मध्य प्रदेश में मुख्यमंत्री मोहन यादव ने एक साथ छह नई योजनाओं की घोषणा की है। सरकार का कहना है कि ये पहल बच्चों के पोषण, कृषि आय, वन संरक्षण, जनजातीय विरासत, शहरी ढांचे और ग्रामीण भूमि अधिकार जैसे क्षेत्रों में काम करेंगी। इन योजनाओं के लिए बजट 2026 में अलग-अलग प्रावधान किए गए हैं।
राज्य में पहले से लाड़ली बहना, लाडली लक्ष्मी और किसानों के लिए भावांतर जैसी योजनाएं चल रही हैं। नई घोषणाओं को सरकार ने अगले चरण की नीतिगत दिशा के रूप में पेश किया है। प्रशासनिक स्तर पर इनका फोकस जमीनी ढांचे को सुधारना और दीर्घकालिक लाभ सुनिश्चित करना बताया गया है।
सरकारी संकेतों के अनुसार, इन योजनाओं में सीधे खाते में राशि ट्रांसफर वाला मॉडल प्रमुख नहीं रहेगा। लाभ नागरिकों तक सेवाओं, आधारभूत सुविधाओं और कानूनी अधिकारों के रूप में पहुंचेगा। इसलिए इनका असर योजनाओं के क्रियान्वयन की गति और गुणवत्ता पर निर्भर करेगा।
1) यशोदा दुग्ध प्रदाय योजना
सरकार ने बच्चों में कुपोषण कम करने के लिए यशोदा दुग्ध प्रदाय योजना घोषित की है। इस योजना पर पांच साल में 6600 करोड़ रुपये खर्च करने का लक्ष्य रखा गया है। वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 700 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
योजना के तहत आंगनबाड़ी और स्कूलों में बच्चों को नियमित दूध और पोषण आहार उपलब्ध कराने की बात कही गई है। इसका उद्देश्य प्रोटीन और कैल्शियम की कमी कम करना है। सरकार ने यह भी संकेत दिया है कि आंगनबाड़ी में पंजीकृत गर्भवती और प्रसूता महिलाओं के साथ उनके बच्चों को भी योजना का लाभ दायरे में रखा जाएगा।
2) समृद्ध वन योजना
समृद्ध वन योजना के तहत वन क्षेत्रों से अतिक्रमण हटाने और बड़े पैमाने पर पौधरोपण की तैयारी है। योजना का उद्देश्य हरित आवरण बढ़ाना और भूजल संरक्षण को सहारा देना है। इसके साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन का लक्ष्य भी जोड़ा गया है।
सरकार इसे पर्यावरण संरक्षण और ग्रामीण आजीविका के संयुक्त मॉडल के रूप में आगे बढ़ाना चाहती है। वन प्रबंधन, पौधरोपण और रखरखाव से गांव स्तर पर आय के अवसर बढ़ाने की परिकल्पना की गई है।
3) कृषि वानिकी योजना
कृषि वानिकी योजना निजी भूमि पर फलदार पेड़ और उपयोगी पौधों के रोपण को प्रोत्साहन देगी। यह योजना किसानों को एकल फसल आय से बहु-आय मॉडल की ओर ले जाने के उद्देश्य से घोषित की गई है।
नीति के अनुसार, फसल के साथ लकड़ी और फल आधारित आय स्रोत विकसित होंगे। सूखा या फसल नुकसान जैसी स्थिति में वैकल्पिक आय मिलने से जोखिम कम करने का प्रयास रहेगा। सरकार का लक्ष्य किसानों को दीर्घकालिक आर्थिक सुरक्षा की ओर ले जाना है।
4) जनजातीय देवलोक वन संरक्षण योजना
इस योजना के तहत आदिवासी आस्था और सांस्कृतिक महत्व वाले वनों के संरक्षण पर काम किया जाएगा। सरकार ने इसे जनजातीय विरासत संरक्षण से जोड़कर पेश किया है। योजना में धार्मिक पर्यटन बढ़ाने की दिशा भी शामिल है।
राज्य के अनुसार, इससे आदिवासी महिलाओं और युवाओं के लिए स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ सकते हैं। साथ ही, जनजातीय क्षेत्रों की सांस्कृतिक पहचान को संस्थागत समर्थन मिलेगा और पर्यटन नक्शे पर नए केंद्र विकसित हो सकते हैं।
5) द्वारका नगर योजना
द्वारका नगर योजना के तहत राज्य सरकार ने तीन वर्षों में शहरी आधारभूत ढांचे को मजबूत करने का लक्ष्य रखा है। योजना लागू होने पर शहरों में सड़क, ड्रेनेज और पेयजल व्यवस्था में सुधार का खाका सामने रखा गया है।
सरकार के दावे के मुताबिक जलभराव और ट्रैफिक जैसी समस्याओं में राहत देने के लिए परियोजनाएं चरणबद्ध ढंग से शुरू होंगी। बेहतर शहरी ढांचे से व्यापार और निवेश गतिविधियों पर भी सकारात्मक असर की उम्मीद जताई गई है।
6) आबादी भूमि स्वामित्व अधिकार पंजीयन योजना
आबादी भूमि स्वामित्व अधिकार पंजीयन योजना को राज्य की प्रमुख घोषणाओं में रखा गया है। इसके तहत 46000 करोड़ रुपये मूल्य की आबादी भूमि के स्वामित्व अधिकारों का नि:शुल्क पंजीयन प्रस्तावित है। इस प्रक्रिया पर 3800 करोड़ रुपये खर्च करने का प्रावधान बताया गया है।
योजना का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण परिवारों को कानूनी मालिकाना हक देना है। इसके लागू होने पर बैंक ऋण तक पहुंच आसान होने, जमीन विवाद कम होने और संपत्ति के आर्थिक मूल्य में वृद्धि की संभावना जताई गई है।
DBT नहीं, ढांचागत असर पर जोर
सरकार ने स्पष्ट किया है कि नई योजनाओं में लाड़ली बहना या अन्य DBT मॉडल जैसी प्रत्यक्ष नकद ट्रांसफर व्यवस्था मुख्य तंत्र नहीं है। इन पहलों का लाभ सेवा वितरण, सार्वजनिक निवेश, संस्थागत ढांचे और अधिकार-आधारित प्रक्रियाओं से मिलने की बात कही गई है।
नीतिगत आकलन के स्तर पर इन योजनाओं से पांच बड़े परिणामों की अपेक्षा रखी जा रही है: कुपोषण के आंकड़ों में सुधार, किसानों की आय में विविधता, पर्यावरण संतुलन की दिशा में प्रगति, शहरी जीवन स्तर में सुधार और ग्रामीण आर्थिक सशक्तिकरण। अब फोकस इन घोषणाओं को समयबद्ध और प्रभावी क्रियान्वयन में बदलने पर रहेगा।










