Indore Metro : मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर में मेट्रो प्रोजेक्ट का काम तेजी से चल रहा है। इस बीच, प्रोजेक्ट से जुड़ी एक बड़ी खबर सामने आई है। शहर के छोटा गणपति क्षेत्र में बनने वाला अंडरग्राउंड मेट्रो स्टेशन अब इंदौर का सबसे गहरा स्टेशन होगा। मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन ने सॉइल इन्वेस्टिगेशन (मिट्टी परीक्षण) रिपोर्ट के बाद इसके डिजाइन में अहम बदलाव करने का फैसला किया है।
रिपोर्ट के मुताबिक, यह स्टेशन अब जमीन की सतह से लगभग 38 मीटर, यानी करीब 125 फीट नीचे बनाया जाएगा। यह गहराई सामान्य अंडरग्राउंड स्टेशनों की तुलना में लगभग दोगुनी है। इस बदलाव का मुख्य कारण जमीन के नीचे की मिट्टी की संरचना है, जिसे देखते हुए इंजीनियरों ने स्टेशन को और अधिक गहराई पर बनाने का निर्णय लिया है।
क्यों पड़ी डिजाइन बदलने की जरूरत?
किसी भी अंडरग्राउंड निर्माण से पहले मिट्टी का परीक्षण एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया है। मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन के अनुसार, छोटा गणपति क्षेत्र में की गई सॉइल इन्वेस्टिगेशन में पाया गया कि निर्धारित गहराई पर मिट्टी की स्थिति स्टेशन के निर्माण के लिए आदर्श नहीं थी। संरचना की सुरक्षा और स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए स्टेशन को और नीचे ले जाने का फैसला किया गया, जहां चट्टानी और मजबूत सतह मिल सके।
सामान्य से लगभग दोगुना गहरा
आमतौर पर, देशभर में अंडरग्राउंड मेट्रो स्टेशन जमीन से 22 से 25 मीटर (लगभग 60-70 फीट) की गहराई पर बनाए जाते हैं। लेकिन छोटा गणपति स्टेशन अपनी 38 मीटर (125 फीट) की गहराई के साथ एक इंजीनियरिंग का अनूठा उदाहरण बनेगा। यह न केवल इंदौर, बल्कि देश के कुछ सबसे गहरे मेट्रो स्टेशनों में से एक होगा।
निर्माण की चुनौतियां और तैयारी
इतनी गहराई पर स्टेशन का निर्माण अपने आप में एक बड़ी चुनौती है। इसके लिए आधुनिक तकनीक और उच्च स्तरीय इंजीनियरिंग की आवश्यकता होगी। मेट्रो कॉर्पोरेशन के अधिकारियों का कहना है कि वे इस चुनौती के लिए पूरी तरह तैयार हैं। गहरी खुदाई, मजबूत दीवारों का निर्माण और यात्रियों की सुरक्षित आवाजाही के लिए विशेष इंतजाम किए जाएंगे।
इस स्टेशन का निर्माण इंदौर मेट्रो के भूमिगत कॉरिडोर का एक अहम हिस्सा है, जो शहर के घने बसे इलाकों को जोड़ेगा।










