इंदौर एयरपोर्ट से यात्रियों को खुशखबरी! अप्रैल 2026 से फिर खुलेगा पुराना टर्मिनल, मिलेंगी ये खास सुविधाएं

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By Raj RathorePublished On: February 22, 2026

इंदौर के देवी अहिल्याबाई होलकर अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पर पुराने टर्मिनल को फिर से चालू करने की तैयारी की जा रही है। स्थानीय रिपोर्ट के अनुसार यह व्यवस्था अप्रैल से लागू करने की योजना है। एयरपोर्ट पर लगातार बढ़ रहे यात्रियों और उड़ानों के दबाव को देखते हुए यह कदम लिया जा रहा है, ताकि मौजूदा टर्मिनल पर लोड कम किया जा सके और यात्रियों की एंट्री-एग्जिट प्रक्रिया तेज हो सके।

एयरपोर्ट प्रबंधन का फोकस यह है कि पीक टाइम में लंबी कतारें, चेक-इन क्षेत्र में भीड़ और सुरक्षा जांच की रफ्तार से जुड़ी चुनौतियां नियंत्रित रहें। पुराने टर्मिनल के दोबारा इस्तेमाल से परिचालन में लचीलापन मिलेगा। इससे अलग-अलग समय पर आने-जाने वाले यात्रियों का वितरण बेहतर तरीके से किया जा सकेगा और ग्राउंड मूवमेंट भी सुचारु रखने में मदद मिलेगी।

रिपोर्ट में बताया गया है कि पुराने टर्मिनल को चालू करने का मकसद केवल अतिरिक्त जगह बनाना नहीं है, बल्कि यात्रियों के प्रवाह को चरणबद्ध तरीके से संभालना भी है। जब एक ही टर्मिनल पर यात्रियों की संख्या तेजी से बढ़ती है, तब सुरक्षा, बोर्डिंग और बैगेज मूवमेंट से जुड़े बिंदुओं पर दबाव बढ़ता है। इसी दबाव को बांटने के लिए पुराने ढांचे का उपयोग व्यावहारिक विकल्प माना जा रहा है।

इंदौर एयरपोर्ट मध्य प्रदेश के सबसे व्यस्त हवाई अड्डों में गिना जाता है। बीते वर्षों में यहां से यात्रा करने वाले यात्रियों की संख्या में बढ़ोतरी दर्ज हुई है। ऐसे में मौजूदा अवसंरचना को सपोर्ट करने के लिए पूरक व्यवस्था तैयार करना एयरपोर्ट संचालन का जरूरी हिस्सा बन गया है। पुराने टर्मिनल की वापसी इसी रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है।

अप्रैल से चरणबद्ध उपयोग की योजना

रिपोर्ट के मुताबिक अप्रैल से पुराने टर्मिनल का उपयोग शुरू करने की तैयारी है। इसे चरणबद्ध रूप में लागू किया जा सकता है, ताकि संचालन प्रभावित न हो और यात्रियों को किसी तरह की असुविधा न आए। एयरपोर्ट संचालन में आम तौर पर टर्मिनल उपयोग का विभाजन उड़ानों के टाइम स्लॉट, यात्री घनत्व और उपलब्ध संसाधनों के आधार पर किया जाता है।

पुराने टर्मिनल के सक्रिय होने से कुछ प्रक्रियाओं को अलग-अलग बिंदुओं पर शिफ्ट करना संभव होगा। इससे मुख्य टर्मिनल में भीड़ का दबाव कम करने में मदद मिलेगी। साथ ही, एयरलाइन और एयरपोर्ट स्टाफ के लिए भी संसाधनों का उपयोग बेहतर तरीके से किया जा सकेगा। यह व्यवस्था विशेष रूप से उन घंटों में उपयोगी होती है, जब एक साथ कई उड़ानें संचालित होती हैं।

एयरपोर्ट से जुड़े विशेषज्ञ बताते हैं कि टर्मिनल क्षमता बढ़ाने का अर्थ सिर्फ भवन का विस्तार नहीं होता। इसमें यात्री प्रवाह, सुरक्षा जांच, बोर्डिंग गेट प्रबंधन, बैगेज हैंडलिंग और वाहन मूवमेंट को एकीकृत ढंग से संभालना शामिल होता है। पुराने टर्मिनल का पुन: उपयोग इसी एकीकृत प्रबंधन के लिए तात्कालिक और व्यावहारिक समाधान की तरह देखा जा रहा है।

यात्री सुविधा और संचालन संतुलन पर जोर

एयरपोर्ट पर भीड़ बढ़ने का सीधा असर यात्रियों के अनुभव पर पड़ता है। चेक-इन से लेकर बोर्डिंग तक हर चरण में प्रतीक्षा समय बढ़ सकता है। ऐसे में अलग टर्मिनल स्पेस उपलब्ध होने से कतार प्रबंधन बेहतर किया जा सकता है। इससे यात्रियों को कम समय में प्रक्रियाएं पूरी करने में सुविधा मिलती है और एयरपोर्ट के भीतर समग्र अनुशासन बनाए रखना आसान होता है।

इंदौर एयरपोर्ट पर यह पहल भविष्य की मांग को ध्यान में रखकर की जा रही तैयारी के रूप में भी देखी जा रही है। यदि उड़ानों और यात्रियों की संख्या बढ़ती रहती है, तो अतिरिक्त टर्मिनल क्षमता संचालन की स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण होगी। पुराने टर्मिनल का पुनरारंभ इसी दिशा में एक त्वरित कदम है, जिससे मौजूदा ढांचे पर तुरंत राहत दी जा सके।

फिलहाल रिपोर्ट में यही संकेत है कि अप्रैल से यह व्यवस्था लागू करने की योजना पर काम चल रहा है। अंतिम संचालन मॉडल, टर्मिनल उपयोग का दायरा और यात्री आवागमन की श्रेणियां एयरपोर्ट प्रशासन की आधिकारिक योजना के अनुसार तय होंगी। लेकिन यह स्पष्ट है कि लक्ष्य एक ही है, इंदौर एयरपोर्ट पर बढ़ती मांग के बीच क्षमता और सुविधा दोनों को संतुलित रखना।