UP में लगेगी भारत की पहली ‘रेयर अर्थ टू मैग्नेट’ फैक्ट्री, नोबेल विजेता कॉन्स्टेंटिन नोवोसेलोव ने CM योगी से की मुलाकात

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By Raj RathorePublished On: March 11, 2026
Yogi Adityanath with Konstantin Novoselov

लखनऊ: उत्तर प्रदेश को उच्च तकनीक आधारित मैन्युफैक्चरिंग का केंद्र बनाने की दिशा में एक बड़ी पहल हुई है। ग्रैफीन की खोज के लिए विश्व प्रसिद्ध नोबेल पुरस्कार विजेता कॉन्स्टेंटिन नोवोसेलोव ने बुधवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात की। इस बैठक में लोहम कंपनी द्वारा प्रदेश में भारत की पहली “रेयर अर्थ टू मैग्नेट” इंटीग्रेटेड फैसिलिटी स्थापित करने की योजना पर विस्तार से चर्चा की गई।

मुख्यमंत्री आवास पर हुई इस मुलाकात के दौरान लोहम कंपनी के सीईओ रजत वर्मा और चीफ ऑफ स्टाफ आयुष सबात भी मौजूद थे। बैठक में शामिल सभी अतिथियों ने उत्तर प्रदेश में निवेश के लिए बने सकारात्मक माहौल की सराहना की। मुख्यमंत्री योगी ने नोबेल विजेता और कंपनी के अधिकारियों का स्वागत करते हुए प्रदेश में हरसंभव सहयोग का आश्वासन दिया।

एडवांस्ड मटेरियल रिसर्च का हब बनेगा यूपी

बैठक का मुख्य एजेंडा उत्तर प्रदेश को एडवांस्ड मटेरियल रिसर्च और इंजीनियरिंग का एक प्रमुख केंद्र बनाना था। लोहम कंपनी की प्रस्तावित “रेयर अर्थ टू मैग्नेट” फैसिलिटी इसी योजना का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। इस सुविधा के स्थापित होने से देश में उच्च तकनीक आधारित विनिर्माण को काफी बढ़ावा मिलेगा और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण स्थायी चुम्बकों (permanent magnets) के उत्पादन में आत्मनिर्भरता बढ़ेगी।

ग्रैफीन से बदलेगी बैटरी तकनीक

नोबेल पुरस्कार विजेता कॉन्स्टेंटिन नोवोसेलोव लोहम कंपनी के साथ एक रणनीतिक सलाहकार और सहयोगी के रूप में जुड़े हैं। उनका मुख्य उद्देश्य एडवांस्ड मटेरियल साइंस को औद्योगिक स्तर पर लागू करना है, खासकर बैटरी तकनीक और ऊर्जा क्षेत्र में। यह सहयोग दो प्रमुख क्षेत्रों पर केंद्रित है:

1. बेहतर बैटरियां: 2D मटेरियल, जैसे कि ग्रैफीन, का उपयोग करके अगली पीढ़ी की लिथियम-आयन बैटरियों की क्षमता, सुरक्षा और जीवनकाल को बेहतर बनाना।

2. उन्नत रीसाइक्लिंग: बैटरियों और स्थायी चुम्बकों के लिए एक एडवांस्ड रीसाइक्लिंग सिस्टम विकसित करना। इससे महत्वपूर्ण खनिजों की रिकवरी बढ़ेगी और सर्कुलर इकॉनमी को मजबूती मिलेगी।

‘मेक इन इंडिया’ को मिलेगी मजबूती

लोहम और नोवोसेलोव के बीच यह सहयोग भारत के “मेक इन इंडिया” और ग्रीन एनर्जी विजन के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यह न केवल भारत को बैटरी तकनीक और दुर्लभ खनिजों के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाएगा, बल्कि वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में भी एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाने में मदद करेगा। मुख्यमंत्री योगी ने इस पहल को प्रदेश के विकास के लिए एक बड़ा कदम बताया।