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बजट सीतारमन

Posted on: 06 Jul 2019 10:34 by Surbhi Bhawsar
बजट सीतारमन

एन के त्रिपाठी

एक ज़माना था जब भारत का मध्यम वर्ग बजट में केवल इनकम टैक्स की दरों पर ध्यान देता था। इसके बाद ही विभिन्न सेक्टरों में सरकार का कितना व्यय होगा, इस पर ध्यान दिया जाता था। अब ऐसा समय आ गया है कि बजट पूरी अर्थव्यवस्था को किस दिशा में ले जा रहा है देश इस पर गंभीर चिंतन करने में सक्षम हो गया है। बजट के सारे आंकड़े आपके सामने हैं मैं केवल कुछ बिंदुओं पर यहाँ अपनी टीप देना चाहता हूँ।

सीतारामन के इस बजट में आगामी 10 वर्ष की सोच और अगले पाँच साल में पाँच ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था के निर्माण का लक्ष्य घोषित किया गया है।लेकिन हाल की तिमाहियों में जिस प्रकार से GDP गिरती चली गई है उसे उसे देखते हुए 8% प्रतिवर्ष की बढ़ोतरी करना निश्चित बहुत कठिन दिखता है।जाब की स्थिति अभी भी दयनीय बनी हुई है। इसके लिए इस बजट में कंजम्प्शन के स्थान पर इनवेस्टमेंट को गति देने का पूरा प्रयास किया गया है।SMSE के कारपोरेट टैक्स में ढाई सौ करोड़ के स्थान पर 400 करोड़ तक की टर्नओवर की कंपनियों को 25 प्रतिशत कॉरपोरेट टैक्स में लाया गया है। एक प्रतिशत से कम इनसे बड़ी कंपनियों को इस दायरे में लाने की राजनीतिक शक्ति नहीं दिखाई गई है।

90 हज़ार स्टार्ट अप कंपनियों को राहत दे कर आगे बढ़ने का अवसर दिया गया है।सरकारी बैंकों को 70 हज़ार करोड़ की धन राशि रीकैपिटेलाइजे़शन के लिये दी जा रही है। लेबर क़ानून में सुधार के स्थान पर उन्हें केवल युक्तियुक्त संगत बनाने की बात कही गई है।सरकारी कंपनियों के डिसइनवेस्टमेंट से 1 लाख 5 हज़ार करोड़ के राजस्व आय में लाने की बात कही गई है जो मेरे मत से संभव नहीं है। MSME को एक करोड़ तक ऋण देने तथा ब्याज में राहत देने की बात कही गई है। FDI को इंश्योरेंस तथा मीडिया आदि में और अधिक प्रवेश की अनुमति देकर विदेशी धन प्राप्त करने की कोशिश की गई है। 1.25 लाख किलोमीटर की सड़कों के लिए 80 हज़ार करोड़ का प्रावधान किया गया है। आगामी पाँच सालों में 100 लाख करोड़ की धनराशि सभी प्रकार के इंफ्रास्ट्रक्चर पर व्यय करने की बात कही गई है। इन समस्त प्रावधानों से कुल मिलाकर यह आशा बनती है कि इन्वेस्टमेंट को गति मिलेगी जिससे अर्थव्यवस्था के विकास के साथ-साथ कर संग्रहण तथा जॉब की स्थिति बेहतर हो सकेगी। GST में 45 पर्सेंट तथा डायरेक्ट टैक्स में 9 पर्सेंट की बढ़ोतरी संभावित बतायी गई है।

इस बजट में इलेक्ट्रिक व्हीकल को भविष्य में भारतीय बाज़ार में लाने का एक मार्ग दिखाया गया है। इसके साथ ही यह भी आशा की गई है कि भारत भविष्य में पूरे विश्व के लिए इलेक्ट्रिक व्हीकल का केंद्र बन जाएगा। इलेक्ट्रिक व्हीकल पर GST केवल पाँच पर्सेंट प्रस्तावित है।परंपरागत गाड़ियों को हतोत्साहित करने के लिए पेट्रोल और डीज़ल के एक्साइज़ टैक्स में एक पर्सेंट का इज़ाफ़ा किया गया है। अगर यह पूरी योजना सफल होती है तो पेट्रोलियम पर विदेशी मुद्रा की बचत के साथ साथ प्रदूषण कम करने में भी सहायता मिलेगी। फिर भी इलेक्ट्रिक व्हीकल को लाने में अभी अनेक तकनीकी चुनौतियाँ है।

ग्रामीण क्षेत्रों के लिए अनेक योजनाएं है जिनमें विशेष रूप से आवासीय योजना तथा कुछ अन्य इनवेस्टमेंट की योजनाओं के कारण ये आशा की जा सकती है कि इन क्षेत्रों में कंजम्प्शन बढ़ेगा। कुल मिलाकर मैं यह कह सकता हूँ कि यह बजट कोई क्रान्तिकारी दिशा लेकर नहीं आया है अपितु इसकी केवल एक सधी हुई टीम के टेस्ट मैच में जीतने की इच्छा से तुलना की जा सकती है। भारी बहुमत से जीती हुई सरकार से कुछ और अधिक साहसिक आर्थिक क़दम उठाने की अपेक्षा थी फिर भी यह बजट सार्थक दिशा की ओर जाता है। बजट का एक महिला द्वारा प्रस्तुत किया जाना देश के लिए गर्व की बात है।

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