नागरिकता संशोधन बिल लोकसभा में पेश, शिवसेना का मिला समर्थन

सदन में इस बिल को पेश करने के लिए शिवसेना ने सरकार का समर्थन मिला है। लोकसभा में इस दौरान कुल 375 सांसदों ने वोट किया, जिसमें 293 पक्ष और 82 वोट विरोध में पड़े।

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Amit Shah

नई दिल्ली: नागरिकता कानून को लेकर मोदी सरकार पूरी तरह तैयार है. केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने सोमवार को नागरिकता संशोधन विधेयक लोकसभा में पेश किया। जैसे ही अमित शाह ने ये बिल सदन के पटल पर रखा, वैसे ही विपक्ष से इसको लेकर हंगामा शुरू कर दिया। सदन में इस बिल को पेश करने के लिए शिवसेना ने सरकार का समर्थन मिला है। लोकसभा में इस दौरान कुल 375 सांसदों ने वोट किया, जिसमें 293 पक्ष और 82 वोट विरोध में पड़े।

जब अमित शाह ने ये बिल लोकसभा में पेश किया तो विपक्ष ने हंगामा शुरू कर दिया। कांग्रेस, टीएमसी समेत कुछ विपक्षी पार्टियों ने इस बिल के पेश होने का ही विरोध किया। कांग्रेस का कहना है कि इस बिल का पेश होना ही संविधान के खिलाफ है लेकिन अमित शाह ने कहा कि जब बिल पर चर्चा होगी तब वह जवाब देंगे।

कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि इस बिल के पेश होने से संविधान के आर्टिकल 14 का उल्लंघन किया गया है, लेकिन अमित शाह ने कहा कि इस बिल के आने से अल्पसंख्यकों पर कोई असर नहीं होगा। ये बिल अल्पसंख्यकों के खिलाफ नहीं है।

AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि सेक्युलिरिज्म इस मुल्क का हिस्सा है, ये एक्ट फंडामेंटल राइट का उल्लंघन करता है। ये बिल लाकर सुप्रीम कोर्ट के आदेश का उल्लंघन हो रहा है। इस मुल्क को इस कानून से बचा ले लीजिए, गृह मंत्री को बचा लीजिए।

नागरिकता संशोधन विधेयक 2016 के तहत नागरिकता कानून 1955 में संशोधन किया जाएगा। इसके तहत पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश से आए गैर-मुस्लिम धार्मिक अल्पसंख्यकों को भारतीय नागरिकता दिए जाने की बात कही गई है। इस बिल के कानून बनने के बाद अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान के हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई धर्म के मानने वाले अल्पसंख्यक समुदायों को 11 साल के बजाय महज छह साल ही भारत में रहने पर और बिना उचित दस्तावेजों के भी भारतीय नागरिकता मिलने का रास्ता साफ हो जाएगा।

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