Indore में इन फैक्ट्रियों की कटेगी बिजली, शहर में फैला रहीं प्रदूषण, हाईकोर्ट ने भेजा नोटिस

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By Abhishek SinghPublished On: January 21, 2026

इंदौर में स्वच्छता को लेकर किए जा रहे दावों के बीच बढ़ते जल और वायु प्रदूषण के गंभीर मुद्दे सामने आ रहे हैं। इस पर उच्च न्यायालय ने सख्त रुख अपनाया है। पर्यावरण को गंभीर क्षति पहुंचाने वाले और बिना वैधानिक स्वीकृति के संचालित उद्योगों को लेकर हाईकोर्ट ने स्वतः संज्ञान लिया। सुनवाई के दौरान न्यायालय ने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की कार्यशैली पर नाराजगी जताई, जिसके बाद जिले में व्यापक स्तर पर कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

स्वच्छ शहर में बढ़ता पर्यावरण संकट

स्वच्छता के लिए पहचाने जाने वाले इंदौर में हाल की रिपोर्टों ने पर्यावरणीय हालात को लेकर चिंताजनक संकेत दिए हैं। शहर के कई इलाकों में भूजल प्रदूषित पाया गया है, वहीं वायु गुणवत्ता सूचकांक भी लगातार असुरक्षित श्रेणी की ओर बढ़ रहा है। इस स्थिति को माननीय उच्च न्यायालय ने अत्यंत गंभीर मानते हुए मध्यप्रदेश जल प्रदूषण नियंत्रण और वायु प्रदूषण नियंत्रण कानूनों के उल्लंघन की श्रेणी में रखा है।

न्यायालय के अनुसार, खनन गतिविधियां, स्टोन क्रशर और रेड व ऑरेंज कैटेगरी के उद्योग प्रदूषण के प्रमुख कारण हैं, जिनसे आम नागरिकों के स्वास्थ्य पर सीधा और गंभीर असर पड़ रहा है।

प्रशासनिक लापरवाही पर न्यायालय की सख्ती

प्रशासन की उदासीनता और औद्योगिक मनमानी पर अब कानून का शिकंजा धीरे-धीरे मजबूत होता जा रहा है। इस गंभीर मामले की अगली सुनवाई 9 फरवरी को उच्च न्यायालय में होगी, जहां महाधिवक्ता प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की विस्तृत रिपोर्ट के आधार पर अदालत के समक्ष स्थिति स्पष्ट करेंगे। यदि सरकार और बोर्ड की ओर से प्रस्तुत तथ्य और उठाए गए कदम न्यायालय को संतोषजनक नहीं लगे, तो भविष्य में संबंधित उद्योगों पर और सख्त दंडात्मक कार्रवाई की संभावना जताई गई है।

243 उद्योगों को भेजा गया नोटिस

प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के इंदौर क्षेत्रीय अधिकारी सतीश चौकसे ने कार्रवाई की जानकारी देते हुए बताया कि नियमों का उल्लंघन कर रहे 243 उद्योगों की पहचान कर उन्हें नोटिस जारी किए जा चुके हैं। उन्होंने यह भी माना कि कई इकाइयां लंबे समय से बिना आवश्यक स्वीकृति के संचालित हो रही थीं। इन सभी अनियमित उद्योगों का विवरण बिजली वितरण कंपनी को औपचारिक रूप से सौंप दिया गया है, ताकि उनकी विद्युत आपूर्ति बंद की जा सके।

अदालत में प्रस्तुत आंकड़ों के मुताबिक जिले में कुल 5961 पंजीकृत उद्योग हैं, जिनमें से एक हजार से अधिक इकाइयां प्रदूषण विभाग की अनुमति के बिना ही काम कर रही थीं।