एमपी में गेहूं खरीदी की तैयारी तेज, 1.81 लाख किसानों का रजिस्ट्रेशन हुआ पूरा, 7 मार्च तक आवेदन का मौका, जानिए समर्थन मूल्य और जरूरी शर्तें

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By Raj RathorePublished On: February 22, 2026

मध्य प्रदेश में रबी विपणन वर्ष 2026-27 के लिए समर्थन मूल्य पर गेहूं उपार्जन की तैयारी तेज है। खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत के अनुसार अब तक 1 लाख 81 हजार 793 किसानों ने पंजीयन करा लिया है। राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि पंजीयन की प्रक्रिया 7 मार्च तक जारी रहेगी और जिन किसानों ने अभी तक आवेदन नहीं किया है, वे तय समय में प्रक्रिया पूरी करें।

सरकार ने जिलों और स्थानीय इकाइयों को पंजीयन बढ़ाने के लिए व्यापक सूचना अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं। जिन किसानों के मोबाइल नंबर पिछले रबी और खरीफ पंजीयन रिकॉर्ड में उपलब्ध हैं, उन्हें एसएमएस के जरिए सूचना भेजी जा रही है। इसके साथ ही गांवों में डोंडी पिटवाकर घोषणा, ग्राम पंचायतों के सूचना पटल पर विवरण चस्पा कराने और समिति व मंडी स्तर पर बैनर लगाने को भी कहा गया है।

संभागवार पंजीयन की स्थिति

राज्य स्तर के आंकड़ों में उज्जैन संभाग सबसे आगे है, जहां 73,398 किसानों ने पंजीयन कराया है। भोपाल संभाग में 41,268 और इंदौर संभाग में 27,175 किसान पंजीकृत हुए हैं। जबलपुर संभाग में 12,342, नर्मदापुरम में 11,698 और सागर संभाग में 7,137 किसानों ने प्रक्रिया पूरी की है। ग्वालियर संभाग में 3,358, रीवा में 3,242, चंबल में 1,449 और शहडोल में 726 किसानों का पंजीयन दर्ज किया गया है।

विभाग का कहना है कि अंतिम तारीख नजदीक आने के साथ पंजीयन संख्या और बढ़ने की संभावना है। प्रशासनिक इकाइयों को निर्देश है कि किसान सुविधा केंद्रों पर भीड़ प्रबंधन और दस्तावेज जांच की व्यवस्था समय रहते दुरुस्त रखी जाए।

MSP और पंजीयन केंद्रों की व्यवस्था

प्रदेश में कुल 3,186 पंजीयन केंद्र बनाए गए हैं। केंद्र सरकार ने वर्ष 2026-27 के लिए गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2,585 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है। यह दर पिछले विपणन वर्ष की तुलना में 160 रुपये अधिक है। इसी दर पर पात्र किसानों से उपज खरीदी जाएगी।

राज्य सरकार ने पंजीयन के लिए निःशुल्क और सशुल्क, दोनों व्यवस्थाएं लागू की हैं। निःशुल्क पंजीयन ग्राम पंचायत और जनपद पंचायत कार्यालयों के सुविधा केंद्रों, तहसील कार्यालयों के केंद्रों और सहकारी समितियों व सहकारी विपणन संस्थाओं द्वारा संचालित केंद्रों पर किया जा रहा है।

सशुल्क पंजीयन एमपी ऑनलाइन कियोस्क, कॉमन सर्विस सेंटर, लोक सेवा केंद्र और निजी साइबर कैफे के माध्यम से कराया जा सकता है। इन केंद्रों पर शुल्क वसूली को लेकर कलेक्टर अलग से निर्देश जारी करेंगे। प्रति पंजीयन शुल्क 50 रुपये से अधिक नहीं लिया जाएगा।

किन किसानों के लिए विशेष प्रावधान

सिकमी, बटाईदार, कोटवार और वन पट्टाधारी किसानों के पंजीयन की सुविधा केवल सहकारी समिति और सहकारी विपणन सहकारी संस्था द्वारा संचालित केंद्रों पर उपलब्ध रहेगी। इस श्रेणी के सभी किसानों का सत्यापन राजस्व विभाग करेगा। विभाग ने यह भी तय किया है कि पूर्व वर्षों में अपात्र घोषित किसी संस्था से जुड़े केंद्र प्रभारी या ऑपरेटर को अन्य संस्था में पंजीयन कार्य के लिए नहीं रखा जाएगा।

दस्तावेज, नाम मिलान और सत्यापन प्रक्रिया

पंजीयन के समय भूमि संबंधी दस्तावेज, आधार कार्ड और अन्य फोटो पहचान पत्रों का परीक्षण अनिवार्य है और उसका रिकॉर्ड रखना होगा। किसान को बैंक का नाम, खाता संख्या और IFSC कोड भी देना होगा। पंजीयन उसी स्थिति में स्वीकार होगा, जब भू-अभिलेख के खाता और खसरे में दर्ज नाम, आधार कार्ड में दर्ज नाम से मेल खाता हो।

नाम में विसंगति होने पर पंजीयन का सत्यापन तहसील कार्यालय से कराया जाएगा। यह सत्यापन होने के बाद ही ऐसा पंजीयन वैध माना जाएगा। सरकार ने पंजीयन और उपज विक्रय दोनों के लिए आधार नंबर का वेरिफिकेशन अनिवार्य रखा है। सत्यापन OTP या बायोमेट्रिक डिवाइस से किया जा सकता है, और जरूरत होने पर पोस्ट ऑफिस के आधार सुविधा केंद्र का उपयोग भी मान्य होगा।

भुगतान के नियम और बैंक खाते की शर्तें

समर्थन मूल्य पर बेची गई उपज का भुगतान प्राथमिकता के आधार पर किसान के आधार-लिंक बैंक खाते में किया जाएगा। यदि किसी तकनीकी या बैंकिंग कारण से आधार-लिंक खाते में भुगतान संभव नहीं होता, तो पंजीयन के दौरान उपलब्ध कराए गए बैंक खाते में राशि भेजी जा सकेगी।

अक्रियाशील बैंक खाते, संयुक्त खाते और फिनो, एयरटेल या पेटीएम आधारित खातों को पंजीयन के लिए मान्य नहीं माना जाएगा। राज्य आपूर्ति निगम पंजीयन के दौरान आधार-लिंक खाते की पुष्टि के लिए ई-उपार्जन/JIT पोर्टल के माध्यम से 1 रुपये का ट्रांजेक्शन कराएगा, ताकि भुगतान के समय अड़चन कम हो।

सरकार की प्राथमिकता है कि पंजीयन, सत्यापन और भुगतान की पूरी प्रक्रिया समयबद्ध रहे, ताकि गेहूं उपार्जन के दौरान किसानों को केंद्रों पर अनावश्यक परेशानी न हो और भुगतान सीधे उनके सत्यापित खातों में पहुंचे।