30 साल में 2.5 करोड़ मिली सैलरी, संपत्ति 10 करोड़ से अधिक की निकली, इंदौर में लोकायुक्त ने संयुक्त संचालक पर की कार्रवाई

Author Picture
By Raj RathorePublished On: June 10, 2026
lakshmi narayan kandwal

इंदौर में महिला एवं बाल विकास विभाग के संयुक्त संचालक लक्ष्मी नारायण कंडवाल के खिलाफ लोकायुक्त पुलिस ने आय से अधिक संपत्ति मामले में बड़ी कार्रवाई की है। बुधवार सुबह लोकायुक्त की टीम ने उनके कई ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की, जिसमें करोड़ों रुपये की चल और अचल संपत्तियों का खुलासा होने का दावा किया गया है।

लोकायुक्त की प्रारंभिक जांच के अनुसार कंडवाल और उनके परिवार के नाम पर करीब 10 करोड़ 82 लाख 73 हजार रुपये की संपत्तियां सामने आई हैं। जांच एजेंसियों का दावा है कि यह संपत्ति उनकी वैध आय की तुलना में कई गुना अधिक है।

करोड़ों की संपत्ति

लोकायुक्त एसपी डॉ. राजेश सहाय के मुताबिक प्रारंभिक जांच में पता चला है कि लगभग 30 वर्षों की शासकीय सेवा के दौरान लक्ष्मी नारायण कंडवाल की वैध आय करीब 2.50 करोड़ रुपये रही। इसके मुकाबले उनके पास पाई गई संपत्ति करीब 287.7 प्रतिशत अधिक बताई जा रही है।

गोपनीय शिकायतों और प्रारंभिक जांच में मिले तथ्यों के आधार पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया, जिसके बाद कार्रवाई को अंजाम दिया गया।

सुबह 6 बजे शुरू हुई कार्रवाई

लोकायुक्त टीम ने बुधवार सुबह करीब 6 बजे इंदौर की स्कीम-103 स्थित आनंद विहार कॉलोनी में कंडवाल के आवास सहित अन्य ठिकानों पर छापा मारा। कार्रवाई के दौरान अधिकारियों ने संपत्तियों, बैंक खातों, निवेश और आय के स्रोतों से जुड़े दस्तावेजों की जांच शुरू की। कई महत्वपूर्ण दस्तावेज और रिकॉर्ड जब्त किए गए हैं।

जांच के दौरान एक पांच मंजिला व्यावसायिक भवन भी सामने आया है, जिसकी अनुमानित कीमत 2.66 करोड़ रुपये से अधिक बताई जा रही है। लोकायुक्त के अनुसार इस भवन में सुपर मार्केट और जिम संचालित हो रहे हैं। जानकारी के मुताबिक सुपर मार्केट का संचालन कंडवाल के पुत्र पवन और अभिषेक द्वारा किया जा रहा है, जबकि जिम को करीब 1.15 लाख रुपये प्रतिमाह किराए पर दिया गया है।

परिवार के नाम पर भी मिली संपत्तियां

लोकायुक्त टीम ने कंडवाल, उनकी पत्नी, पुत्रों और बहू के नाम पर खरीदी गई संपत्तियों से जुड़े दस्तावेज भी जब्त किए हैं।

अधिकारियों का कहना है कि सभी निवेश, बैंक खातों, अचल संपत्तियों और आय के स्रोतों की विस्तृत जांच की जा रही है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि संपत्ति अर्जित करने में इस्तेमाल की गई राशि के स्रोत क्या थे और क्या वे घोषित आय के अनुरूप हैं या नहीं।