डेली कॉलेज सोसायटी को मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ से एक महत्वपूर्ण कानूनी राहत मिली है। माननीय न्यायमूर्ति विजय कुमार शुक्ला एवं माननीय न्यायमूर्ति आलोक अवस्थी की डिवीजन बेंच ने डेली कॉलेज सोसायटी द्वारा दायर रिट अपील पर सुनवाई करते हुए सिंगल बेंच के उस हिस्से को निरस्त कर दिया है, जिसमें रजिस्ट्रार और साइबर सेल को शिकायतों पर विस्तृत जांच कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए थे।
यह अपील डेली कॉलेज सोसायटी की ओर से उस अंतरिम आदेश के खिलाफ दायर की गई थी, जिसमें चुनाव प्रक्रिया से जुड़ी शिकायतों पर रजिस्ट्रार और साइबर सेल को 15 दिनों के भीतर जांच कर रिपोर्ट देने के निर्देश दिए गए थे। सोसायटी का तर्क था कि बिना उनका पक्ष सुने और विवाद के गुण-दोष पर विचार किए इस प्रकार के निर्देश जारी करना न्यायसंगत नहीं है।
महत्वपूर्ण तर्क
डेली कॉलेज सोसायटी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता विजय कुमार आसुधानी ने अधिवक्ता रक्षित आसुधानी और अधिवक्ता रविन्द्र भावसार के साथ प्रभावी पैरवी की। उन्होंने न्यायालय के समक्ष कहा कि सिंगल बेंच द्वारा जारी निर्देश वस्तुतः अंतिम राहत की प्रकृति के थे, जबकि मामला अभी प्रारंभिक सुनवाई के स्तर पर था।
उन्होंने यह भी तर्क दिया कि संबंधित प्राधिकरणों के स्वतंत्र विवेकाधिकार को बिना सभी पक्षों को सुने सीमित नहीं किया जा सकता। साथ ही यह भी कहा गया कि किसी शिकायत के आधार पर सीधे विस्तृत जांच के निर्देश देना प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के विपरीत है।
डिवीजन बेंच ने क्या कहा
सुनवाई के बाद डिवीजन बेंच ने माना कि सिंगल बेंच द्वारा रजिस्ट्रार और साइबर सेल को दिए गए निर्देश अंतरिम आदेश के स्तर पर जारी किए गए थे, जबकि उनकी प्रकृति अंतिम राहत जैसी थी।
खंडपीठ ने स्पष्ट कहा कि ऐसे निर्देश सभी पक्षों को सुनने और विवाद का परीक्षण किए बिना जारी नहीं किए जा सकते। न्यायालय ने यह भी कहा कि इन निर्देशों ने संबंधित प्राधिकरणों के स्वतंत्र विवेकाधिकार को प्रभावित किया है।
इसी आधार पर कोर्ट ने रजिस्ट्रार और साइबर सेल को दिए गए अनिवार्य निर्देशों को निरस्त कर दिया।
अब फिर होगी सुनवाई
हाईकोर्ट ने निर्देश दिया है कि याचिका को पुनः सिंगल बेंच के समक्ष सूचीबद्ध किया जाए, जहां सभी पक्षों को सुनने के बाद संबंधित प्रार्थनाओं पर निर्णय लिया जाएगा।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह आदेश डेली कॉलेज के लिए महत्वपूर्ण राहत है, क्योंकि हाल के दिनों में चुनाव प्रक्रिया को लेकर लगाए गए आरोपों के आधार पर तत्काल जांच की मांग की जा रही थी।
प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों की पुनर्पुष्टि
डेली कॉलेज से जुड़े वरिष्ठ सदस्यों ने इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि यह निर्णय प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों की पुनर्पुष्टि करता है। उनका कहना है कि संस्था हमेशा पारदर्शिता, विधिक प्रक्रिया और न्यायिक व्यवस्था का सम्मान करती रही है।
उन्होंने कहा कि संस्था भविष्य में भी न्यायालय द्वारा मांगे गए हर सहयोग के लिए प्रतिबद्ध रहेगी।
प्रशासनिक ढांचे पर बनी हुई है नजर
उल्लेखनीय है कि पिछले कुछ समय से डेली कॉलेज की चुनाव प्रक्रिया और प्रशासनिक ढांचे को लेकर कई कानूनी चुनौतियां विभिन्न मंचों पर सामने आई थीं। हालांकि न्यायिक कार्यवाहियों में लगातार यह बात उभरकर सामने आई है कि किसी भी आरोप या शिकायत का परीक्षण तथ्यों और विधिसम्मत प्रक्रिया के आधार पर ही होना चाहिए।
इस ताजा फैसले के बाद डेली कॉलेज के नए बोर्ड और प्रशासनिक संरचना को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच संस्था को एक महत्वपूर्ण कानूनी मजबूती मिली है। इसे संस्था की स्थिरता, प्रशासनिक निरंतरता और संस्थागत गरिमा के पक्ष में सकारात्मक घटनाक्रम माना जा रहा है।











