मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी और उनके परिवार से जुड़े बताए जा रहे जमीन घोटालों और ड्रग नेटवर्क की जांच अब लगातार तेज होती नजर आ रही है। सूत्रों के मुताबिक, मुख्यमंत्री सचिवालय ने इन मामलों की जानकारी अपने स्तर पर जुटाना शुरू कर दिया है।
इस मामलें में इंदौर के एक IAS अधिकारी की भूमिका भी जांच के दायरे में आ गई है। आरोप हैं कि संबंधित अधिकारी सरकार को समय पर पूरी जानकारी उपलब्ध नहीं करा रहे हैं, जिसके चलते मुख्यमंत्री सचिवालय ने सीधे स्तर पर तथ्य जुटाने की प्रक्रिया शुरू की है।
यह आईएएस अधिकारी लगातार जीतू पटवारी के सहयोगियों के संपर्क में है। इस भ्रष्ट अधिकारी ने शासन तक आवश्यक जानकारी समय पर नहीं पहुंचाई, जिसके कारण मामले की जांच अपेक्षित गति से आगे नहीं बढ़ सकी।
इतना ही नहीं इस अधिकारी के पास भाजपा नेताओं के काम भूलने की एक खास कला है। एक तरफ जहां भाजपा के नेता इनसे काम करवाने में असफल साबित होते है वहीं दूसरी तरह यह कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी और उनके सहयोगियों के काम करने में जरा सी भी देरी नहीं करते है।
खंगाली जा रही जानकारी
जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने में जुटी हैं कि जीतू पटवारी से जुड़े बताए जा रहे रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स और कॉलोनियों में किन-किन लोगों की भागीदारी रही है। जांच के दौरान कांग्रेस से जुड़े कुछ नेताओं और अन्य व्यक्तियों की संभावित साझेदारी की भी जानकारी एकत्र की जा रही है।
इसी क्रम में जीतू पटवारी के भाई नाना पटवारी और भरत पटवारी से जुड़े उनके कथित पार्टनर्स की जानकारी भी जुटाई जा रही है। जांच एजेंसियां यह जानने का प्रयास कर रही हैं कि इन परियोजनाओं में किन लोगों की भूमिका रही और आर्थिक लेनदेन का स्वरूप क्या था।
कांग्रेस के अल्पसंख्या मोर्चे के पदाधिकारी और पूर्व पार्षद के साथ ही कांग्रेस के बड़े प्रॉपर्टी कारोबारी और जय गणेश भक्त की जीतू पटवारी के साथ क्या-क्या पार्टनरशिप है इसकी भी जानकारी ली जा रही है।
मुख्यमंत्री सचिवालय ने बढ़ाई निगरानी
सूत्रों का कहना है कि मुख्यमंत्री सचिवालय पूरे मामले पर लगातार नजर बनाए हुए है। कॉलोनियों से जुड़े दस्तावेज, संबंधित व्यक्तियों की भूमिका और अन्य तथ्यों की जानकारी अलग-अलग स्तर पर एकत्र की जा रही है। यदि जांच में कोई ठोस तथ्य सामने आते हैं तो आने वाले दिनों में इस मामले में और बड़ी कार्रवाई हो सकती है।










