भागीरथपुरा जल संकट में एक और जान गई, दूषित पानी से मरने वालों की संख्या हुई 17

Author Picture
By Praveen ShuklaPublished On: January 5, 2026

इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पानी से फैले संक्रमण का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा है। सोमवार को एक और वृद्ध की मौत दर्ज होने के बाद इस मामले में जान गंवाने वालों की संख्या बढ़कर 17 हो गई है। प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की ओर से लगातार राहत और नियंत्रण के प्रयास किए जा रहे हैं,लेकिन इसके बावजूद क्षेत्र में संक्रमण का खतरा पूरी तरह समाप्त नहीं हो पाया है। हालात ऐसे हैं कि कुछ नए मरीज अब भी सामने आ रहे हैं,जिससे स्थानीय लोगों में चिंता बनी हुई है। हालांकि बीते कुछ दिनों की तुलना में नए मामलों की संख्या में कमी दर्ज की गई है,जिसे राहत के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।

इस त्रासदी में जान गंवाने वाले 69 वर्षीय ओमप्रकाश शर्मा धार जिले के रहने वाले थे और सेवानिवृत्त पुलिसकर्मी थे। वे अपने बेटे से मिलने इंदौर आए थे। 1 जनवरी को अचानक उनकी तबीयत बिगड़ गई और उल्टी-दस्त की शिकायत के बाद उन्हें निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। जांच के दौरान डॉक्टरों ने उनकी किडनी में गंभीर संक्रमण की पुष्टि की। हालत लगातार बिगड़ने पर उन्हें वेंटिलेटर पर रखा गया,लेकिन तमाम प्रयासों के बावजूद सोमवार सुबह उनका निधन हो गया। इस घटना ने एक बार फिर दूषित पानी से फैले संक्रमण की गंभीरता को उजागर कर दिया है।

भागीरथपुरा क्षेत्र की वर्तमान स्थिति पर नजर डालें तो हालात अब भी पूरी तरह सामान्य नहीं हुए हैं। अलग-अलग अस्पतालों में फिलहाल 142 मरीजों का इलाज चल रहा है। रविवार रात तक 20 नए मरीज सामने आने की पुष्टि हुई है। स्थिति पर काबू पाने के लिए स्वास्थ्य विभाग की 20 से अधिक टीमें लगातार क्षेत्र में रिंग सर्वे कर रही हैं। बस्ती को 30 सेक्टरों में बांटकर घर-घर जाकर लोगों की स्वास्थ्य जांच की जा रही है,ताकि संक्रमण को शुरुआती स्तर पर ही पकड़ा जा सके। अब तक पांच हजार से ज्यादा लोगों की जांच पूरी की जा चुकी है।

इस पूरे मामले ने कानूनी रूप भी ले लिया है। दूषित पानी की आपूर्ति और संक्रमण फैलने को लेकर हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई है,जिस पर मंगलवार को सुनवाई होनी है। पिछली सुनवाई के दौरान न्यायालय ने नगर निगम आयुक्त और अपर आयुक्त को नोटिस जारी कर पूरे मामले पर विस्तृत रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए थे। प्रशासन पर अब न सिर्फ हालात को काबू में लाने,बल्कि भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों इसके लिए ठोस कदम उठाने का दबाव भी बढ़ता जा रहा है।