Sleemanabad Tunnel : मध्यप्रदेश का इंजीनियरिंग मार्वल यानी चमत्कार ‘स्लीमनाबाद टनल’ लगभग तैयार है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 17 जुलाई को कटनी जिले में इसका निरीक्षण किया। यह टनल सीएम डॉ. मोहन यादव का ड्रीम प्रोजेक्ट है। इस टनल से जबलपुर, कटनी, मैहर, सतना, रीवा और पन्ना के करीब 1450 गांवों की 2.45 लाख हेक्टेयर भूमि को स्थायी सिंचाई सुविधा मिलेगी। इस तरह पूरे विंध्य-महाकौशल क्षेत्र की खेती की तस्वीर और तकदीर ही बदल जाएगी।
इस मौके पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि 8 घंटे की तीन शिफ्ट में टनल बनाने के लिए काम शुरू किया गया। वर्ष 2015 तक कुल 1406 मीटर टनल बोरिंग होने से इसकी गति बढ़ाने की आवश्यकता थी। लेकिन वर्ष 2016 से टनल के अपस्ट्रीम छोर से जर्मनी से लाई गई आधुनिक मशीन से खुदाई की गई। इसके बाद इंजीनियर, टेक्नीशियन और मजदूर सुरक्षा के मानकों को ध्यान में रखते हुए कई प्रकार की चुनौतियां बढ़ती चली गईं।
टनल निर्माण के लिए लंबा संघर्ष रहा है और अब वर्ष 2026 में सफलता मिली है। जब वर्ष 2023 में राज्य में नई सरकार बनी तो ठेकेदार ने हाथ खड़े कर दिए थे। मशीनें पुरानी हो गईं थीं और एक मशीन से खुदाई जारी रही। टनल तैयार होने के बाद अप स्ट्रीम और डाउन स्ट्रीम में लगभग ढाई लाख हेक्टेयर सिंचाई का रकबा बढ़ेगा।
विज्ञान का चमत्कार है यह टनल
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि विंध्य क्षेत्र हर प्रकार के संसाधनों से परिपूर्ण है, लेकिन कुछ स्थानों पर पानी की कमी की चुनौती सामने आती है। यह टनल कटनी, रीवा और सतना सहित 5 जिलों के लिए अमृतधारा बनेगी। नर्मदा नदी तो खंभात की खाड़ी में जाकर मिलती है, लेकिन यह विज्ञान का चत्मकार ही है कि अब मां नर्मदा इस ऐतिहासिक टनल के माध्यम से गंगा बेसिन में सोन नदी के आसपास के अंचल में भी हरियाली लाएगी। किसानों और क्षेत्र के व्यापारियों के लिए यह टनल एक वरदान की तरह है। लगभग 12 किलोमीटर लंबी यह परियोजना भविष्य में इंजीनियरिंग के क्षेत्र में केस स्टडी सिद्ध होगी।
भीषण से भीषण भूकंप आने पर भी टनल 100 साल तक सुरक्षित रहेगी। कई स्थानों पर टनल की गहराई जमीन से नीचे 120 फीट तक भी है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने टनल परियोजना के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि परियोजना के लिए 1600 करोड़ रुपए की राशि में केंद्र सरकार ने लगभग 275 करोड़ की राशि प्रदान की है। राज्य सरकार की प्रतिबद्धता के बलबूते आज यह चुनौतिपूर्ण टनल परियोजना पूरी होने की ओर बढ़ रही है।
खतरनाक चुनौतियों का किया सामना
गौरतलब है कि इस टनल की लंबाई 11.952 किलोमीटर है। यह विंध्य पर्वतमाला के अंदर से नर्मदा के पानी को गुरुत्वाकर्षण के आधार पर सोन नदी तक लाएगी। इस तरह यह पानी सोन नदी के कछार तक पहुंचेगा। इस टनल के निर्माण के चमत्कार इसलिए कहा जा रहा है क्योंकि, तकनीकी रूप से विंध्य की 40 मीटर ऊंची रिज लाइन को भेदना असंभव था। इसके लिए जमीन से करीब 30 मीटर नीचे काम शुरू किया गया। इस दौरान काम कर रहे इंजीनियरों को मार्बल-लाइमस्टोन की कठोरता, डोलोमाइट की दृढ़ता और पानी में घुली चूने की विशालकाय भूमिगत गुफाओं ने कड़ी चुनौती दी।
इतना ही नहीं, टनल के अंदर प्रति मिनट 25 हजार लीटर तक पानी उफन रहा था, उसका रिसाव हो रहा था और वहां की मिट्टी अचानक धंसने वाली मिट्टी थी। हैरानी की बात यह है कि इस काम में लगाई गई अमेरिकी मशीन भी टूट गई थी। उसके टूटने के बाद अत्याधुनिक जर्मन हेरेनकनेक्ट मशीन लाई गई और विशेष टेम ग्राउटिंग तकनीक का इस्तेमाल किया गया। टीम ने इस टनल को इस तरह तैयार किया कि घनी आबादी, नेशनल हाईवे और रेलवे ट्रैक के ठीक नीचे से गुजरने के बाद भी किसी को कहीं कुछ नुकसान नहीं हुआ।
कब हुआ कॉन्ट्रैक्ट?
इस टनल का जिम्मा हैदराबाद की निर्माण एजेंसी मेसर्स पटेल-एसईडब्ल्यू (संयुक्त उपक्रम) को सौंपा गया था। इसका कॉन्ट्रैक्ट वर्ष 2008 हुआ। उस वक्त इसकी शुरुआती लागत 799 करोड़ रुपये आंकी गई थी। लेकिन, जब काम शुरू हुआ तो खतरनाक जमीनी चुनौतियों, जानलेवा जल रिसाव को रोकने के लिए किए गए विशेष प्रयास और लेटेस्ट तकनीक का इस्तेमाल करना पड़ा।
इस वजह से इस टनल की लागत बढ़ गई। अभी तक इस पर 1610.47 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं। आज इस पूरे अनुबंध का 96.66 प्रतिशत काम हो चुका है। परियोजना के तहत आने वाली 12.135 किलोमीटर लंबी ओपन कट नहर और 11.952 किलोमीटर लंबी मुख्य टनल का निर्माण शत-प्रतिशत पूरा हो चुका है।










