सीताराम ठाकुर, भोपाल। भ्रष्टाचार के आरोप में फंसीं ग्वालियर की तत्कालीन महापौर समीक्षा गुप्ता को अब क्लीनचिट देने की तैयारी है। इसके पहले भी तीन आईएएस को मामले से बाहर निकालने लोकायुक्त को अभियोजन की मंजूरी नहीं दी गई।
हालांकि भाजपा सरकार ‘समीक्षा’ को महिला आयोग में उपाध्यक्ष या सदस्य बनाने जा रही है, क्योंकि पुलिस की वेरीफिकेशन रिपोर्ट में गुप्ता पर भ्रष्टाचार का मामला दर्ज होने की बात कही गई, इसलिए अभी तक नियुक्ति नहीं की जा सकी है।
ग्वालियर की तत्कालीन महापौर समीक्षा गुप्ता तथा पार्षद डॉ. अंजली रायजादा सहित नगर निगम के कमिश्नर रहे वेद प्रकाश शर्मा, एनबीएस राजपूत और विनोद शर्मा पर भ्रष्टाचार के आरोप में मप्र लोकायुक्त ने अपराध क्रमांक 283/2017 में प्रकरण दर्ज कर रखा है। इन सभी पर भ्रष्टाचार अधिनियम, 1988 की धारा13 (1) डी, 13 (2) एवं भारतीय दंड अधिनियम की धारा 120 बी के तहत दंडनीय अपराध होने पर न्यायालय में अभियोजन (चालाना) पेश करने की अनुमति लोकायुक्त ने राज्य सरकार से मांगी थी।
तत्कालीन समय में लोकायुक्त कार्यालय द्वारा चाही गई अभियोजन स्वीकृति के प्रस्ताव प्रथम दृष्टया अपराध प्रमाणित नहीं पाए जाने के कारण स्वीकृति अमान्य किए जाने का प्रस्ताव नगरीय प्रशासन विभाग ने जीएडी को भेजा था, लेकिन अपराध के लिए तत्कालीन महापौर समीक्षा गुप्ता और पार्षद डॉ. अंजली रायजादा को दोषी ठहराया गया। इस तरह तीनों आईएएस अफसरों को भ्रष्टाचार के मामले में क्लीनचिट दे दी गई। इनमें वेद प्रकाश शर्मा और विनोद शर्मा रिटायर हो चुके हैं, जबकि बीएनएस राजपूत अभी भी दिल्ली में पदस्थ है।
क्या था मामला
गौरतलब है कि नगरपालिक निगम ग्वालियर में वर्ष 2010 से लेकर 2014 तक स्वेच्छानुदान निधि मद से दो दर्जन से अधिक व्यक्तियों को आर्थिक सहायता प्रदान की गई। इसके लिए मप्र नगर पालिका निगम अधिनियम, 1965 एवं मप्र नगर पालिका (मेयर-इन काउंसिल)प्रेसीडेंट-इन-काउंसिल के कामकाज का संचालन तथा प्राधिकारियों की शक्तियां नियम, 1998 के उपनियम -5(4)का उल्लंघन करते हुए बिना परिषद के पूर्व अनुमोदन के आर्थिक सहायता बांट दी गई।
इस मामले में तत्कालीन महापौर समीक्षा गुप्ता, पार्षद डॉ. अंजली रायजादा और आईएएस अधिकारी वेद प्रकाश शर्मा, विनोद शर्मा तथा बीएनएस राजपूत को दोषी ठहराया गया, लेकिन सरकार ने आईएएस अधिकारियों को लेकर अभियोजन की अनुमति नहीं दी और उन्हें क्लीनचिट दे दी।
46 लाख से अधिक की सहायता बांटी
जांच रिपोर्ट में कहा गया है कि तत्कालीन महापौर समीक्षा गुप्ता द्वारा अपने कार्यकाल 1 जनवरी 2010 से लेकर 31 जनवरी 2014 के बीच 1143 व्यक्तियों को आर्थिक सहायता के रूप में 46 लाख, 31 हजार 103 रुपए की राशि बांटी गई, जबकि इसकी अनुमति नगरपालिक परिषद से नहीं ली गई। इसके चलते तीनों आईएएस अधिकारियों के अलावा पार्षद डॉ. अंजली रायजादा को भी दोषी पाया गया।
अब भाजपा सरकार समीक्षा गुप्ता को मप्र राज्य महिला आयोग में उपाध्यक्ष या सदस्य बनाने जा रही है, जबकि आयोग का अध्यक्ष रेखा यादव को बना दिया गया है। इस मामले में समीक्षा गुप्ता और डॉ. अजंली रायजादा को क्लीनचिट देने के लिए नगरीय प्रशासन आयुक्त संकेत भोंडवे के हस्ताक्षर से प्रस्ताव 8 मई 2026 को सरकार के पास भेज दिया है।
सूत्र बताते है कि परीक्षण के बाद इसे लोकायुक्त को भेजा जाएगा। इस मामले में आयुक्त नगरीय प्रशासन संकेत भोंडवे से चर्चा करनी चाही, लेकिन उनसे बात नहीं हो सकी।











