मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने बड़ी घोषणा करते हुए कहा कि प्रदेश के सभी अस्पतालों में गर्भ संस्कार केंद्र खोले जाएंगे। यह ऐलान उन्होंने इंदौर के डेली कालेज में आयोजित गर्भ संस्कार कार्यक्रम में किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि नए अस्पतालों की डिजाइन में ही इस कक्ष का प्रावधान किया जाएगा। उन्होंने गर्भ संस्कार के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला।
संतान को बताया पीढ़ी की अमरता की निशानी
CM मोहन यादव ने कहा कि संतान पीढ़ी की अमरता की निशानी है। इससे संस्कार की धारा आगे बहती रहती है। उन्होंने महाभारत के अभिमन्यु का उदाहरण दिया।
“अभिमन्यु ने गर्भ में रहकर चक्रव्यूह तोड़ने की बात सुनी थी। यह सभी जानते हैं। अब विज्ञान ने भी साबित कर दिया है कि गर्भ संस्कार कितना आवश्यक है।” — मुख्यमंत्री मोहन यादव
मुख्यमंत्री ने कहा कि आज के दौर में तमाम आकर्षणों के बीच वंशवृद्धि परमात्मा का प्रसाद है। वंशवृद्धि के साथ राष्ट्र निर्माण की धारा भी निकलती है।
भारत उत्थान की राह पर
कार्यक्रम में RSS के पूर्व सरकार्यवाह भैयाजी जोशी भी मौजूद थे। उन्होंने कहा कि भारत उत्थान की राह पर चल रहा है। आजकल विश्वगुरु की चर्चा होती है।
“भारत के चिंतन में सुपर पावर बनना है। हमारा देश विश्व को सही मार्ग बताता है। उसमें विश्व का मार्गदर्शन करने का सामर्थ्य है।” — भैयाजी जोशी
गर्भधारण में मानसिक स्थिति का महत्व
कार्यक्रम में अन्य वक्ताओं ने भी अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि गर्भधारण के समय माता-पिता की मानसिक स्थिति बहुत महत्वपूर्ण होती है। इसका सीधा असर गर्भ में पलने वाले शिशु पर पड़ता है। वक्ताओं ने कहा कि मां अपने खून और रक्त से शरीर के भीतर एक नए शरीर का निर्माण करती है। मां की साधना एक साधु की साधना से भी बड़ी है।
उन्होंने कहा कि जो स्त्री परिवार को बच्चा देती है वह वंदनीय है। मनुष्य का कर्म उसके भाग्य और भविष्य का निर्माण करता है।
जीवनशैली का असर डीएनए पर
वक्ताओं ने बताया कि जब व्यक्ति अपनी जीवनशैली और व्यवहार में बदलाव करता है तो इसका असर जींस पर पड़ता है। बच्चों में माता-पिता का डीएनए होता है। इसलिए गर्भावस्था के दौरान क्या सावधानियां रखनी चाहिए यह जानना बहुत जरूरी है। गर्भ संस्कार केंद्रों में इसी बारे में जानकारी दी जाएगी।
नए अस्पतालों में होगा विशेष प्रावधान
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने स्पष्ट किया कि प्रदेश में बनने वाले नए अस्पतालों की डिजाइन में ही गर्भ संस्कार कक्ष का प्रावधान किया जाएगा। मौजूदा अस्पतालों में भी ये केंद्र स्थापित होंगे। इस पहल से गर्भवती महिलाओं और उनके परिवारों को वैज्ञानिक और पारंपरिक दोनों तरह की जानकारी मिल सकेगी। यह कदम स्वस्थ पीढ़ी के निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।











