रेलवे की नौकरी और जमीन का खेल, जानिए क्यों एक बार फिर घिरे लालू परिवार

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By Praveen ShuklaPublished On: January 9, 2026

दिल्ली के राउज एवेन्यू कोर्ट ने शुक्रवार को बहुचर्चित नौकरी के बदले जमीन मामले में बड़ा फैसला सुनाया। कोर्ट ने राष्ट्रीय जनता दल नेता और पूर्व रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव, उनकी पत्नी राबड़ी देवी, बेटी मीसा भारती समेत कुल 41 लोगों पर आरोप तय किए हैं। कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि इस मामले में लालू परिवार ने एक संगठित तरीके से काम किया।

यह मामला साल 2008 का है। पटना के रहने वाले किशुन देव राय ने अपनी 3,375 वर्ग फीट जमीन सिर्फ 3.75 लाख रुपये में राबड़ी देवी को बेची थी, जबकि उस समय जमीन की कीमत इससे कहीं ज्यादा थी। इसी साल किशुन देव राय के परिवार के तीन लोगों को मुंबई में मध्य रेलवे में ग्रुप डी की नौकरी मिल गई। सीबीआई ने इसे नौकरी के बदले जमीन लेने का मामला बताया।

क्या है नौकरी के बदले जमीन घोटाला

सीबीआई के मुताबिक, जब लालू यादव 2004 से 2009 के बीच रेल मंत्री थे, उस दौरान रेलवे में नौकरी दिलाने के बदले लोगों से जमीन ली गई। जांच एजेंसी का दावा है कि इस तरीके से लालू परिवार ने बिहार में एक लाख वर्ग फीट से ज्यादा जमीन सिर्फ 26 लाख रुपये में हासिल की, जबकि उस समय जमीन की कीमत करीब 4.39 करोड़ रुपये थी। कई मामलों में जमीन का लेनदेन नकद भुगतान के जरिए हुआ।

CBI की जांच और आरोप

सीबीआई ने मई 2022 में लालू यादव, राबड़ी देवी, उनकी बेटियों और करीबियों के ठिकानों पर छापेमारी की थी। जांच में यह भी सामने आया कि रेलवे में ग्रुप डी की कई नौकरियां बिना किसी विज्ञापन के दी गईं। आरोप है कि 12 लोगों को नौकरी देने के बदले 7 प्लॉट परिवार के नाम पर ट्रांसफर कराए गए। इसी आधार पर सीबीआई ने केस दर्ज किया और अब कोर्ट ने इस मामले में आरोप तय कर दिए हैं।