूजा करने वाले लोग हैं, आपको काम चाहिए, रोजगार चाहिए। इस भावना को सर्वोपरि रखते हुए ही सरकार ने इस योजना को बनाया है।
  • इस योजना पर कुछ ही सप्ताह के भीतर करीब-करीब पौने 2 लाख करोड़ रुपए खर्च किए गए। इन तीन महीनों में 80 करोड़ गरीबों की थाली तक राशन-दाल पहुंचाने का काम हुआ है।
  • इस बड़ी ग्रामीण रोजगार योजेना से घर लौटे श्रमिकों को सशक्त किया जा सकेगा और उन्हें 125 दिन का रोजगार मिलेगा।
  • यह अभियान बिहार के खगड़िया जिले के बेलदौर प्रखंड के तेलिहर गांव से शुरू किया जाएगा।
  • इस अभियान के लिए बिहार, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान, झारखंड और ओड़िशा के 116 जिलों में प्रत्येक से 25,000 श्रमिकों को इस अभियान के लिए चुना गया है।
  • इनमें 27 पिछड़े जिले भी शामिल हैं। इन जिलों के तहत करीब 66 प्रतिशत प्रवासी श्रमिक आएंगे। छह राज्यों के 116 जिलों के गांव इस कार्यक्रम से साझा सेवा केंद्रों (सीएससी) और कृषि विज्ञान केंद्रों के जरिये जुड़ेंगे।