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अजीत जोगी से जुड़ी एक बेहद रोचक न्यूज

तरुण शर्मा

घड़ी में शाम के 5 बजे थे में तरुण शर्मा (तत्कालीन एडिटर ओटीजी चैनल) और मेरे सीनियर व ओटीजी चैनल के संपादक श्री भूपेश गुप्ता (फिलहाल अमर उजाला) स्टूडियो में रात 8 बजे प्रसारित होने वाले न्यूज बुलेटिन को लेकर कुछ चर्चा कर रहे थे, तभी भूपेश जी के पास एक फोन आता है ओर वो उठ कर चले जाते है। कुछ लंबी बात करने के बाद वो मेरे पास आते हैं, लेकिन उनका चेहरा थोड़ा तनाव में लग रहा था वो कुछ बोल भी नहीं पा रहे थे लेकिन वो बोलना भी चाह रहे थे। एक गिलास से कुछ पानी के घूंट पीने और एक लम्बी गहरी सांस लेने के बाद जब उन्होंने मुझे पूरी बात बताई तो में भी एक बार के लिए सहम सा गया। ये हमारे लिए एक ब्रेकिंग न्यूज थी।

हमारे पास बस कुछ ही घंटे बचे थे इस खबर को कवर करने के लिए, हमें टीम भी बनानी थी और सबको इस खबर को कवर करने के लिए तैयारी भी करनी थी। पल- पल निकल रहा था और हमारी तैयारी भी तेजी से आगे बढ़ रही थी। रात 8 बजे तक हमने टीम के मेंबर तय कर लिए थे जो इस ब्रेकिंग खबर को कवर करने वाले थे। अब बारी थी उन सभी टीम मेंबर को बुलाने की जो दिनभर की कवरेज करने के बाद वापस घर चले गए थे।

सभी टीम मेंबर को रात 9 बजे तक ऑफिस वापस आने की सूचना की गई। इधर में और भूपेश गुप्ता जी इस पूरी खबर को कवर करने की पटकथा लिख चुके थे। इस पूरी खबर को लेकर किसी को कानों कान खबर ना लगे इस लिए पूरी गोपनीयता भी बरती जा रही थी। खतरा बहुत था डर भी बहुत लग रहा था। हमने हर उस खतरे को भी चिन्हित किया था, जो इस खबर को कवर करने में बीच में आने वाला था। अब हम पूरी टीम के साथ केबिन में बैठ कर इसको डिस्कस कर रहे थे टीम मेंबर में इस पूरे मिशन को श्री जनक गांधी जी के नेतृत्व में श्री भूपेश गुप्ता जी लीड कर रहे थे। मै तरुण शर्मा पूरी तरह स्टूडियो , कम्युनिकेशन और टीम की सुरक्षा की जिम्मदारी संभाल रहा था

मेरी टीम में हेमंत शर्मा, राजू पवार, प्रवीण सावंत, प्रदीप मसीह जो कैमरामैन कि भूमिका में थे और इन सभी कैमरामैन के सहयोग के लिए एक बैकअप टीम भी मौजूद थीं जो रिकॉर्डेड कैसेट का आदान-प्रदान करने वाली थी। रात के 10 बज चुके थे हम सब तैयारी शुरू कर चुके थे। कैमरा के साथ एक्स्ट्रा कैसेट और एक्स्ट्रा बैटरी सहित कम्युनिकेशन के लिए वाकीटॉकी ओर सुरक्षा के लिए सभी जरूरत के समान भी बैग में रख लिए थे जो पीठ पर टांग लिया था। इस ब्रेकिंग न्यूज की गोपनीयता बनी रहे इस लिए पूरी टीम को सतर्क भी कर दिया था।

मैने और भूपेश जी ने उन्हें सभी स्थानों को चिन्हित भी कर लिए थे जहां-जहां से कवरेज करना था और सभी कैमरा टीम को उन सभी स्थानों पर भेज दिया था। इस तरह हम पूरी तरह तैयार थे। अब हमे इंतजार था उस प्लेन का जो छत्तीगढ़ के रायपुर से आने वाला था। रात गहराती जा रही थी लगभग पूरा इंदौर शहर सोने की तैयारी कर रहा था। बस कुछ चुनिंदा प्रशासन और पुलिस के अधिकारी को छोड़ कर जिन्हें इस बात की जानकारी थी। हमारी टीम भी तैयार थी पर इस बात की खबर किसी को नहीं थी। आधी रात बीत चुकी थी एक चार्टर्ड प्लेन इंदौर एयरपोर्ट पर लैंड करता है। इसी बीच हमारी टीम के कैमरा मेन हेमंत शर्मा आजाद नगर के कब्रिस्तान में अपनी जगह बना चुके थे। राजू पवार कब्रिस्तान के बाहर तैयार थे। दोनों वाॅकी-टाॅकी से आपस में जुड़े हुए थे।

कब्रिस्तान के अंदर रात एक बजे एक व्यक्ति प्रवेश करता है जिसके पास फावड़ा ओर गेंती थी। वह अंदर एक कब्र को खोदना शुरू कर देता है और इस पूरे घटनाक्रम को हेमंत शर्मा (फिलहाल एनडीटीवी संवाददाता) कब्रिस्तान के अंदर छुपकर बड़ी जांबाजी से कैमरा में कैद कर लेते है। दूसरी तरफ राजू पंवार (फिलहाल नईदुनिया) कब्रिस्तान के बाहर एक टूटी-फूटी एंबेसडर कार में काले कपड़ों में छुप बाहर के दृश्य कैमरे में कैद कर रहे थे।

इधर कब्र खुद चुकी थी ओर वो आदमी इंतजार करता है। लगभग दो घंटे बाद एक पुलिस की बड़ी गाड़ी कब्रिस्तान में प्रवेश करती है। राजू पंवार इस गाड़ी को अपने कैमरे में कैद कर लेते है। इधर कब्रिस्तान में कुछ दो लोग पुलिस के साथ प्रवेश करते है टॉर्च की लाइट में उस व्यक्ति को ढूंढते हैं जो कब्र को खोद रहा है। हेमंत शर्मा बड़ी सावधानी से छुपकर यह सब रिकॉर्ड करते है कब्र में से एक कॉफिन बॉक्स निकाला जाता है इस बॉक्स में जो शव होता है वह श्री अजित जोगी जी की बेटी का होता है (जिसने अपने निजी कारणों से सुसाइड किया था ) इस कॉफिन बॉक्स को कुछ अधिकारियों की जानकारी और मौजूदगी में इंदौर से रायपुर शिफ्ट किया जा रहा था।

कॉफीन बॉक्स को कब्रिस्तान में से ला कर पुलिस की बड़ी गाड़ी में रखा जाता है। जिसे छुपकर राजू पंवार रिकॉर्ड कर लेते है। रात के लगभग 3.30 बजे गए थे। हमारी टीम के प्रदीप मसीह बिजासन टेकरी पर कैमरा ओर ट्रायपॉट के साथ उस चार्टर प्लेन को कैद कर रहे है। वहीं एयरोड्रम थाने के पास प्रवीण सावंत मौजूद रहते है। पूरा घटनाक्रम की जानकारी वाॅकी-टाॅकी से स्टूडियो सहित जनक गांधी जी को मिल रही थीं। तत्कालीन मुख्यमंत्री और इंदौर के एसपी साहब इस घटनाक्रम पर नजर रख रहे थे और सोच रहे थे कि इस मिशन को जल्दी से जल्दी रात के अंधेरे में पूरा किया जाए।

इधर कब्रिस्तान में कॉफिन बॉक्स को पुलिस की गाड़ी में रखा गया और उसको रवाना किया गया गाड़ी रात के सन्नाटे को चीरती हुई रेडियो कॉलोनी पलासिया चैराहा होती हुई एमजी रोड होते हुए एयरोड्रम की ओर बढ़ रही थी। रात के लगभग 4.30 बज चुके थे। प्रवीण सावंत एयरोड्रम रोड पर इंतजार कर रहे थे तभी पुलिस की गाड़ी दिखी जिसको कवर करते करते रोड पर आ गए। प्रवीण को देखते ही गाड़ी थोड़ी धीमी हो गई ओर धीरे-धीरे चलने लगी प्रवीण इस को रिकॉर्ड कर रहे थे।
तभी अंदर गाड़ी में बैठे एक अधिकारी ने फोन पर बात की ओर गाड़ी तेजी से आगे बढ़ने लगी। इस पूरे घटनक्रम को प्रवीण ने रिकॉर्ड किया ओर तेजी से वहां से निकल गया। सुबह के 5 बज चुके थे। इधर बिजासन टेकरी पर मौजूद प्रदीप ने उस कॉफिन बॉक्स को चार्टर प्लेन में रखते हुए रिकॉर्ड किया। इधर धीरे-धीरे सूरज की लालिमा छाने लगती है और प्रदीप प्लेन उड़ते हुए भी रिकॉर्ड करते है।

इधर ऑफिस में भूपेश जी सुबह के 7 बजे के बुलेटिन की तैयारी में और इस पूरे घटनाक्रम की स्क्रिप्ट लिखने में लग जाते हैं। मैं सभी कैमरा मेन के फुटेज को इक्कठा करने ओर एडिटिंग में जुट जाता हूं। पूरी रात का एक-एक लम्हा बहुत भारी था पल पल खतरा था। लेकिन कवरेज पूरा होने की खुशी पूरी थकान को मिटा रही थी। 7 बज चुके थे खबर भी तेयार थी और भूपेश जी खुद इस खबर को मॉनिटर के रहे थे । इस तरह अजित जोगी ने अपनी बेटी का शव को इंदौर में दफन था उसको रायपुर ले जाने में सफल हो गए।

इधर खबर टेलीकास्ट हुई जिसके कुछ फुटेज आज तक ने भी दिखाए और एक अंग्रेजी अखबार ने ओटीजी चैनल का लोगो लगा कर फ्रंट पेज पर फोटो भी प्रकाशित किया था।