Indore MY Hospital: इंदौर स्थित एमवाय अस्पताल में व्यवस्थाओं को लेकर एक नया मामला सामने आया है। अस्पताल की ओपीडी, एआरटी काउंसलिंग सेंटर और एचआईवी संक्रमण वार्ड के आसपास बिल्लियों की आवाजाही की जानकारी मिली है। इसी दौरान ओपीडी क्षेत्र में एक बिल्ली द्वारा बच्चों को जन्म देने की बात भी सामने आई। इस घटनाक्रम के बाद अस्पताल की सफाई, संक्रमण नियंत्रण और निगरानी व्यवस्था पर फिर सवाल उठे हैं।
जानकारी के मुताबिक, अस्पताल के संवेदनशील एचआईवी संक्रमण वार्ड में बिल्लियां खुले में घूमती दिखीं। एचआईवी मरीजों के लिए बने मेडिसिन कक्ष में भी बिल्लियों के कारण गंदगी फैलने की शिकायत सामने आई है। इस कक्ष से हर महीने केंद्र सरकार की योजना के तहत मरीजों को हजारों रुपये की मुफ्त दवाएं वितरित की जाती हैं। ऐसे में दवाओं की गुणवत्ता और सुरक्षित भंडारण पर चिंता जताई जा रही है।
अस्पताल से जुड़ी जानकारी में यह भी कहा गया कि एचआईवी संक्रमित नवजातों को दी जाने वाली सेप्ट्रोन दवाओं को नुकसान का जोखिम बढ़ गया है। जानवरों की पहुंच वाले हिस्सों में दवा रखरखाव और स्वच्छता की मानक प्रक्रियाओं पर सख्ती जरूरी मानी जाती है। इस घटना ने दवा वितरण और संक्रमण संवेदनशील क्षेत्रों की सुरक्षा को चर्चा में ला दिया है।
मामले का एक अहम पहलू यह भी बताया गया कि एआरटी के एकीकृत परामर्श केंद्र के कुछ कर्मचारी बिल्लियों की देखभाल करते नजर आए। अस्पताल प्रशासन के लिए यह स्थिति चुनौतीपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि एक तरफ संक्रमण नियंत्रण प्रोटोकॉल हैं और दूसरी तरफ संस्थान के भीतर जानवरों की उपस्थिति लगातार दर्ज हो रही है।
छह महीने पहले चूहों से जुड़ा मामला भी आया था
एमवाय अस्पताल में यह पहली बार नहीं है जब जानवरों की मौजूदगी ने गंभीर सवाल खड़े किए हों। करीब छह महीने पहले चूहों ने दो नवजात बच्चों को कुतर दिया था। उस घटना में दोनों नवजातों की मौत हो गई थी। उस समय भी अस्पताल की निगरानी, स्वच्छता और वार्ड सुरक्षा पर व्यापक चर्चा हुई थी। मौजूदा घटना ने उसी पृष्ठभूमि को फिर से सामने ला दिया है।
अस्पताल में रोडेंट एंड एनिमल कंट्रोल और हाउसकीपिंग का जिम्मा संभाल रही बीवीजी कंपनी पर दो दिन पहले 25 हजार रुपये का जुर्माना लगाए जाने की जानकारी भी दी गई है। इसके बावजूद स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं दिखने की बात सामने आई। इससे ठेका-आधारित सफाई और नियंत्रण व्यवस्था की प्रभावशीलता पर सवाल बढ़े हैं।
स्वास्थ्य संस्थानों में दवा कक्ष, नवजात संबंधित इकाइयां और संक्रमण वार्ड, उच्च जोखिम वाले क्षेत्र माने जाते हैं। इन जगहों पर जानवरों की पहुंच रुकना बुनियादी शर्त होती है। एमवाय अस्पताल का मामला इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यहां बड़ी संख्या में मरीज आते हैं और एचआईवी जैसी दीर्घकालिक स्थिति वाले मरीजों के लिए नियमित दवा वितरण होता है।
डीन ने अधीक्षक को दिए निर्देश, पिंजरा भी लगाया गया
पूरे मामले पर एमवाय अस्पताल के डीन अरविंद घनघोरिया ने कहा कि अस्पताल अधीक्षक से चर्चा कर तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। उनके अनुसार ओपीडी के फर्स्ट फ्लोर पर दो से तीन छोटे बच्चों की मौजूदगी की सूचना मिली थी। सूचना के बाद मौके पर कार्रवाई की गई और दो बच्चों को पकड़ा गया।
“एमवाय अस्पताल की ओपीडी के फर्स्ट फ्लोर पर दो-तीन छोटे बच्चों की सूचना मिली थी, जिन पर तुरंत कार्रवाई हुई। दो बच्चों को पकड़ा गया है। अधीक्षक को निर्देश दिए गए हैं कि पकड़े गए बच्चों को उचित तरीके से जू भेजा जाए। अगर कोई बच्चा शेष है, तो टीम निगरानी कर रही है और संबंधित स्थान पर पिंजरा लगाया गया है।” — अरविंद घनघोरिया, डीन
डीन ने यह भी कहा कि ओपीडी के पीछे केएस कंपाउंड का बड़ा क्षेत्र और कई क्वार्टर हैं। वहां से जानवरों के अस्पताल परिसर की तरफ आने की संभावना बनी रहती है। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि अस्पताल परिसर में इस तरह की मौजूदगी स्वीकार्य नहीं है। इसी वजह से विशेष सफाई और निगरानी बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं।
अस्पताल प्रबंधन के सामने अब दो स्तर की जिम्मेदारी है। पहला, संवेदनशील हिस्सों से जानवरों की पूरी तरह रोकथाम और नियमित मॉनिटरिंग। दूसरा, दवाओं के भंडारण और वितरण क्षेत्रों में स्वच्छता मानकों को कठोरता से लागू करना। यदि ऐसा नहीं हुआ तो इलाज की निरंतरता और मरीजों के भरोसे पर असर पड़ सकता है।
इंदौर का एमवाय अस्पताल प्रदेश का प्रमुख सरकारी चिकित्सा संस्थान है। इसलिए यहां घटने वाली हर प्रशासनिक या संक्रमण नियंत्रण से जुड़ी घटना का असर स्थानीय व्यवस्था से आगे भी जाता है। फिलहाल प्रशासन ने कार्रवाई शुरू होने की बात कही है, लेकिन स्थायी समाधान और मैदान स्तर पर सुधार की स्थिति आने वाले दिनों में स्पष्ट होगी।










