मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इंदौर में अमृत 2.0 परियोजना में सिंगल क्लिक से 12.72 करोड़ लागत से बिलावली तालाब, 4.89 करोड़ लागत से लिम्बोदी तालाब, 3.82 करोड़ लागत से छोटा सिरपुर तालाब के जीर्णोद्धार कार्यों के भूमि-पूजन सहित 22 करोड़ के विकास कार्यों की सौगात दी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कार्यक्रम में जल के अपव्यय को रोकने और एक-एक बूंद संग्रहण के लिए शपथ दिलाई।
उन्होंने कहा कि ‘जल ही जीवन है, जल है तो कल है’ के मूल मंत्र के साथ जागरूकता फैलाना है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव धार्मिक और पर्यावरणीय संदेशों से जुड़ी महत्वपूर्ण गतिविधियों में भी शामिल हुए। उन्होंने इस्कॉन मंदिर पहुंचकर विधिवत पूजन-अर्चन किया और गौ माता की पूजा कर उन्हें गौ-ग्रास खिलाया।
जल संरक्षण बन रहा है राष्ट्रीय अभियान
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में जल संरक्षण को राष्ट्रीय अभियान के रूप में चलाया जा रहा है। मध्यप्रदेश में जल गंगा संवर्धन अभियान इसी का हिस्सा है। पिछले वर्षों में प्रदेश में लाखों जल संरचनाओं पर कार्य किया गया है। इंदौर का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि अभियान के पहले वर्ष में इंदौर नगर निगम द्वारा बड़ी संख्या में पुरानी बावड़ियों और तालाबों के गहरीकरण और पुनरुद्धार का कार्य किया गया। साथ ही सैकड़ों कुओं का भी जीर्णोद्धार किया गया है। उन्होंने नागरिकों से जल संरक्षण में भागीदारी की अपील करते हुए कहा कि यह अभियान केवल सरकारी नहीं, बल्कि जन-जन का आंदोलन होना चाहिए।
हमारी नदियां शरीर की रक्त धमनियों की तरह
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि इंदौर के जानापाव से निकली चंबल आगे बढ़कर यमुना में मिलकर गंगा जी की धारा को समृद्ध करती है। हमारी नदियां शरीर की रक्त धमनियों की तरह है, जो पृथ्वी माता को जीवन देती हैं। ब्रह्मांड में जल के महत्व से हम सभी परिचित हैं। उन्होंने कहा कि अगर जीवन को सफल करना है तो प्राचीन समय के उन कुएं, नदियां, तालाब, बावड़ी का जीर्णोद्धार करना होगा, जिनका सम्राट विक्रमादित्य, लोकमाता अहिल्या बाई होल्कर, महाराज सिंधिया ने निर्माण कराया था। उन्होंने बताया कि इंदौर में 21 बावड़ियों का जीर्णोद्धार कराया गया है। जल है तो कल है वाक्य की गंभीरता को हर व्यक्ति को स्वीकार करना होगा।
भारतीय संस्कृति पराक्रम, पुरुषार्थ, आनंद और उत्सव की संस्कृति
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आज विक्रम संवत् 2083 का शुभारंभ हो रहा है। आज का दिन सम्राट विक्रमादित्य का स्मरण करने का दिन है। सम्राट विक्रमादित्य ने अपनी वीरता, गंभीरता, दानवीरता और लोकप्रियता के बल पर दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाई थी। भारतीय संस्कृति, पराक्रम, पुरुषार्थ, आनंद और उत्सव की संस्कृति है। प्रकृति में ऋतुओं का राजा बसंत है और भारतीय नववर्ष के मौके पर चारों ओर बसंत की आकर्षक छटा दिखाई देती है। सनातन संस्कृति में मौसम, ऋतुओं और मंगल तिथियों के आधार पर पर्व-त्यौहार मनाए जाते हैं। इन तिथियों पर मंगल कार्य संपन्न किए जाते हैं। इसलिए ऐसे त्योहारों की मंगलकामनाएं होनी चाहिए। जबकि शुभकामनाएं जन्मदिवस, यात्रा आरंभ, साक्षात्कार, परीक्षा जैसे अवसरों पर देनी चाहिए। नवरात्रि, रामनवमी, दशहरा जैसी मंगल तिथियां हैं, इसलिए मंगलकामनाओं का आदान-प्रदान ही उचित है।











