परिवर्तन के समय में उभार पाती भाजपा

दूसरे खिलाड़ी को सौंप देता है, जो उसे और आगे ले जाता है, ठीक इसी प्रकार की स्पोर्ट्समैनशिप मध्यप्रदेश भाजपा में देखने को मिल रही है। भारतीय जनता पार्टी के मध्यप्रदेश के संगठन महामंत्री सुहासजी भगत की अपने मातृ संगठन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ में वापसी हुई हैं

हितानंद शर्मा

दूसरे खिलाड़ी को सौंप देता है, जो उसे और आगे ले जाता है, ठीक इसी प्रकार की स्पोर्ट्समैनशिप मध्यप्रदेश भाजपा में देखने को मिल रही है। भारतीय जनता पार्टी के मध्यप्रदेश के संगठन महामंत्री सुहासजी भगत की अपने मातृ संगठन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ में वापसी हुई हैं, यह भी सर्वज्ञात है कि वह संघ के मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ़ को मिलाकर संगठन की दृष्टि से ‘मध्य क्षेत्र’ में बौद्धिक प्रमुख का दायित्व संभालेंगे। उनके बाद मध्य प्रदेश संगठन महामंत्री की जिम्मेदारी अब हितानंद शर्माजी संभालेंगे।

भगतजी के 6 साल के कार्यकाल में पिछले 1 वर्ष से अधिक समय से हितानंद शर्माजी भाजपा के प्रदेश सह संगठन महामंत्री के रूप में अपनी चिर परिचित संगठन क्षमता की शैली के साथ सक्रियता से कार्य करते आ रहे हैं। संगठन में वे अपनी उत्कृष्ट नेतृत्व क्षमता और कार्य के लिए जाने जाते हैं। कार्यकर्ताओं से सीधा संवाद उनकी विशेषता है। वे कार्यकर्ताओं की डायरेक्टरी भी कहे जाते हैं। संघ और भाजपा के अनगिनत कार्यकर्ताओं से उनका सीधा संवाद है। अपने कार्यकर्ताओं की वह इस हद तक चिंता रखते हैं कि चर्चा में परिवार के सदस्यों के नाम लेकर उनकी कुशलक्षेम तक जानते हैं।

तकनीकी रूप से बहुत सुदृढ, हंसमुख और मिलनसार स्वभाव के धनी हितानंद शर्मा अब पार्टी को 2023 और 2024 से भी आगे ले जाने वाले हैं। हरियाली अमावस्या को मध्य प्रदेश के ही अशोकनगर जिले के छोटे से गांव नईसराय में जन्मे हितानंद को राष्ट्रवादी और समाजसेवी पिता और पारिवारिक पृष्ठभूमि मिली। पिता चूंकि शासकीय सेवा में थे तो शुरुआती शिक्षा अलग-अलग स्थानों पर हुई। उनकी स्मरण शक्ति गजब की है इसीलिए पढ़ाई में भी वह हमेशा एक श्रेष्ठ छात्र रहे।

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परिवार का देशभक्त वातावरण और राष्ट्र कार्य हेतु पिता की ओर से दी गई अच्छी सीख का परिणाम था कि बालक हितानंद ने स्वतंत्रता आंदोलन और देशभक्त वीरों के विषय में खूब अध्ययन कर लिया था। इसी अवधि में जब वे संघ के संपर्क में आए तो राष्ट्रीयता के विचार ने उनका जीवन ही बदल दिया। तरुणावस्था तक आते -आते तो हितानंद संघ की विद्यालयीन और महाविद्यालीन शाखा, जिन्हें संघ की दृष्टि में सायं भाग कहा जाता है और प्रभात शाखाओं सहित अपने नगर के स्थानीय दायित्वों को कुशलता से निभाने लगे थे।

राष्ट्रप्रेम से भरे किशोर हितानंद इस समय तक आते-आते अब कुछ बड़ा निर्णय कर चुके थे। उन्होंने तय कर लिया कि आप पूरा जीवन देश और समाज के हित में आहूत करना है। वह सन 1995 था जब उन्होंने स्वयं को संघ कार्य के लिए सौंप दिया। संगठन भी उनकी क्षमताओं एवं संभावनाओं को पहले से ही समझ रहा था, हितानंद शर्मा को अशोक नगर में विस्तारक का कार्य दिया गया। इसके बाद वे अशोकनगर और फिर चंदेरी, चाचौड़ा में नगर प्रचारक रहे। वर्ष 2002 आते आते तक हितानंद शर्मा को श्योपुर का जिला प्रचारक बनाया गया।

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उनकी विशेष संगठन और नेतृत्व क्षमता अब संघ में उनकी विशेष पहचान बन रही थी। संघ ने उनके कार्य क्षेत्र में विस्तार करते हुए अब और बड़े दायित्व सौंपे। 2007 में हितानंदजी को शिवपुरी में विभाग प्रचारक बनाया गया, यहां किए गए उत्कृष्ट कार्यों को देखते हुए संघ की दृष्टि से महत्वपूर्ण विदिशा विभाग के प्रचारक की जिम्मेदारी 2011 में उन्हें सौंपी गई। हितानंद जी स्वयं संगठन के अनथक कार्य करने वाले कार्यकर्ता हैं। अभी संगठन उनमें और संभावनाएं देख रहा था। एक बार फिर उनके कार्य में विस्तार करते हुए 20 वर्ष तक सतत, सक्रिय संघ कार्य के बाद 2015 में विद्याभारती के प्रांत संगठन मंत्री का दायित्व सौंपा गया।

विद्या भारती राष्ट्रीय विचार और संस्कृति के साथ सरस्वती शिशु मंदिर और सरस्वती विद्या मंदिर का संचालन करने वाली संस्था है। उनके लिए यह बिल्कुल नया कार्यक्षेत्र था लेकिन यहां भी हितानंद जी अपनी चिर परिचित शैली में पूरी सक्रियता के साथ विद्या भारती के कार्य को विस्तार देने में जुट गए। विद्यालय स्तर तक जाकर उन्होंने कई सकारात्मक परिवर्तन और जोड़े। विद्यालयों को आईटी की आधुनिक तकनीकों से समृद्ध करने की योजना पर उन्होंने काम किया तो वहीं पूर्व छात्रों का एक बड़ा संगठन तैयार किया।

उनके प्रयासों से पूर्व-छात्र विद्या भारती के लिए अपना योगदान देने के लिए सहर्ष से ही आगे आए। उन्होंने विद्यालय से लेकर संगठन तक नए-नए प्रयोग किए। इस अवधि में बड़ी-बड़ी कठिनाइयां और प्रतिकूलता की स्थिति भी निर्मित हुई। प्रदेश में सत्ता परिवर्तन हुआ और कांग्रेस की सरकार ने आते ही विद्या भारती को निशाने पर लिया। विद्यालयों और शिक्षा पद्धति को नुकसान पहुंचाने के लिए कई प्रकार की राजनीतिक कोशिशें शुरू हो गई लेकिन यह हितानंद शर्मा की कुशल संगठन और रणनीतिक क्षमता की थी कि कांग्रेस की पूरी सरकार विद्या भारती को कोई नुकसान नहीं पहुंचा सकी। इसके बाद कोरोना काल में विद्या भारती द्वारा नगरों गांवों और जनजातीय क्षेत्र में किए गए सेवा कार्य तो समाज में स्मरणीय ही बन गए।

जब नवंबर 2020 में हितानंद शर्मा को भारतीय जनता पार्टी मध्य प्रदेश के सह संगठन महामंत्री बनाए जाने की घोषणा हुई तब वे कोरोना संक्रमित होने के कारण अस्पताल में भर्ती थे। लेकिन वे 1 दिन तो क्या 1 मिनट भी नहीं रुकते। स्वस्थ हुए तो अस्पताल से लौटने के साथ ही उन्होंने सबसे पहले कोरोना से लड़ने के लिए अपने कार्यकर्ताओं को प्रोत्साहित किया। उनके नेतृत्व में भाजपा कार्यकर्ताओं ने पूर्व से पीड़ित लोगों के लिए अभूतपूर्व सेवा कार्य शुरू किए। शंकर मित्रों के द्वार पर पहुंचकर कार्यकर्ता उन्हें आवश्यक वस्तुएं उपलब्ध करा रहे थे तो इलाज के लिए डॉक्टर और दवाइयों की व्यवस्था कर रहे थे।

अभी नई जिम्मेदारी भी आने वाली थी। देश की सत्ता में भाजपा की वापसी हो चुकी थी। प्रदेश के 28 विधानसभा क्षेत्रों में उप चुनाव होने थे, ग्वालियर चंबल मैं अपने पुराने कार्य अनुभव और जमीनी पकड़ को देखते हुए इसका दायित्व भी पार्टी में हितानंद शर्मा को सौंपा गया। चुनाव में पार्टी को विजयश्री प्राप्त हुई। हितानंद जी ने पार्टी मे भी अपनी चिर परिचित शैली में बहुत सक्रियता के साथ कार्य शुरू कर दिया था। उन्होंने 1 वर्ष के कार्यकाल में ही प्रदेश के 50% मंडल स्तर तक जाकर जमीनी कार्यकर्ताओं से सीधा संपर्क और संवाद किया। अब वे प्रदेश संगठन महामंत्री के रूप में भारतीय जनता पार्टी की उन्हें सौंपी गई बैटल को और आगे ले जाने वाले हैं।

बहती नदी अपने क्षेत्रों में सहज ही हरियाली लाती है और उत्पादन क्षमता बढ़ाकर खुशहाली लाती है। सब के हित के लिए सदैव आगे बढ़ते रहना नदी का स्वभाव है। हितानंद शर्मा का प्रवाह भी कुछ ऐसा ही है। सेवा तो जैसे उनके मन में रची बसी है। बात उन दिनों की है जब वह शिवपुरी में विभाग प्रचारक हुआ करते थे। तब गुना के पास एक रेल हादसा हुआ जिसमें दो ट्रेनें आपस में टकरा गई। हितानंद शर्मा अपनी टीम के साथ वहां पहुंचकर सेवा कार्य करने वाले सबसे पहले लोगों में थे। विदिशा में विभाग प्रचारक रहे थे एक बार वे प्रातः कालीन शाखा से लौट रहे थे देखा तो एक घर में आग लगी हुई थी।

आग की लपटों से धू-धू करके जल रहा घर देखते ही वह अपनी टीम के साथ सेवा कार्यों में जुट गए। कोरोनाकाल के लॉक डाउन का समय था तब विद्यालय बंद हो चुके थे ऐसे में हिट आनंद जी ने सरस्वती शिशु और विद्या मंदिरों के सभी आचार्यों, अभिभावकों पूर्व छात्रों और समाज के लोगों को साथ में लेकर घर-घर राहत सामग्री पहुंचाने के लिए बड़े पैमाने पर कार्य कराए। मास्क बांटने से लेकर दवाइयां और भोजन सामग्री घर-घर तक पहुंचाने में हजारों लोग उनके नेतृत्व में पूरी सक्रियता और सेवा भाव से जुटे रहे।

हितानंद जी को संगठन में इंजीनियर भी कहा जाता है। इसके पीछे भी बड़ा रोचक और प्रमुख कारण है। वे भविष्य की स्थितियों का आकलन करते हुए कार्य करते हैं। उनके दायित्व में रहने के दौरान संघ के विशाल कार्यालयों का निर्माण किया गया। यह कार्य उनके नेतृत्व में समाज के सहयोग से किया गया। उन्हें निकट से जानने वाले लोग मानते हैं कि वह व्यक्ति के रूप में स्वाभाविक रूप से अपनी श्रेष्ठता साबित करते हैं।

सदैव सहज, हंसमुख और मिलनसार समाज के हित में एक गंभीर चिंतन लिए हुए सदैव कार्य करना और कार्यकर्ताओं का ध्यान रखना विशेषता है। मौन रहकर वह बड़ा कार्य करते हैं, पिछले दिनों ही उत्तर प्रदेश से लौटे हितानंद शर्मा 3 माह तक वहां गांवों और नगरों तक जाते हुए भाजपा की सरकार बनवाने अपने पूरे रणनीतिक कौशल के साथ कार्य कर रहे थे। राजनीतिक विश्लेषक मान रहे हैं कि उन्हें मध्यप्रदेश में होने वाले 2023 के विधानसभा चुनाव और 2024 में होने वाले लोकसभा उपचुनाव कि आगे भी अभी बहुत बड़े कार्य करने हैं, संगठन भी उनसे यही अपेक्षा करता होगा।