मंदी की चपेट में आया ऑटो कंपोनेंट सेक्टर, एक लाख लोगों ने गंवाई नौकरी

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नई दिल्ली। देश में पिछले कई माह से आॅटोमोबाइल सेक्टर में जारी मंदी का असर वाहन कलपुर्जा उद्योग और इससे जुड़े रोजगार पर भी देख जा रहा है। दरअसल, चालू वित वर्ष की पहली छमाही (अप्रैल-सितंबर) में वाहन कलपुर्जा उद्योग के कारोबार में 10.1 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है। साथ ही ये उद्योग 1.99 लाख करोड़ रुपये से घटकर 1.79 लाख करोड़ रुपये हो गया है। इसके अलावा जुलाई 2019 से लेकर अब तक इस उद्योग से जुड़ी 1.79 लाख अस्थाई नौकरियां जा चुकी हैं।

निवेश के मामले में दो अरब डॉलर का नुकसान

ऑटोमोटिव कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग एसोसिएशन (एक्मा) के अध्यक्ष दीपक जैन के मुताबिक आॅटोमोबाईल क्षेत्र में लंबे दौर से जारी मंदी के चलते निवेश के मामले में दो अरब डॉलर का नुकसान हुआ है। बीते एक साल से सभी श्रेणी के वाहनों की बिक्री में लगातार गिरावट आ रही है, जिसका रोजगार पर भी असर देखा जा रहा है। उन्होंने कहा कि कलपुर्जा उद्योग का विकास वाहन उद्योग पर निर्भर करता है।

गौजूदा समय में वाहनों के उत्पादन में 15-20 फीसदी की गिरावट से वाहन उपकरण उद्योग बुरी तरह प्रभावित हुआ है। रोजगार को लेकर उन्होने कहा कि अक्तूबर 2018 के से ही छंटनी का दौर जारी है। इस अवधि में सबसे अधिक अस्थायी कर्मचारियों को नौकरी गंवानी पड़ी है।

18 फीसदी हो जीएसटी की दर

इससे पहले जुलाई में एक्मा ने सरकार से अनुरोध किया था कि वाहन उद्योग के लिए जीएसटी की दर एक समान यानी 18 फीसदी की जाए, ताकि घट रही बिक्री से मंदी के दौर से गुजर रहे वाहन उद्योग को उबरने और 10 लाख नौकरियों को सुरक्षित रखने में मदद मिल पाए। उन्होंने कहार कि वाहन कलपुर्जा उद्योग यसे करीब 50 लाख लोगों को रोजगार मिलता है।

वर्तमान में में वाहन उत्पादन में 15-20 फीसदी की गिरावट से कलपुर्जा उद्योग के सामने संकट उत्पन्न हो गया है। यदि ऐसी ही स्थिति रहती है तो लगभग करीब 10 लाख नौकरियां ता सकती हैं। कुछ जगहों पर छंटनी की प्रक्रिया भी शुरू हो गई है।

एक्मा का कहना है कि जीएसटी प्रणाली के अंतर्गम करीब 70 फीसदी वाहन कलपुर्जों पर 18 फीसदी जीएसटी लगाया जाता है। बाकी 30 फीसदी पर 28 फीसदी जीएसटी वसूला जाता है। साथ ही 28 फीसदी जीएसटी के साथ वाहनों की लंबाई, इंजन के आकार-प्रकार के आधार पर वाहनों पर एक से 15 फीसदी का उपकर भी लगाया जा रहा है।

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