इस चमत्कारी मंदिर में है कई राज, आज भी माता भक्तों को साक्षात दर्शन देती है

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भारत में ईश्वर के प्रति आस्था इतनी है कि स्वयं ईश्वर आज भी अपने भक्तों को किसी ना किसी रुप में दर्शन देते रहते है। हमारे देश में कई ऐसे मंदिर है जहां अनेकों चमत्कार होते रहते है। जो कि सबकों हैरानी में डाल देते है। कई चमत्कार तो ऐसे भी है जो कि वैज्ञानिकों को भी हैरान कर देते है। ऐसा ही एक मंदिर छत्तीसगढ़ राज्य के चौतुरगढ़ में है यहां की मान्यता है कि मां दुर्गा आज भी यहां अपने भक्तों को यहां दर्शन देती है इसके साथ ही यह भी कहा जाता है कि यहां पर लोग कैसी भी बिमारी के साथ आए लेकिन वह यहां से निराश नहीं लौटते ।

दुर्गा माता का यह मंदिर छत्तीसगढ़ राज्य के चौतुरगढ़ नामक स्थान में पहाड़ियों पर बसा हुआ है। चौतुरगढ़ कोरबा के अंतर्गत पाली विकासखंड के घने जंगल व पहाड़ियों के बीच बसा हुआ स्थान है। माता का यह मंदिर नागर शैली द्वारा बनाया गया है।

प्राचीन काल से बना है मंदिर

माता का यह मंदिर प्राचिन काल से बना हुआ है। इस मंदिर का निर्माण 9वीं शताब्दी में विक्रमादित्य द्वितीय द्वारा बनवाया गया है। कोरबा जिले से 90 किमी की दूरी पर स्थित इस अद्भुत जगह में चौतुरगढ़ का किला भी स्थापित है। वर्तमान समय में इन राजाओं का 5 वर्ग कि.मी. में फैला यह किला खंडहर में तब्दील हो चुका है।

मंदिर की सीढ़ियां भी है चमत्कार से भरपूर

इस मंदिर में सीढ़ियां भी इतनी चमत्कारी है कि मंदिर में हर किसी को प्रवेश नहीं करने देती है। कहा जाता है कि इस मंदिर में जाने के लिए खतरनाक रास्तों से होकर गुजरना पड़ता है। जंगल के बीचो-बीच बसे इस मंदिर में सीढ़ियों से चढ़कर जाना पड़ता है। इन सीढ़ियों की खास बात यह है कि अगर माता रानी किसी को अपने मंदिर में प्रवेश नहीं देना चाहती, तो वह इंसान इन सीढियों से चढ़ नहीं पाता और मजबूरी वश वह वापस लौट जाता है।

भक्तों ने खुद देखा है मां को घूमते हुए

मंदिर में माता रानी को घुमते हुए भी देखा गया है। मंदिर में आने वाले कई भक्तों ने माता को घुमते हुए देखा है। इस मंदिर के पूजारी और साधुओं के बारे में बात करे तो कहा जाता है कि वो लोग कोई मामूली इंसान नहीं है बल्कि अमीर घरों से हैं और इन्ही लोगों का कहना है कि उन्होंने माता रानी को मूर्ति से बाहर आकर मंदिर में घुमते देखा है।

माता रानी के साक्षात दर्शन के लिए एक बार जरुर इस मंदिर में आना चाहिए। इस मंदिर की एक और मान्यता है कि यहां आने वाले भक्त यहां से स्वस्थ ही लौटकर जाते है। भक्त यहां कैसी भी बिमारी के साथ आए यहां से मां उन्हें निराश नहीं लौटने देती है।

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