Ujjain Jungle Safari : मध्य प्रदेश में वन्यजीव पर्यटन को नई ऊंचाइयों पर ले जाने की तैयारी है। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने उज्जैन में देश का दूसरा ‘वनतारा’ बनाने की महत्वाकांक्षी परियोजना को सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है। यह ‘जंगल जू सफारी’ लगभग 500 हेक्टेयर के विशाल क्षेत्र में विकसित की जाएगी, जिसका लक्ष्य पर्यटकों को विश्व स्तरीय अनुभव देना है।
राज्य सरकार प्रदेश में पर्यटन, विशेषकर वन्यजीव पर्यटन को बढ़ावा देने पर जोर दे रही है। इसी योजना के तहत उज्जैन और जबलपुर में नए वन्यजीव-सह-बचाव केंद्र स्थापित किए जा रहे हैं। शुक्रवार को मुख्यमंत्री आवास पर हुई एक उच्च स्तरीय बैठक में सीएम मोहन यादव ने उज्जैन में बनने वाले केंद्र के लिए नियुक्त कंसल्टेंट फर्म को इसे जामनगर के ‘वनतारा’ की तर्ज पर विकसित करने के निर्देश दिए।
500 हेक्टेयर में होगी सफारी
यह विशाल सफारी उज्जैन के मौजूदा 50 हेक्टेयर के इको-टूरिज्म पार्क को मिलाकर कुल 500 हेक्टेयर भूमि पर बनाई जाएगी। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि प्रोजेक्ट के पहले चरण का निर्माण 2026 में शुरू कर इसे जल्द से जल्द पूरा किया जाए। इस सफारी में देशी और विदेशी, दोनों प्रजातियों के जानवरों को उनके प्राकृतिक आवास जैसा माहौल दिया जाएगा।
यहां पर्यटक दिन और रात, दोनों समय सफारी का आनंद ले सकेंगे। इस परियोजना का उद्देश्य उज्जैन को महाकाल लोक के साथ-साथ एक प्रमुख सफारी डेस्टिनेशन के रूप में भी स्थापित करना है। बैठक में प्रोजेक्ट के डिजाइन और निर्माण से जुड़े अहम पहलुओं पर भी चर्चा हुई।
11 तरह के जंगल, 300 से ज्यादा प्रजातियां
परियोजना का खाका पेश करते हुए कंसल्टेंट्स ने बताया कि यह दुनिया का पहला ‘रियल जंगल जू सफारी’ अनुभव होगा। 500 हेक्टेयर के इस क्षेत्र में भारत और दुनिया के 11 अलग-अलग तरह के जंगलों का प्रतिरूप तैयार किया जाएगा। यहां 300 से ज्यादा प्रजातियों के जानवर रखे जाएंगे, जिनमें 75 प्रतिशत देशी और 25 प्रतिशत विदेशी होंगे।
जानवरों को खुले बाड़ों में रखने के लिए ‘अदृश्य बैरियर’ जैसी आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल होगा। पर्यटक पैदल, घोड़े की बग्घी या सफारी गाड़ियों से इस जंगल का अनुभव ले सकेंगे। इस प्रोजेक्ट को छह चरणों में पूरा करने की योजना है, जिसका पहला चरण 2027 के अंत तक पूरा हो जाएगा। इसके अलावा यहां एक विशेष बचाव केंद्र (रेस्क्यू सेंटर) भी स्थापित किया जाएगा।











