पानी से जुड़ी शिकायतों का समाधान अब सर्वोच्च प्राथमिकता बन गया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रदेश के सभी नगर निगम महापौरों, संभागायुक्तों, कलेक्टरों और नगर निगम आयुक्तों के साथ बैठक कर उन्हें साफ पेयजल सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि नगरीय निकायों का अमला जनता की सेहत के प्रति पूरी तरह सतर्क रहे और इंदौर जैसी घटनाओं की पुनरावृत्ति प्रदेश के किसी भी शहर में न हो। उन्होंने अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के बीच बेहतर तालमेल की आवश्यकता पर भी जोर दिया और कहा कि पानी या अन्य आवश्यक सुविधाओं से जुड़ी शिकायतें मिलने पर तुरंत कार्रवाई की जाए। नगरीय प्रशासन विभाग ने साफ पेयजल व्यवस्था को मजबूत करने हेतु दिशा-निर्देश जारी किए हैं, जिनका सख्ती से पालन सुनिश्चित करने के आदेश मुख्यमंत्री ने दिए हैं।
साफ पेयजल के लिए जारी प्रमुख निर्देश
- 20 साल से अधिक पुरानी और सघन आबादी वाले क्षेत्रों की पाइपलाइन की पहचान की जाएगी।
- बार-बार रिसाव होने वाली और नालियों या सीवर के पास से गुजरने वाली पाइपलाइनों को चिन्हित किया जाएगा।
- चिन्हित पाइपलाइन में किसी भी तरह का रिसाव पाए जाने पर 48 घंटे के भीतर मरम्मत करना अनिवार्य होगा।
- जल शोधन संयंत्र (WTP) और पानी की टंकियों की जाँच और सफाई 7 दिनों के भीतर पूरी की जाएगी।
- सभी जल शोधन संयंत्रों, जल स्रोतों और टंकियों से तुरंत पानी के नमूने लेकर परीक्षण किया जाएगा।
- पानी में गंदगी या प्रदूषण पाए जाने पर तुरंत सप्लाई रोकी जाएगी और सुरक्षित वैकल्पिक जल व्यवस्था की जाएगी।
- क्लोरीनेशन सिस्टम की 24 घंटे निगरानी सुनिश्चित की जाएगी।
- पाइपलाइन में लीकेज की जानकारी देने के लिए जन-जागरूकता अभियान चलाया जाएगा।
- पानी से जुड़ी सभी शिकायतों को इमरजेंसी श्रेणी में रखा जाएगा।
- दूषित पानी या लीकेज की शिकायतों का समाधान 24 से 48 घंटे के भीतर करना अनिवार्य होगा।
- सीएम हेल्पलाइन पर दर्ज गंदे पानी और सीवेज से जुड़ी शिकायतों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी।









