रामदेव बाबा की वजह से राजनीति में आए थे बाबुल सुप्रियो, दिलचस्प है ये किस्सा..

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भारतीय जनता पार्टी ने इस बार के हुए लोकसभा चुनव में काफी बड़ी जीत हासिल की है. इसम से भाजपा की पश्चिम बंगाल की जीत काफी अहम् है. कल गुरुवार को मोदी कैबिनेट में मंत्रियों ने शपथ ग्रहण की. पश्चिम बंगाल के आसनसोल से चुनाव जीतकर आए बाबुल सुप्रियो ने भी मंत्री पद की शपथ ली. इस दौरान उन्हें वन और पर्यावरण मंत्रालय दिया गया है . सिंगर से लेकर राजनीति तक बाबुल सुप्रियो का सफ़र काफी दिलचस्प हैं. आज हम आपको उनके इसी दिलचस्प सफ़र के बारे में बताने जा रहे हैं.

बता दें कि, बाबुल सुप्रियो का जन्म 15 दिसम्बर 1970 को पश्चिन बंगाल में हुआ था. बाबुल का परिवार शुरू से ही संगीत से ताल्लुकात रखता आया है. वह अपने दादा जी से काफी प्रभावित थे. उनके दादा जी ने बंगाल में संगीत के दौर में अपना एक अलग ही नाम बनाया हुआ था.

बाबुल सुप्रियो को बचपन से ही गाना गाने का काफी शौक था. शुरू से ही वह सिंगिंग के कई अवार्ड्स जीतते आए हैं. सिर्फ इतना ही नहीं वह आल इंडिया रेडियो स्टेशन दूरदर्शन पर भी परफॉर्म कर चुके हैं. शयद यह बात आपको बात पता नहीं होगी की उनका पहले नाम सुप्रिया बराल था, लेकिन फिल्म इंडस्ट्री में आने के बाद उन्होंने अपना नाम बाबुल सुप्रियो रख लिया था.

उन्हें जितनी दिलचस्पी सिंगिंग में थी, उतनी ही राजनीति में भी थी. वह हमेशा से ही अटल बिहारी बाजपये और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के समर्थक हैं. एक किस्सा यह दिलचस्प माना जाता है कि एक दिन वह प्लेन में बाबा रामदेव से मिले थे. जिस दौरान उन्हें राजनीति में आने की दिशा मिली थी. उन्होंने साल 2014 के मार्च में भारतीय जनता पार्टी का हाथ थामा था.

आसनसोल से वे बीजेपी के उम्मीदवार बनाए गए थे और उन्होंने चुनाव भी जीता. मोदी कैबिनेट उन्हें भारी उद्योग एवं लोक उद्यम मंत्रालय दिया गया है. आसनसोल में इस बार बाबुल सुप्रियो का मुकाबला टीएमसी की मुनमुन सेन से था. बाबुल सुप्रियो बीते पांच साल में बंगाल की सरकार के खिलाफ काफी मुखर रहे हैं.

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