इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पानी पीने से हुई 15 लोगों की मौत के मामले ने अब बड़ा सियासी रूप ले लिया है। इस गंभीर त्रासदी पर भारतीय जनता पार्टी की वरिष्ठ नेता और मध्य प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री Uma Bharti ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने इंदौर नगर निगम की कार्यप्रणाली और महापौर पुष्यमित्र भार्गव की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
उमा भारती ने अपनी ही पार्टी की सरकार और स्थानीय प्रशासन को कटघरे में खड़ा करते हुए महापौर की कथित बेबसी पर तंज कसा है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब नगर निगम और प्रशासनिक अधिकारियों के बीच तनातनी की खबरें सामने आ रही थीं।
महापौर की लाचारी पर सवाल
1. इंदौर दूषित पानी के मामले में यह कौन कह रहा है कि हमारी चली नहीं।
2. जब आपकी नहीं चली तो आप पद पर बैठे हुए बिसलेरी का पानी क्यों पीते रहे? पद छोड़कर जनता के बीच क्यों नहीं पहुंचे?
3. ऐसे पापों का कोई स्पष्टीकरण नहीं होता या तो प्रायश्चित या दंड!— Uma Bharti (@umasribharti) January 2, 2026
पूर्व मुख्यमंत्री ने महापौर पुष्यमित्र भार्गव के उस बयान पर प्रतिक्रिया दी जिसमें उन्होंने अधिकारियों द्वारा बात न सुनने की बात कही थी। उमा भारती ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि एक महापौर की बात अधिकारी नहीं सुन रहे हैं, तो उन्हें पद पर बने रहने का कोई अधिकार नहीं है।
“जब आपकी नहीं चली तो पद पर बैठे बिसलेरी क्या पी रहे थे? अगर अधिकारी नहीं सुनते तो इस्तीफा दे देना चाहिए था।” — उमा भारती, पूर्व मुख्यमंत्री
उमा भारती का यह बयान बताता है कि पार्टी के भीतर भी इस घटना को लेकर गहरा असंतोष है। उन्होंने इशारों में यह भी साफ कर दिया कि जनता की जान की कीमत पर प्रशासनिक लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जा सकती।
प्रशासनिक लापरवाही
भागीरथपुरा में दूषित जल वितरण की समस्या लंबे समय से बनी हुई थी, जिसकी परिणति 15 लोगों की दुखद मौत के रूप में हुई। इस मामले में कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भी सोशल मीडिया पर पोस्ट कर प्रशासनिक लापरवाही को उजागर किया था। विपक्ष लगातार आरोप लगा रहा है कि नगर निगम और जिला प्रशासन के बीच तालमेल की कमी के कारण आम जनता को जान गंवानी पड़ी है।
सिस्टम पर सवालिया निशान
इंदौर, जो लगातार स्वच्छता में नंबर वन रहने का गौरव प्राप्त करता रहा है, वहां ऐसी घटना होना पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े करता है। उमा भारती की टिप्पणी ने इस बहस को और हवा दे दी है कि क्या वाकई चुनी हुई जन प्रतिनिधियों की नौकरशाही के आगे नहीं चल रही है। घटना के बाद से ही क्षेत्र में आक्रोश का माहौल है। स्थानीय रहवासियों का आरोप है कि शिकायतों के बावजूद समय रहते निगम ने पाइपलाइन सुधारने की सुध नहीं ली।










