चुनाव है तो पोते बनकर आ गए तब कहां गए थे जब मेरे बाबू जी बीमार थे- संजय शुक्ला

मेरे बाबूजी ने इंदौर में कई भाजपा नेताओं को खड़ा करने, स्थापित करने और चुनाव लड़ाने में मुख्य भूमिका निभाई है। अब हालत यह है कि भाजपा के नेता चुनाव के समय पर बाबूजी के पास आकर चरण स्पर्श कर जनता मैं भ्रम फैलाने की कोशिश कर रहे हैं ।

sanjay shukla

इंदौर। भारतीय जनता पार्टी के महापौर पद के प्रत्याशी द्वारा वरिष्ठ भाजपा नेता विष्णु प्रसाद शुक्ला बड़े भैया को अपना दादाजी बताने और घर जाकर उनसे आशीर्वाद लेने के साथ की गई बयानबाजी पर कांग्रेस प्रत्याशी एवं बड़े भैया के बेटे संजय शुक्ला ने पलटवार किया है।

 

भाजपा के प्रत्याशी ने बड़े भैया को अपना दादाजी और स्वयं का उनका पोता बताया । इस पर कांग्रेस प्रत्याशी संजय शुक्ला ने कहा कि जब मेरे बाबूजी बीमार थे और अस्पताल में भर्ती थे, उस समय पर यह पोता कहा था। उस समय तो प्रदेश के मुख्यमंत्री भी अस्पताल के पास तक आकर चले गए लेकिन उन्हें कभी यह याद नहीं आई की मेरे बाबू जी से मिल लेवे । उनके स्वास्थ्य की जानकारी ले लें। मेरे बाबूजी ने इंदौर में कई भाजपा नेताओं को खड़ा करने, स्थापित करने और चुनाव लड़ाने में मुख्य भूमिका निभाई है। अब हालत यह है कि भाजपा के नेता चुनाव के समय पर बाबूजी के पास आकर चरण स्पर्श कर जनता मैं भ्रम फैलाने की कोशिश कर रहे हैं ।

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तोड़फोड़ के बाद नक्शा मंजूरी में लगे 10 लाख तो क्या मतलब है स्मार्ट सिटी का

इंदौर जिले के प्रभारी मंत्री और प्रदेश के गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा के द्वारा यह बयान दिया गया कि इंदौर स्मार्ट सिटी है और इस सिटी में हमें स्मार्ट प्रत्याशी चाहिए इसीलिए भाजपा के द्वारा भार्गव को प्रत्याशी बनाया गया है। इस बयान पर मीडिया के साथियों से चर्चा में अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए महापौर पद के कांग्रेस प्रत्याशी संजय शुक्ला ने कहा कि स्मार्ट सिटी के विकास के नाम पर मकानों मैं जो तोड़फोड़ की गई है, उसका नया नक्शा मंजूर कराने में 10 लाख रुपए लग रहे हैं। इतना पैसा देना गरीब और मध्यमवर्गीय परिवार के बस की बात नहीं है। इतने पैसे में तो वे लोग फिर से मकान बना लेते हैं। जिस स्मार्ट सिटी में नक्शा मंजूरी का इतना पैसा लग रहा है तो वह स्मार्ट सिटी किस काम की ? उन्होंने इंदौर के प्रभारी मंत्री से सवाल किया कि 5 साल में इंदौर मे स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट में खर्च किए गए 1000 करोड रुपए के कामों में से एक काम ऐसा बता दें जो किसी शहर के स्मार्ट होने का प्रतीक बन सकता हो ?