क्या आपकी वास्तु मे राम है

राम जो किसी भी प्रकार की नकारात्मक शक्तियों जैसे ताड़का , खर – दूषण , शूर्पनखा , कुंभकरण , रावण इत्यादि हो या कैसी भी परिस्थिति की उनका राज्याभिषेक होने वाला हो लेकिन अगले ही क्षण वनवास हो जाए

डॉ तुषार खण्डेलवाल  ( वास्तु सलाहकार )   

राम जो किसी भी प्रकार की नकारात्मक शक्तियों जैसे ताड़का , खर – दूषण , शूर्पनखा , कुंभकरण , रावण इत्यादि हो या कैसी भी परिस्थिति की उनका राज्याभिषेक होने वाला हो लेकिन अगले ही क्षण वनवास हो जाए या अचानक अपनी धर्मपत्नी का साथ छूट जाए । तो भी जीवन की हर विकट परिस्थिति मे एकसमान भाव , मर्यादा मे रहते हुऐ एवं मुसकुराते हुऐ उसपर विजय पाने वाली शक्ति का नाम राम है । वास्तु के दो प्रकार आप जानते ही है, एक शरीर एवं दूसरा भवन अर्थात निर्माण जहा आपका शरीर  समय बिताता है । यानि दोनों प्रकार मे प्रभाव शरीर पर पड़ना है । दोनों प्रकार मे शक्ति या कहे राम का सबसे ज्यादा महत्व है, जो हमे हर नकारात्मक परिस्थिति से लड़ने की शक्ति देगे ,

1 . शरीर वास्तु : राम जी की कृपा से जन्म के समय तो हमे स्वस्थ शरीर मिल गया , किन्तु केमिकल युक्त आज की फल, सब्जिया, अनाज, दूध इत्यादि से कैसे बचेंगे । सोशल मीडिया की राहु रूपी अर्थात जो दिखाता है  वैसा वास्तव मे है नहीं, की छाया से आप कैसे बचेंगे । फेस्बूक पर दूसरों के पार्टी एवं घूमने के फ़ोटोज़ देखकर अगर हम खुश ना होकर, इस लिए दुखी है की हम नहीं गए । तो जो ह्रदय चक्र इससे आपका बिगड़ रहा है , जिससे आप भविष्य मे डॉक्टर एवं अस्पताल की वास्तु सुधारने मे अहम योगदान देने की और बड़ रहे है अर्थात आपको हार्ट की समस्या आनी ही है ।   ये भी हम मानकर चले की आज के समय इन परिस्थियों से बचा जाना अत्यंत कठिन है , तो वो कौन सी राम की शक्ति है जो हमारे शरीर को बचा सकती है,  आइए उसकी बात करे । हमारे पाँच प्रकार के कोश या कहे शरीर होते है । प्रथम स्थूल शरीर ( जो हमे दिखता है ), दूसरा ऊर्जा शरीर ( चक्रों द्वारा ब्रह्मांडीय ऊर्जा ग्रहण कर बनने वाली ऊर्जा का शरीर या कहे आभामंडल ) , तीसरा मनोमय कोश ( मन की शक्ति ) , चौथा ज्ञानमय शरीर ( पूर्व जन्मों की मेमोरी वाला ) एवं पाचवा   आनंदमय शरीर ( परम शक्ति से जुड़ा ) है।

सबसे कम शक्तिशाली हमारा दिखने वाला शरीर होता है , जिसमे सब बीमारिया आदि आती है । एवं सबसे शक्तिशाली आनंदमय शरीर होता है । व्यायाम करके स्थूल शरीर को ऊर्जा मिलती है , प्राणायाम से ऊर्जा शरीर को एवं ध्यान करने से मन शरीर शक्तिशाली होता है । एक स्वस्थ जीवन के लिए तीनों का शक्तिशाली होना आवश्यक है। यह जो शरीर मे नकारात्मक ऊर्जा केमिकल युक्त आज की फल, सब्जिया, अनाज, दूध से बड़ रही है ,  उसे हम हमारे चक्रों की ऊर्जा संतुलित कर जब हम हमारी आंतरिक शक्ति बड़ा लेंगे, तो वो राम के रूप मे हमारी रक्षा करेगी ।

2. भवन अर्थात बिल्डिंग वास्तु  : जैसे हमारे शरीर मे हर अंग का एक स्थान होता है ताकि वह अंग अपना कार्य सुचारु रूप से कर सके , उसी प्रकार भवन वास्तु मे हर महत्वपूर्ण तत्व ( आकाश , वायु , अग्नि , जल , वायु ) एवं गतिविधि के कुछ उचित स्थान होते है । ताकि उन तत्वों की , ग्रहों की शक्ति हुमए मिले ।  यहा हम उन कुछ वास्तु दोषों की चर्चा करेंगे, जो व्यक्ति यह मानकर की उसने वास्तु के अनुसार प्लानिंग करवाई है , बड़ी गलतिया करता है , फलस्वरूप नकारात्मक परिणाम पाता है ।

उदाहरण  –

जैसे मान लो किसी भवन ( घर तभी कहलाएगा जब सब कुछ सकारात्मक हो ) मे किचन आग्नेय कोण मे है उसमे जल स्थान , सिंक एवं गैस की जगह भी उचित है,  किन्तु यदि उसमे प्लेटफॉर्म पर नकारात्मक पत्थर या ग्रेनाइट लगा रखा है , तो घर की महिला जो भोजन बनाएगी , उसे पत्थर से आने वाली  नकारात्मक ऊर्जा कमर के आसपास ट्रांसफर होगी एवं महिला के शरीर के मणिपुर एवं स्वादिष्ठान  चक्र की ऊर्जा खराब होकर उससे संबंधित रोग की संभावना पैदा करेगी।

इसी प्रकार यदि रसोई मे अग्नि संबंधित रंग ( लाल , पिंक ,…. ) या फर्निचर मे कर लिए तो अग्नि तत्व और बड़ जाएगा जिससे भोजन बनाने वालों मे वह क्रोध के रूप मे स्थानांतरित होकर भोजन मे जाएगा।  जिसे पूरा परिवार ग्रहण कर अपने अंदर गुस्से की एनर्जी के रूप मे ग्रहण कर लेगा ।  उसके बाद क्या हो सकता है , ये आप स्वयं समझ सकते है । क्यूंकी  जैसा खाए अन्न , वैसा होगा मन , & मन के हारे हार है, मन के जीते जीत ।

एक और जरूरी उदाहरण से समझिए : जो भी अपना वैवाहिक जीवन अच्छे से बिताने के लिए वास्तुअनुरूप स्थान मे कमरा बनवा कर रहते है, किन्तु यदि उस कमरे मे क्रीम या पीला रंग, परदे या फर्निचर आदि है । तो उस कमरे मे गुरु तत्व की अधिकता होने से शादी शुदा जोड़े के जीवन से शुक्र प्रधान जो उनका जीवन है वह नकारात्मक हो जाएगा । और उदासीन होकर झगड़े की नौबत या जाएगी । क्यूंकी देखने मे गुरु और शुक्र दोनों गुरु तत्व है किन्तु दोनों की क्वालिटी विपरीत है ।

आज के आधुनिक युग मे इन सब का भी ध्यान रख लिया तो भी जैसे मोबाईल की , वाईफाई की , माइक्रो वैव ओवन की ऐसी कई तरंगे हमारे शरीर एवं भवन मे प्रवेश कर हम पर नकारात्मक प्रभाव डाल रही है , तो इनसे हमे बचाने के लिए भी वास्तु शास्त्र मे शक्ति ( राम ) को बताया गया है । वास्तु शास्त्र के ग्रंथों ( विश्वकर्मा प्रकाश , मयमतं , समरंगणसूत्रधार आदि ) मे एक अध्याय गर्भविन्यास विधानम ( फाउंडेशन डिपाज़ट ) नाम से है , जिसमे बहुत विस्तार से ये बताया गया है कि भवन को ऊर्जावान बनाने के लिए नीव मे ,कुर्सी हाइट मे, उसके बाद फ्लोरिंग के नीचे विशेष एरिया मे कई प्रकार की शक्तिया जैसे 7 प्रकार की जड़ी बूटिया  जिन्हे सर्वऔषधि कहते है , 8 प्रकार के खनिज  ( मिनेरल्स ) , 8 प्रकार के रत्न , इत्रों , पारा , धातुओ ( तांबा, स्वर्ण ,चांदी .. ), धान्य , यंत्र , आदि का शास्त्रोक्त प्रयोग करने से भवन धनात्मक ऊर्जा का वाईफाई राउटर बनकर , भवन मे समस्त प्रकार की ऊर्जा उचित स्थान पर ले आता है , जो घर के सदस्यों को प्राप्त हो जाती है एवं वे हर नकारात्मक ऊर्जा से लड़ने की 45 प्रकार की राम नामक शक्ति प्राप्त कर लेते है ।

नीव मे ऊर्जा का इनवेस्टमेंट और उसकी ऊर्जा का मापन