इंदौर के भागीरथपुरा में पंद्रह दिन बीत जाने के बावजूद नए मरीजों के सामने आने का सिलसिला जारी है। सोमवार को भी नए मामले दर्ज किए गए। अब बच्चों में भी उल्टी-दस्त के लक्षण दिखाई दे रहे हैं, जिससे कई परिवार अपने बच्चों को बीमारी से बचाने के लिए रिश्तेदारों के यहां भेज रहे हैं। चार दिन पहले, उल्टी-दस्त की शिकायत के बाद अस्पताल में भर्ती छह माह के अव्यान की मौत हो चुकी थी। अब उसके माता-पिता भी इस बीमारी की चपेट में आ गए हैं, और स्वास्थ्य विभाग ने उनका उपचार तुरंत शुरू कर दिया है।
सोमवार को बस्ती क्षेत्र से 38 नए मरीज सामने आए, जिनमें से छह को अस्पताल में भर्ती किया गया है। वर्तमान में कुल 110 मरीज अस्पताल में इलाजरत हैं, जिनमें 15 आईसीयू में भर्ती हैं। स्वास्थ्य विभाग ने भागीरथपुरा में रियल-टाइम सर्वे के लिए ‘कोबो टूल’ का इस्तेमाल किया है और इसके लिए 200 टीमों का गठन किया गया है। बस्ती के प्रत्येक घर में ओआरएस की 10 और जिंक की 30 गोलियां वितरित की जा रही हैं। साथ ही, पानी को शुद्ध करने के लिए ड्रॉप्स भी डाले जा रहे हैं।
पानी की सुरक्षा के लिए प्रशासन का विशेष अभियान
इंदौर में तीन हजार किलोमीटर लंबी वाटर लाइन का सर्वेक्षण शुरू कर दिया गया है, ताकि भविष्य में किसी भी क्षेत्र में दूषित पानी की समस्या न उत्पन्न हो। भागीरथपुरा में गंदा पानी पीने से हुई 17 मौतों के बाद पूरे शहर की जल आपूर्ति प्रणाली की जांच की जाएगी। कलेक्टर शिवम वर्मा ने बताया कि मुख्यमंत्री ने शहर की वाटर लाइन और बोरिंग की विस्तृत जांच कराने के निर्देश दिए थे। इसी के तहत शहर की तीन हजार किलोमीटर लंबी वाटर लाइन का सर्वेक्षण शुरू किया गया है, साथ ही शहर के छह हजार बोरिंगों की भी जांच की जाएगी और उनकी जियो-टैगिंग की जाएगी।









