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मध्य भारत में पहली बार इंदौर में “पीडियाट्रिक नेफ्रोलॉजी कॉन्फ्रेंस 2019” का आयोजन

Posted on: 10 Jan 2019 17:57 by Ravindra Singh Rana
मध्य भारत में पहली बार इंदौर में “पीडियाट्रिक नेफ्रोलॉजी कॉन्फ्रेंस 2019” का आयोजन

इंदौर: पीडियाट्रिक नेफ्रोलॉजी बाल रोग की एक नई सुपर स्पेशियलिटी ब्रांच है जो गर्भ के अंदर शिशु से लेकर 18 वर्ष की आयु तक के बच्चों में हो रही किडनी की बीमारीयों से संबंधित है। बच्चों में हो रही किडनी की बीमारीयो के कारण, बड़ो में किडनी बीमारियों के कारणों से बहुत अलग है। भारत में पीडियाट्रिक नेफ्रोलॉजीस्ट की संख्या लगभग 15 से 20 ही होगी जो की बहुत कम हैं। मध्यप्रदेश में पीडियाट्रिक नेफ्रोलॉजी की यात्रा के बारे में जानकारी प्रदान करने हेतु एवं इस बारे में शिशु रोग विशेषज्ञों के नॉलेज को अपग्रेड करने के लिए “पीडियाट्रिक नेफ्रोलॉजी कॉन्फ्रेंस 2019” का आयोजन होने जा रहा है। इस कॉन्फ्रेंस का आयोजन मध्य भारत में पहली बार डॉ. शिल्पा सक्सेना द्वारा किया जा रहा है। यह एक दिवसीय कॉन्फ्रेंस रविवार, 13 जनवरी 2019 को होटल रेडिसन ब्लू में होगी जिसमें भाग लेने के लिए देश भर के प्रसिद्ध पीडियाट्रिक नेफ्रोलॉजीस्ट मुख्य वक्ताओं के रूप में शामिल होंगे। साथ ही मध्य प्रदेश से अनेक पीडियाट्रिशियन भी इस कॉन्फ्रेंस में सम्मिलित होंगे।

इस पीडियाट्रिक नेफ्रोलॉजी कॉन्फ्रेंस में डॉ. शिल्पा सक्सेना, इंदौर में पीडियाट्रिक नेफ्रोलॉजी में किए जा रहे कार्य पर ऑडियो-विजुअल प्रस्तुत करेंगी एवं इंदौर में उनके द्वारा किए गए किडनी ट्रांसप्लांट के डेटा पर भी प्रेसेंटेशन प्रस्तुत करेंगी। डॉ. शिल्पा सक्सेना एम्स से प्रशिक्षित पीडियाट्रिक नेफ्रोलॉजीस्ट हैं और वर्तमान में वह इंदौर के अपोलो अस्पताल में कंसल्टेंट पीडियाट्रिक नेफ्रोलॉजिस्ट हैं।

 इस पीडियाट्रिक नेफ्रोलॉजी कॉन्फ्रेंस में लेक्चर्स आयोजित किए जाएंगे जिसमें एम्स के पीडियाट्रिक नेफ्रोलॉजीस्ट और विज़ागजोधपुर के अन्य प्रसिद्ध नेफ्रोलॉजिस्ट आदि बच्चों में किडनी की बीमारियों के विभिन्न पहलुओं पर बातचीत करेंगे। यह एक महत्वपूर्ण कॉन्फ्रेंस है जिसमें किडनी की बीमारियों से पीड़ित बच्चों के लाभ के लिए, विशेषज्ञ किडनी की बीमारियों और उनके प्रभावी उपचारो  के बारे में जानकारी साझा करेंगे। 

बाल रोग में किडनी की बीमारी बहुत आम है जिनमें से अधिकांश रोग डायग्नोस नहीं हो पाते और फिर एडवांस स्टेज पर पहुँच कर मृत्यु का कारण बन जाते हैं। तीन वर्ष पूर्व शिशु गुर्दा रोग विशेषज्ञ के अभाव में रोगीयों को राज्य से बाहर जाना पड़ता था लेकिन अब इन शिशु गुर्दा रोगीयों के लिए सभी प्रकार के इलाज इंदौर में उपलब्ध हैं। छोटे बच्चों में गंभीर अनुवांशिक बीमारियां पहचानी जा रही है। वजन कम होनाएनीमियाबोन डिफॉर्मिटीभूख न लगनाउल्टी यूरिनरी प्रॉब्लम और सूजन जैसे लक्षण किडनी की बीमारी की तरफ संकेत देते हैं। बेसिक टेस्ट जैसे सीरम क्रिएटिनिन सोनोग्राफी,बीपी और यूरिन टेस्ट की मदद से किडनी की बीमारीयों को पहचाना जा सकता है। शिशुओं के डायलिसिस की जा रही है एवं विगत वर्षों में कई बच्चों के किडनी ट्रांसप्लांट किए जा चुके हैं।  

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