CCD के मालिक की आत्महत्या से सभी को सँभलने की जरुरत है

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नीरज राठौर की कलम से

विगत दिनों कैफे कॉफी डे के मालिक वीजी सिद्धार्थ की आत्महत्या कई तरह के सवाल खड़े करती है। किसानों की आत्महत्याओं पर संवेदनहीन हो चुकी सरकारें और देश के युवाओं में बढ़ती आत्महत्या की प्रवृत्ति पर चुप्पी साधने वाले सत्ताधारी इस एक अकेली आत्महत्या से कितना सीखेंगे और इसे कितनी गंभीरता से लेगे कहना मुश्किल है। लेकिन अब हालात बेहद खराब हो रहे हैं।

इससे पहले कि आप मुझे पूरी तरह निराशावादी या देश को बदनाम करने की साजिश का हिस्सा मान लें, मैं तीन शुरुआती बातें कहना चाहता हूं.

  1. तीन तलाक पर मज़बूत बिल लाने के लिए सरकार को बधाई
  2. भारत माता की जय और
  3. वंदे मातरम

अब एक नज़र देश के आर्थिक हालात पर, जो लगातार बद से बदतर होते जा रहे हैं। असल में, लोकसभा चुनावों में मोदी सरकार की प्रचंड जीत के बाद निवेशकों को उम्मीद थी कि अर्थव्यवस्था की मज़बूती के लिए भी तेज़ी से कदम उठाए जाएंगे लेकिन ऐसा नहीं हुआ, नतीजतन निवेशक निराश हैं। शेयर मार्किट में लाखो लोगो को अरबो रुपयों का फटका लग चूका है ।

इसका नतीजा सीसीडी के मालिक की आत्महत्या जैसे हालात तक में देखा जा सकता है। सिद्धार्थ ने अपनी सुसाइड नोट में भी यह ज़िक्र किया है कि वह इनकम टैक्स और अन्य व्यावसायिक दबावों के कारण परेशान थे। तो क्या यह संभव नहीं है कि किसानों, बेरोजगार युवाओं से शुरू हुई आत्महत्या की डोर अब व्यवसायियों के गले को भी कसने लगी है।
मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल के पहले 60 दिन की स्थिति बताती है कि निवेशक घबराए हुए हैं, नतीजतन इस ज़रा से अंतराल में लगभग 12 लाख करोड़ रुपये की राशि का नुकसान हुआ है।

30 मई को मोदी सरकार के औपचारिक अभिनंदन के बाद भारतीय बाज़ार की नब्ज़ माने जाने वाले बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज के शेयरों का बाज़ार मूल्य 3 जून को 156 लाख करोड़ रुपए की ताज़ा ऊंचाई तक पहुंच गया था लेकिन उसके बाद से जुलाई के आखिरी सप्ताह तक इसमें 11.70 लाख की गिरावट दर्ज की गई है, जो कि 7.5 प्रतिशत है। बाज़ार मूल्य घटकर 144 लाख करोड़ रुपए रह गया है।

बीएसई में कारोबार करने वाली हर 10 में से 9 कंपनियों के शेयर (कुल 2,664 में से 2,294) तब से लगातार गिरावट के लाल रंग से पार नहीं जा सके हैं। 60 फीसदी से ज़्यादा शेयर (1,632) में 10 फीसदी से ज़्यादा की गिरावट दर्ज की गई है। यही नहीं इनमें से एक तिहाई (903) का हाल तो यह है कि ये 20 फीसदी से ज़्यादा नीचे जा चुके हैं।
आप चाहें तो इन तथ्यों को झूठा मानते हुए अगले पांच साल में 5 ट्रिलियन की अर्थव्यवस्था बनने का सपना देख सकते हैं। और फिर यह भी गुमान कर सकते हैं कि देश में चारों तरफ शांति है।

इतनी निराशा के बाद भी भक्त कह रहे है की लोग मॉल्स में खरीदारी कर रहे हैं। बाज़ार रक्षाबंधन की खरीदी से अटे पड़े हैं। भारतीय युवाओं का लोहा दुनिया मान रही है। युवा भारत में ही नहीं यूरोप-अमेरीका तक नौकरियां कर रहे हैं, जो बेरोज़गार हैं, वे बांग्लादेश से आए हुए लोग हैं। दुनिया में भारत का डंका बज चुका है, जो अब चांद तक पर देखा-सुना जा रहा है। किसान प्रफुल्लित हैं। ज़ोरदार बारिश हो रही है। फसल के दो गुने से तीन गुने तक दाम मिल रह हैं। कर्मचारियों को इस बार ज़बरदस्त इंक्रीमेंट मिला है। इसके कारण बाज़ार में भी नित नए मोबाइल की खरीदारी जारी है। मोबाइल में सस्ते 4जी डेटा की मदद से सभी लोग रीना ठाकुर का विडियो भी देख पा रहे है । हम चाँद पे जा रहे है, अमेरिका , चाइना एवं ब्रिटेन सभी हमारे आगे झुक गए है । भक्तो के नजरिये से तो सब कुछ अच्छा चल रहा है ।

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