PWD विभाग ने तोड़े भ्रष्टाचार के सारे रिकॉर्ड, फर्जी कागजों पर चीफ इंजीनियर केपीएस राणा ने अपने पड़ोसी को दिलाए 25 करोड़ रुपए के टेंडर

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By Raj RathorePublished On: May 22, 2026
KPS Rana PWD Chief Engineer

KPS Rana PWD Chief Engineer : मध्यप्रदेश के लोक निर्माण विभाग (PWD) में करोड़ों रुपये के टेंडर आवंटन को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। आरोप है कि विभागीय नियमों और टेंडर प्रक्रिया को दरकिनार कर चहेती कंपनी को फायदा पहुंचाने के लिए फर्जी दस्तावेजों तक का इस्तेमाल किया गया। मामला छतरपुर जिले से जुड़ा है, लेकिन इसकी डोर सीधे भोपाल स्थित विभागीय मुख्यालय और विभाग के प्रमुख अभियंता के.पी.एस. राणा तक पहुंचती बताई जा रही है।

जानकारी के मुताबिक छतरपुर में पिछले छह से सात महीनों के दौरान करीब 25 करोड़ रुपये से अधिक के निर्माण कार्यों के टेंडर गिर्राज कंस्ट्रक्शन कंपनी को दिए गए। आरोप है कि अन्य कंपनियों को तकनीकी खामियां बताकर बाहर किया गया, जबकि गिर्राज कंपनी के दस्तावेजों में कथित त्रुटियों के बावजूद उसे योग्य घोषित कर टेंडर जारी कर दिए गए।

प्रमुख अभियंता पर पक्षपात के आरोप

बताया जा रहा है कि प्रमुख अभियंता के.पी.एस. राणा का गृह क्षेत्र टीकमगढ़ जिले का पेतपुरा गांव है, जबकि गिर्राज कंस्ट्रक्शन कंपनी संचालक प्रदीप राय का निवास समीपस्थ मऊरानीपुर क्षेत्र में है। इसी को लेकर आरोप लगाए जा रहे हैं कि पड़ोसी संबंधों के चलते कंपनी को अनुचित लाभ पहुंचाया गया।

हालांकि टेंडर प्रक्रिया औपचारिक रूप से छतरपुर और सागर में पदस्थ अधिकारियों के स्तर पर संचालित हुई, लेकिन आरोप है कि पूरी प्रक्रिया के पीछे प्रमुख अभियंता स्तर से दबाव बनाया गया।

फर्जी दस्तावेजों के सहारे हासिल किया टेंडर

विवादित टेंडर छतरपुर के मेन रोड से ग्राम रजपुरा और गुलगंज मेन रोड से पाथापुर मार्ग निर्माण से जुड़ा है, जिसकी लागत करीब 5 करोड़ 27 लाख रुपये बताई जा रही है। टेंडर आईडी 2025-PWDRB-4516-1 के अनुसार निविदा में भाग लेने वाली कंपनी के पास खुद की जेसीबी, टेंडम रोलर और मोटर ग्रेडर होना अनिवार्य था।

आरोप है कि गिर्राज इन्फ्रास्ट्रक्चर के पास आवश्यक मशीनरी उपलब्ध नहीं थी, बावजूद इसके फर्जी इनवॉइस और दस्तावेज लगाकर पात्रता हासिल की गई। शिकायतकर्ताओं के मुताबिक कंपनी ने टेंडम रोलर खरीदे जाने के जो बिल प्रस्तुत किए, उनमें जीएसटी की दर 28 प्रतिशत दिखाई गई, जबकि संबंधित मशीन पर वास्तविक जीएसटी 18 प्रतिशत लागू होती है।

इनवॉइस नंबर भी निकला फर्जी

मामला तब खुला जब टेंडर प्रक्रिया से बाहर हुई अन्य कंपनियों ने बिल के इनवॉइस नंबर की जांच कराई। संबंधित कंपनी रियान इन्फ्रासेल्यूशन ने लिखित रूप से स्पष्ट किया कि उसने गिर्राज इन्फ्रास्ट्रक्चर को कोई टेंडम रोलर नहीं बेचा और बिल में दर्शाया गया इनवॉइस नंबर 112517 फर्जी है।

इसके बाद मोटर ग्रेडर से जुड़े दस्तावेजों की भी जांच हुई। आरोप है कि टेंडर में जो आरटीओ रजिस्ट्रेशन नंबर MP16DA0382 प्रस्तुत किया गया, वह मोटर ग्रेडर का नहीं बल्कि मिनी ग्रेडर BS-III का निकला।

शिकायत के बावजूद जारी हुआ टेंडर

शिकायतकर्ताओं का दावा है कि सभी दस्तावेज और कथित फर्जीवाड़े के प्रमाण विभागीय प्रमुख अभियंता के.पी.एस. राणा को लिखित रूप से सौंपे गए थे, बावजूद इसके गिर्राज कंपनी को टेंडर स्वीकृत कर दिया गया।

आरोप यह भी हैं कि जिन कंपनियों ने फर्जी दस्तावेजों की शिकायत की, उन्हीं को प्रक्रिया से अपात्र घोषित कर दिया गया। जबकि नियमों के मुताबिक फर्जी दस्तावेज प्रस्तुत करने वाली कंपनी पर ब्लैकलिस्ट जैसी कार्रवाई होनी चाहिए थी।

विभागीय कार्यप्रणाली पर उठे सवाल

पूरा मामला सामने आने के बाद पीडब्ल्यूडी की टेंडर प्रक्रिया और पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो गए हैं। अब देखना होगा कि विभाग और सरकार इस मामले में कोई जांच कराते हैं या नहीं। फिलहाल इस कथित टेंडर खेल को लेकर विभागीय गलियारों में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है।