EU India Trade Deal : भारत और यूरोपीय संघ के बीच हुए ऐतिहासिक व्यापार समझौते से देश के औद्योगिक परिदृश्य में बड़े बदलाव के संकेत मिल रहे हैं। इस डील का सीधा फायदा मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर को मिलता दिख रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यूरोपीय निवेश और इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट के बाद इंदौर, अमेरिका के ओहियो राज्य की तर्ज पर एक प्रमुख ‘लॉजिस्टिक्स हब’ के रूप में उभर सकता है।
इस समझौते के तहत भारत से यूरोप निर्यात होने वाले 99.5% उत्पादों पर अब शून्य आयात शुल्क (Zero Duty) लगेगा। इससे न केवल निर्यात को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि घरेलू उत्पादन में भी तेजी आएगी। इसका सीधा असर रोजगार के नए अवसरों पर पड़ेगा।
पीथमपुर से यूरोप तक का सफर होगा आसान
व्यापारी एसोसिएशन के अध्यक्ष गौतम कोठारी के अनुसार, यह डील इंदौर और इसके आसपास के औद्योगिक क्षेत्रों के लिए गेम-चेंजर साबित होगी। पीथमपुर इंडस्ट्रियल एरिया से यूरोप को होने वाला एक्सपोर्ट दोगुना होने की संभावना जताई जा रही है। इसका सबसे ज्यादा लाभ फार्मास्यूटिकल्स, ऑटोमोबाइल पार्ट्स, लॉजिस्टिक्स और छोटे एवं मध्यम उद्योगों (MSME) को मिलेगा।
यूरोपीय कंपनियां भारत में रेलवे लिंक, बंदरगाहों के आधुनिकीकरण और हाई-स्पीड डेटा केबल नेटवर्क में भारी निवेश करने की तैयारी में हैं। इस निवेश का उद्देश्य भारत के डिजिटल कॉरिडोर और ग्रीन शिपिंग नेटवर्क को अपग्रेड करना है। कोठारी ने बताया कि इन सुधारों से पीथमपुर और इंदौर से यूरोप तक माल भेजने की लागत में 30 से 40 प्रतिशत तक की कमी आ सकती है।
“इंदौर पहले ही लॉजिस्टिक्स का बड़ा केंद्र है, लेकिन यूरोपीय निवेश के बाद यह देश का सबसे बड़ा लॉजिस्टिक्स हब बन सकता है। अमेरिका के ओहियो की तरह यहां भी अपार संभावनाएं हैं।” — गौतम कोठारी, अध्यक्ष, व्यापारी एसोसिएशन
इंदौर की लोकेशन
लॉजिस्टिक्स हब बनने के लिए इंदौर की भौगोलिक स्थिति (Geographical Location) सबसे बड़ी ताकत है। देश के मध्य में स्थित होने के कारण यहां से भारत की लगभग 75% आबादी तक मात्र 24 घंटे में माल पहुंचाया जा सकता है। यह ‘सेंट्रल लोकेशन’ सप्लाई चेन मैनेजमेंट के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।
इसके अलावा, इंदौर का मौसम भी लॉजिस्टिक्स और वेयरहाउसिंग के लिए अनुकूल माना जाता है। यहाँ न तो अत्यधिक ठंड पड़ती है और न ही बहुत ज्यादा गर्मी, जो इसे ‘कोल्ड स्टोरेज चेन’ विकसित करने के लिए एक आदर्श स्थान बनाती है।
भविष्य की संभावनाएं
यूरोपीय कंपनियों के निवेश का स्वरूप क्या होगा, यह आने वाले समय में स्पष्ट होगा। यह देखना दिलचस्प होगा कि विदेशी कंपनियां सीधे इंदौर में अपने लॉजिस्टिक सेंटर स्थापित करती हैं या वे भारत सरकार के माध्यम से सब्सिडी और इंफ्रास्ट्रक्चर में मदद करती हैं। बहरहाल, इस समझौते ने इंदौर को वैश्विक नक्शे पर एक प्रमुख लॉजिस्टिक्स डेस्टिनेशन के रूप में स्थापित करने की उम्मीदें बढ़ा दी हैं।











