Holi 2026 Special: केमिकल रंगों से बचना है तो अपनाएं ये आसान तरीके, घर पर बनाएं सुरक्षित और नैचुरल गुलाल

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By Raj RathorePublished On: February 22, 2026

होली 2026 के करीब आते ही बाजार में रंगों की खरीद शुरू हो गई है। इसी के साथ घर पर ऑर्गेनिक गुलाल बनाने के तरीके भी लोग खोज रहे हैं। वजह साफ है, कई परिवार ऐसे रंग चाहते हैं जिनमें तेज रसायनों का खतरा कम हो और जिन्हें बच्चे व बड़े आसानी से इस्तेमाल कर सकें।

लाइफस्टाइल विशेषज्ञों के अनुसार, घर में मौजूद सामान्य चीजों से सूखा और गीला दोनों तरह का रंग बनाया जा सकता है। इसके लिए महंगे सामान की जरूरत नहीं होती। आटा, कॉर्नफ्लोर, बेसन, हल्दी, चुकंदर, पालक, टेसू या गुड़हल जैसे विकल्प सबसे ज्यादा इस्तेमाल किए जाते हैं।

घरेलू रंग तैयार करने का पहला नियम है कि बेस पाउडर बारीक और सूखा हो। इसके लिए कॉर्नफ्लोर, चावल का आटा या बेसन लिया जा सकता है। इसमें प्राकृतिक रंग देने वाले पदार्थ का सूखा पाउडर मिलाकर गुलाल तैयार किया जाता है। रंग जितना हल्का चाहिए, बेस पाउडर की मात्रा उतनी बढ़ाई जाती है।

सूखे गुलाल के आसान फॉर्मूले

पीला रंग: हल्दी सबसे आसान विकल्प है। हल्दी को सीधे बहुत कम मात्रा में बेसन या कॉर्नफ्लोर के साथ मिलाएं। बहुत ज्यादा हल्दी डालने से रंग गहरा हो सकता है, इसलिए अनुपात संतुलित रखें।

गुलाबी रंग: चुकंदर को पतले टुकड़ों में काटकर धूप में सुखाएं। पूरी तरह सूखने के बाद बारीक पीस लें। इस पाउडर को कॉर्नफ्लोर में मिलाकर गुलाबी गुलाल तैयार किया जा सकता है।

हरा रंग: पालक की पत्तियां या सूखी मेहंदी का सीमित उपयोग किया जाता है। पत्तियों को सुखाकर पाउडर बनाएं और फिर उसे बेस पाउडर के साथ मिलाएं। अगर मेहंदी लें तो बिना केमिकल वाली शुद्ध मेहंदी ही चुनें।

लाल या नारंगी शेड: गुड़हल की सूखी पंखुड़ियां या पलाश/टेसू के सूखे फूल पीसकर इस्तेमाल किए जा सकते हैं। तैयार पाउडर को छानना जरूरी है ताकि गुलाल मुलायम रहे और त्वचा पर रगड़ न दे।

हल्का बैंगनी: चुकंदर और गुड़हल पाउडर की थोड़ी-थोड़ी मात्रा मिलाकर नया शेड बनाया जा सकता है। यह घरेलू मिश्रण रंगों की विविधता बढ़ाता है और बच्चों के लिए आकर्षक विकल्प बनता है।

गीले रंग कैसे तैयार करें

गीले रंग के लिए चुकंदर, टेसू या गुड़हल को पानी में भिगोकर रखा जाता है। कुछ घंटे बाद पानी में प्राकृतिक रंग उतर आता है। इसे छानकर इस्तेमाल करें। ज्यादा गहरा रंग चाहिए तो भीगने का समय बढ़ाया जा सकता है, लेकिन मिश्रण को ताजा ही उपयोग करना बेहतर रहता है।

पीला गीला रंग हल्दी की बहुत कम मात्रा को पानी में घोलकर बनाया जा सकता है। इसमें हल्दी अधिक डालने से दाग गहरे हो सकते हैं, इसलिए हल्का घोल रखना व्यावहारिक माना जाता है। हरा रंग पालक पेस्ट को पानी में उबालकर और छानकर तैयार किया जा सकता है।

घरेलू रंग बनाते समय साफ बर्तन, सूखा जार और छन्नी का इस्तेमाल करें। पाउडर तैयार होने के बाद उसे एयरटाइट कंटेनर में रखें ताकि नमी न आए। अगर रंग में बदबू, फफूंद या गांठ दिखे तो उसे उपयोग न करें।

त्वचा सुरक्षा के लिए रंग खेलने से पहले नारियल तेल या मॉइस्चराइज़र लगाना उपयोगी होता है। आंख, नाक और मुंह के आसपास सीधे पाउडर रगड़ने से बचना चाहिए। बच्चों के लिए हमेशा हल्के रंग चुनें और पहले हाथ की त्वचा पर छोटा पैच टेस्ट करें।

विशेषज्ञ यह भी सलाह देते हैं कि रंग बनाते समय कृत्रिम डाई, पेंट पाउडर या अज्ञात बाजारू पिगमेंट न मिलाएं। घरेलू रंग का उद्देश्य रसायनों का उपयोग कम करना है, इसलिए सामग्री की शुद्धता पर ध्यान देना जरूरी है।

होली के दिन सूखा गुलाल प्राथमिकता में रखें और गीले रंग सीमित मात्रा में इस्तेमाल करें। इससे पानी की बचत भी होती है और सफाई आसान रहती है। इस तरह घर पर तैयार ऑर्गेनिक रंगों के साथ त्योहार को व्यावहारिक, सुरक्षित और संतुलित तरीके से मनाया जा सकता है।