इंदौर की देवनगरी बस्ती के 40 से अधिक बच्चों के लिए शुक्रवार का दिन नई उम्मीद लेकर आया। जन्म प्रमाण पत्र, आधार कार्ड और समग्र आईडी जैसे जरूरी दस्तावेज नहीं होने के कारण लंबे समय से स्कूल से दूर रहने वाले इन बच्चों का अब शासकीय विद्यालय में प्रवेश करा दिया गया।
इस दौरान इंदौर कलेक्टर शिवम वर्मा स्वयं विद्यालय पहुंचे, बच्चों के बीच जमीन पर बैठकर उनसे बातचीत की और उनके उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं।
जनसुनवाई में उठी थी समस्या
कुछ दिन पहले देवनगरी बस्ती के बच्चे अपने अभिभावकों और सामाजिक कार्यकर्ता मोहित सिंह चौहान के साथ जनसुनवाई में पहुंचे थे। उन्होंने प्रशासन को बताया कि घर पर जन्म होने के कारण कई बच्चों के जन्म प्रमाण पत्र नहीं बन पाए थे। इसके चलते आधार कार्ड, समग्र आईडी सहित अन्य आवश्यक दस्तावेज भी नहीं बन सके, जिससे उनका स्कूल में प्रवेश अटक गया था।
मामले को गंभीरता से लेते हुए कलेक्टर शिवम वर्मा ने प्रशासन और नगर निगम को तत्काल विशेष अभियान चलाने के निर्देश दिए। इसके बाद देवनगरी बस्ती में दो दिवसीय शिविर आयोजित कर घर पर जन्मे बच्चों के जन्म प्रमाण पत्र बनाए गए। साथ ही आधार कार्ड, समग्र आईडी और अन्य आवश्यक दस्तावेज भी तैयार किए गए, जिससे बच्चों के स्कूल में प्रवेश का रास्ता साफ हो गया।
बच्चों के साथ बैठकर बढ़ाया उत्साह
शुक्रवार को कलेक्टर शिवम वर्मा शासकीय प्राथमिक विद्यालय पहुंचे और बच्चों का औपचारिक रूप से प्रवेश कराया। उन्होंने कहा कि केवल दस्तावेजों के अभाव में किसी भी बच्चे की शिक्षा बाधित नहीं होने दी जाएगी। प्रशासन हर जरूरतमंद बच्चे तक पहुंचकर शिक्षा के अधिकार को सुनिश्चित करेगा।
इस दौरान उन्होंने विद्यालय का निरीक्षण भी किया, बच्चों को खेल सामग्री वितरित की, कक्षाओं का भ्रमण किया और स्कूल परिसर में पौधरोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया।
आगे भी जारी रहेगा अभियान
प्रशासन की इस पहल से 40 से अधिक बच्चों की शिक्षा की राह आसान हुई है। स्थानीय लोगों ने इस अभियान की सराहना करते हुए उम्मीद जताई कि भविष्य में भी ऐसे विशेष शिविर आयोजित किए जाएंगे, ताकि दस्तावेजों के अभाव में कोई भी बच्चा शिक्षा के अधिकार से वंचित न रहे।










