बॉम्बे हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर महाराष्ट्र के पूर्व सीएम उद्धव ठाकरे, उनकी पत्नी रश्मि और दो बेटों आदित्य और तेजस की संपत्ति की सीबीआई और ईडी से जांच कराने की मांग की गई। बता दें आपराधिक जनहित याचिका गौरी और अभय भिड़े द्वारा दायर की गई, जिनके परिवार ने आपातकाल के दौरान शिवसेना सुप्रीमो बाल ठाकरे के साप्ताहिक को संक्षिप्त रूप से छापा।
गौरी ने कहा कि वह “न खाऊगा न खाने दूंगा” के आदर्श वाक्य से प्रेरित है। याचिकाकर्ता गौरी भिड़े ने अदालत से मांग की है कि उद्धव ठाकरे और उनके परिवार की संपत्ति की जांच सीबीआई और ईडी से करवाई जानी चाहिए। याचिका में उद्धव ठाकरे की पत्नी रश्मि और दो बेटों आदित्य और तेजस की संपत्ति का भी ज़िक्र किया गया है।
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गौरी भिड़े, दादर के रहने वाले हैं तथा इस याचिका में उनके पिता अभय भिड़े भी साथ हैं। इस याचिका पर जस्टिस एस.गंगापुरवाला और जस्टिस आर एम लड्ढा की पीठ ने सुनवाई की
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याचिका में कहा गया कि ट्रस्ट की हिस्सेदारी बदल दी गई और अंततः ठाकरे के स्वामित्व में आ गई। इसमें कहा गया कि COVID-19 लॉकडाउन के दौरान, ठाकरे की कंपनी प्रबोधन प्रकाशन प्रा. लिमिटेड ने 42 करोड़ रुपये के कारोबार और 11.5 करोड़ रुपये के लाभ का ‘शानदार प्रदर्शन’ दिखाया। याचिकाकर्ता इसे काले धन को सफेद धन में बदलने का स्पष्ट मामला’ कहते हैं।