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15 जून से 15 जुलाई तक इंदौर का सबसे खराब समय, भीड़ वाले बाजार खुलेंगे सबसे आखिरी में

इंदौर : इंदौर के लिए 15 जून से 15 जुलाई तक का समय सबसे खराब साबित हो सकता है। इस दौरान लोगों की आवाजाही के साथ-साथ लापरवाही के कारण कोरोना पॉजिटिव के केस बढ़ सकते हैं। इसलिए जो बाजार खोले जाएंगे उनको भी बंद करने का फैसला कभी भी किया जा सकता है। इंदौर के लोग समझाने के बाद भी कई बार नहीं मानते हैं।  इस तरह की चिंता करते हुए कलेक्टर मनीषसिंह ने कल रेसीडेंसी कोठी में हुई बैठक में कहा कि अभी हम 1 जून के बाद कुछ बाजार ही खोल पाएंगे। सारी दुकानें नहीं खुलेंगी। अभी दिन में लोगों की आवाजाही के लिए जो छूट दी है, उस दौरान देखने में आया कि कुछ लोग मास्क भी नहीं लगाते, सैनिटाइजर का उपयोग बार-बार नहीं करते। इसके अलावा शारीरिक दूरी का पालन भी नहीं करते हैं।

यही चिंता प्रशासन को सता रही है। लोग समझाने के बाद भी बिना काम घर से निकल रहे हैं। रेसीडेंसी कोठी में सांसद शंकर लालवानी और डॉ. निशांत खरे की मौजूदगी में हुई बुद्धिजीवियों के साथ हुई बैठक में कई सवाल सामने आए। सांसद शंकर लालवानी ने कहा कि जितनी बड़ी चुनौती कोरोना वायरस से निपटने की है, उतनी ही बड़ी चुनौती बाजार खोलने को लेकर भी है। लोगों को समझाने के लिए जागरूकता अभियान चलाएंगे। कलेक्टर मनीषसिंह ने तो साफ कह दिया कि यदि हमने कुछ बाजार खोले और दुकानदार के साथ ग्राहकों ने हमारे नियमों का पालन नहीं किया, तो पेनल्टी के साथ ही दुकानें बंद करा दी जाएंगी। 1 से 15 जून के बीच में जरूरी सामान वाले बाजार खोलने की योजना बन रही है।

व्यापारी एसोसिएशन, रहवासी संघ से भी बात की जा रही है। डब्ल्यूएचओ और विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार 15 जून से 15 जुलाई के बीच आठ से दस हजार मरीज बढ़ सकते हैं। दस हजार बिस्तरों का इंतजाम अस्पतालों के अलावा होटल, मैरिज गार्डन, भारतीय प्रबंध संस्थान राऊ, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नालॉजी सिमरोल में भी मरीजों को रखा जा सकता है। ज्यादा से ज्यादा सेवाएं घर पर मिल सके, इसलिए ऑनलाइन आर्डर वाली व्यवस्थाएं ज्यादा बना रहे हैं। नगर निगम की कचरा गाडिय़ों और पुलिस की गाडिय़ों के जरिये गायक शान से गीत तैयार कराया, जो एक-दो दिन में ही सफाई अभियान की तरह गूंजेगा। कलेक्टर मनीषसिंह का कहना था कि निजी क्लिनिक खुलने पर ही सर्दी, खांसी, बुखार से पीडि़त लोगों का पता चल जाएगा। ऐसे मरीज यदि समय पर ठीक हो गए तो कोई बात नहीं। इनमें से कुछ मरीजों के सैंपल भी कराए जाएंगे।

डॉक्टर की बात सुनकर सब डर गए

बैठक में मौजूद डॉ. निशांत खरे ने तमाम सवालों के जवाब में ये कहकर सबको डरा दिया कि अभी हम यहां जितने लोग बैठे हैं इनमें से भी दो-चार की रिपोर्ट पॉजिटिव आ सकती है। ज्यादा से ज्यादा सैंपल लेने का फार्मूला सौ फीसदी सही नहीं है। जिनको लगता है कि गड़बड़ है उनके सैंपल कराना चाहिए। सर्दी, खांसी और बुखार के लिए ही निजी क्लिनिक खुलवा रहे हैं। कोरोना के साथ हमें सावधानी के साथ जीना सीखना पड़ेगा। इस बीमारी का आखिरी मरीज का पता करना संभव नहीं है। जब तक टीका नहीं आएगा, तब तक ऐसा ही चलता रहेगा।