मध्यप्रदेश के हजारों शासकीय कर्मचारियों के लिए हाईकोर्ट से बड़ी राहत सामने आई है। न्यायालय ने प्रोबेशन अवधि के दौरान कार्यरत कर्मचारियों के वेतन में की गई कटौती को गैरकानूनी करार दिया है। कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिए हैं कि जिन कर्मचारियों का वेतन घटाया गया था, उन्हें एरियर्स सहित पूरी राशि वापस की जाए। इस फैसले के तहत राज्य सरकार पर कर्मचारियों को लगभग 400 करोड़ रुपये का भुगतान करने की जिम्मेदारी आएगी।
कोर्ट ने जारी किया एरियर भुगतान का निर्देश
हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि अवैध नियमों के आधार पर जिन कर्मचारियों के वेतन में कटौती की गई है, उन्हें पूरी राशि एरियर के रूप में वापस की जाए। यदि सरकार इस फैसले को चुनौती नहीं देती है, तो कर्मचारियों को 100 प्रतिशत वेतनमान के अनुसार एकमुश्त भुगतान किया जाएगा।
इस संबंध में तृतीय श्रेणी कर्मचारी संघ के अध्यक्ष उमाशंकर तिवारी ने बताया कि यह नियम लोक सेवा आयोग से भर्ती कर्मचारियों पर लागू नहीं था, बल्कि कर्मचारी चयन आयोग के माध्यम से नियुक्त कर्मियों पर ही लागू किया गया था। इस आदेश के कारण तृतीय और चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों को भारी आर्थिक क्षति उठानी पड़ी। यदि पूरे सेवा काल का आकलन किया जाए, तो प्रत्येक कर्मचारी को लगभग 15 से 20 लाख रुपये तक का नुकसान हुआ है।
कर्मचारियों को मिलेगा 400 करोड़ का लाभ
यदि निर्णय कर्मचारियों के पक्ष में लागू होता है, तो दिसंबर 2019 से दिसंबर 2025 की अवधि के दौरान 90 हजार से अधिक कर्मचारियों को लगभग 400 करोड़ रुपये की राहत मिलेगी।
पूर्व सीएम कमलनाथ ने किया था लागू
दरअसल, वर्ष 2019 में तत्कालीन कमलनाथ सरकार ने एक नियम लागू किया था, जिसके तहत नई भर्तियों में शामिल कर्मचारियों को प्रोबेशन अवधि के दौरान क्रमशः 70, 80 और 90 प्रतिशत वेतन ही दिया जा रहा था। इस व्यवस्था को चुनौती देते हुए कर्मचारियों ने न्यायालय का सहारा लिया।
वहीं मंत्रालय सूत्रों के अनुसार, सरकार इस बात पर मंथन कर रही है कि हाईकोर्ट के निर्णय के खिलाफ अपील की जाए या फिर कर्मचारियों को एरियर सहित राशि लौटाई जाए। इस मामले में अंतिम निर्णय मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा लिया जाएगा।









