सीएम मोहन यादव ने इंदौर नगर निगम कमिश्नर दिलीप कुमार यादव को हटाया, इन दो अफसरों को किया निलंबित

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By Raj RathorePublished On: January 2, 2026
Mohan Yadav Indore

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. Mohan Yadav ने इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पेयजल की घटना पर कड़ा रुख अपनाया है। राज्य सरकार ने इस मामले में बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई करते हुए इंदौर नगर निगम आयुक्त दिलीप कुमार यादव को उनके पद से हटाने के निर्देश जारी किए हैं। इसके अलावा लापरवाही बरतने वाले दो अन्य वरिष्ठ अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट संदेश दिया है कि जन स्वास्थ्य से जुड़े मामलों में किसी भी तरह की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। भागीरथपुरा क्षेत्र में गंदा पानी पीने से कई लोग बीमार हो गए थे, जिसके बाद प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे थे। इस घटना का संज्ञान लेते हुए सीएम ने प्रशासनिक अमले में बड़ा फेरबदल किया है।

सीएम ने दी जानकारी

 

मुख्यमंत्री मोहन यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में Twitter) पर इस कार्रवाई की जानकारी साझा की। उन्होंने लिखा कि राज्य सरकार ऐसी घटनाओं में लापरवाही कतई स्वीकार नहीं करेगी। इसी क्रम में कठोर निर्णय लेते हुए अधिकारियों पर गाज गिरी है।

“इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पेयजल के कारण हुई घटना में राज्य सरकार लापरवाही बर्दाश्त नहीं करेगी। इस संबंध में कठोर निर्णय लिये जा रहे हैं।” — डॉ. मोहन यादव, मुख्यमंत्री

इन अधिकारियों पर गिरी गाज

मुख्यमंत्री के निर्देशानुसार जिन अधिकारियों पर कार्रवाई हुई है, उनमें नगर निगम के अपर आयुक्त रोहित सिसोनिया और लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग (PHE) के प्रभारी अधीक्षण यंत्री संजीव श्रीवास्तव शामिल हैं। इन दोनों अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया है। वहीं, नगर निगम आयुक्त दिलीप कुमार यादव का तबादला करते हुए उन्हें हटाने का आदेश दिया गया है।

क्या था पूरा मामला?

इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में पिछले दिनों दूषित पानी की आपूर्ति की शिकायतें सामने आई थीं। गंदा पानी पीने के कारण क्षेत्र के कई रहवासियों की तबीयत बिगड़ गई थी और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा था। स्थानीय लोगों में प्रशासन के खिलाफ भारी आक्रोश था। मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री ने सीधे दखल दिया और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कदम उठाया है। यह कार्रवाई प्रदेश भर के अधिकारियों के लिए एक कड़ा संदेश मानी जा रही है।