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जरूरतमंदों की मदद का संकल्प लें सक्षम परिवार : श्याम सोनी

इंदौर। जिन सक्षम परिवारों में आशा के अनुरूप बच्चे नहीं हैं वे समाज के किसी जरूरतमंद परिवार के बच्चे की जिम्मेदारी अपने ऊपर लें एवं ऐसे ही जिन युवाओं को यह लगे कि उन्होंने अपने माता-पिता को कम उम्र में ही उनसे दूर चले गए हैं वे समाज के वृद्ध स्त्री-पुरुषों की सेवा का संकल्प इस महेश नवमी पर्व पर अवश्य व्यक्त करें।यह बात अखिल भारतवर्षीय माहेश्वरी महासभा के सभापति श्याम सोनी ने  महेश नवमी पर्व पर देश भर के समाज बंधुओं को ऑनलाइन माध्यम से संबोधित करते हुए व्यक्त किये। उनके सारगर्भित उदबोधन को हजारों लोगों ने सुना।

आपने कहा कि पहले हमारे समाज में दो मुख्य खर्च हुआ करते थे। अनाज और कपडे का लेकिन इन दोनों का स्थान 10 से भी नीचे चला गया है और जिन खर्चों ने पहले 10 स्थानों पर जगह जमा ली है वह है ट्रैवलिंग, आउटिंग, होटलिंग, फ्यूल, नेट और कनेक्टिविटी बिल, ब्यूटी पार्लर और सैलून बीमा की प्रीमियम, मेडिक्लेम की प्रीमियम जैसे खर्च बहुतायत में होने लगे हैं। लेकिन 2 माह के लॉक डाउन में हमने इसमें से कई सुविधाओं का उपयोग नहीं किया। यानि कि भविष्य में हम इन खर्चों को कम कर सकते हैं। सादगी और मितव्ययिता हमारे पारंपरिक गुण रहे हैं। हम अब बदली हुई परिस्थितियों में उन गुणों को फिर आत्मसात करें, ऐसा मेरा विनम्र आग्रह है।

आपने कहा कि महासभा समाज हित में जो भी निर्णय लेती है चाहे जोधपुर में भोजन जूठा नहीं छोड़ने का हो अथवा सोमनाथ में प्री वेडिंग शूट पर रोक लगाने का, समाज हमेशा उसके साथ खड़ा होता है। अभी महासभा ने समाज के परिवारों से अनुरोध किया कि वे अपनी तय शादियां नहीं टालें। महासभा की एडवाइजरी का पालन करते हुए कई परिवारों ने आगे बढ़ा दिए गए संबंध भी लाक डाउन में संपन्न कर लिए हैं। जो सादगी इस समय विवाहों में मौजूद थी, अब वह भविष्य में हमारी परंपरा बन जाना चाहिए। आपने विवाह करने वालों से अनुरोध किया कि वे अपने यहाँ हुई बचत का एक हिस्सा समाज को भेंट करें। यूं भी महंगी, खर्चीली, आडंबरयुक्त शादियां कभी भी स्थाई वैवाहिक जीवन का संदेश नहीं देती थी। ऐसी शादियों में से अधिकांश कुछ ही समय बाद विवाह विच्छेद की भेंट चढ़ जाने की सूचना हमें पूर्व में भी मिलती रही है।

सोनी ने कहा कि सिर्फ 2 ग्राम के वायरस ने करोड़ों लोगों के मन में मौत का खौफ भर दिया है और ट्रिलियंस आफ ट्रिलियंस की इकोनामी को ध्वस्त कर दिया है. हमें यह मानने के लिए मजबूर होना पड़ेगा की प्रकृति को अपने खिलाफ खिलवाड़ सहन नहीं है एवं मनुष्य को सीख देने का उसका अपना  तरीका है. हम अंधाधुंध अर्बनाइजेशन की ओर बढ़ रहे थे. इसे रोकने की आवश्यकता थी लेकिन हम समृद्धि और शहरों के आकर्षण के पीछे इस तरह भाग रहे थे कि बेटी देने के लिए भी हम मुंबई, अहमदाबाद, पुणे और बेंगलुरु शहर की ओर मुख करते थे. प्रकृति ने एक झटके में इन शहरों का आकर्षण खत्म कर दिया. अब पूरी दुनिया गांव का रुख कर रही है.

आज प्रातः महेश वंदना का सामूहिक गान घर – घर में हुआ 

आज महेश नवमी पर्व पर महासभा के आव्हान पर घर – घर में भगवान महेश का पूजन – अभिषेक संपन्न हुआ। प्रातः 11.15 बजे हर घर पर समाज बंधुओं ने सपरिवार भगवान महेश की वंदना का गान किया। यह अनूठा आयोजन देश भर में पहली बार संपन्न हुआ। सभी परिवारों ने इस आयोजन की फोटो और सेल्फियां सोशल मीडिया पर पोस्ट की जिससे पूरे देश में उत्साह का वातावरण बन गया।