मध्यप्रदेश में हुआ 1000 करोड़ रुपए का घोटाला, RUMSL सोलर प्रोजेक्ट में मेड इन इंडिया की जगह लगा दिए चीन के मॉड्यूल

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By Raj RathorePublished On: June 27, 2026
RUMSL Solar Projects

RUMSL Solar Project : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ नीति को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार ने सरकारी सोलर परियोजनाओं में केवल ALMM (Approved List of Models and Manufacturers) में शामिल भारतीय सोलर मॉड्यूल के उपयोग को अनिवार्य किया था। लेकिन मध्यप्रदेश की तीन बड़ी सोलर परियोजनाओं में इस नियम की कथित अनदेखी किए जाने के आरोप सामने आए हैं।

दस्तावेजों और सूचना के अधिकार (RTI) से प्राप्त जानकारी के आधार पर दावा किया गया है कि टेंडर में भारतीय ALMM मॉड्यूल लगाने का वादा करने के बाद कुछ कंपनियों ने अधिकारियों की मिलीभगत से सस्ते चीनी मॉड्यूल का इस्तेमाल किया।

यदि जांच में ये आरोप सही पाए जाते हैं तो इससे केंद्र सरकार की ‘मेक इन इंडिया’ नीति पर सवाल खड़े हो सकते हैं और सरकारी खजाने पर भी भारी आर्थिक बोझ पड़ने की आशंका जताई जा रही है।

किन परियोजनाओं पर उठे सवाल?

आरोप तीन प्रमुख सोलर परियोजनाओं को लेकर लगाए गए हैं—

नीमच – 320 मेगावाट (Tata Power Energy Ltd)
शाजापुर – 125 मेगावाट (Solar Arise)
ओंकारेश्वर – 100 मेगावाट (Amp Energy)

बताया गया है कि नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के निर्देशों के अनुसार इन परियोजनाओं में केवल ALMM प्रमाणित भारतीय मॉड्यूल लगाए जाने थे।

टेंडर भारतीय मॉड्यूल पर, लेकिन लगाए गए चीनी मॉड्यूल?

आरोप है कि कंपनियों ने टेंडर के दौरान भारतीय मॉड्यूल की लागत के आधार पर बोली लगाई और उसी आधार पर परियोजनाएं हासिल कीं। बाद में कथित रूप से सस्ते चीनी मॉड्यूल लगाकर लागत में भारी बचत कर ली गई।

रिपोर्ट के अनुसार भारतीय ALMM मॉड्यूल की कीमत करीब 11.50 रुपये प्रति वाट जबकि गैर-ALMM चीनी मॉड्यूल की कीमत लगभग 7 से 8 रुपये प्रति वाट बताई गई है। यानी प्रति वाट करीब 3 से 4 रुपये का अंतर।

इसी आधार पर अनुमान लगाया गया है कि केवल नीमच और शाजापुर की कुल 445 मेगावाट क्षमता वाली परियोजनाओं में कंपनियों को मॉड्यूल खरीद में करीब 150 से 180 करोड़ रुपये तक का फायदा हुआ हो सकता है।

सरकार को भी हो सकता है बड़ा नुकसान

रिपोर्ट में दावा किया गया है कि कंपनियों ने बिजली का टैरिफ भारतीय मॉड्यूल की ऊंची लागत के आधार पर तय कराया। यदि बाद में कम कीमत वाले चीनी मॉड्यूल लगाए गए, तो उत्पादन लागत घटने के बावजूद सरकार को पहले से तय अधिक दर पर बिजली खरीदनी पड़ेगी।

विशेषज्ञों के हवाले से अनुमान लगाया गया है कि बिजली की कीमत में 50 से 75 पैसे प्रति यूनिट का अंतर पड़ सकता है, जिससे 25 वर्षों की अवधि में सरकार पर करीब 1362 करोड़ रुपये तक का अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ सकता है।

Amp Energy ने क्या कहा?

ओंकारेश्वर परियोजना को लेकर Amp Energy का कहना है कि केंद्र सरकार ने 10 मार्च 2023 के आदेश के तहत तकनीकी कारणों से ALMM नियम में एक वर्ष की छूट दी थी, जिसके कारण कंपनी ने चीन के शंघाई से मॉड्यूल खरीदे।

हालांकि रिपोर्ट में सवाल उठाया गया है कि यह छूट मार्च 2023 तक लागू थी, जबकि परियोजना का कार्य उसके बाद पूरा हुआ। वहीं नीमच और शाजापुर परियोजनाओं के संबंध में ऐसी किसी स्पष्ट छूट का आधार सामने नहीं आया है।

निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि केंद्र सरकार अब ALMM-2 लागू करने की दिशा में आगे बढ़ चुकी है, जिसके तहत केवल मॉड्यूल ही नहीं बल्कि सोलर सेल का भी भारत में निर्मित होना आवश्यक होगा। लेकिन यदि पहले चरण के नियमों के पालन की प्रभावी निगरानी नहीं हो रही है, तो नए नियमों के क्रियान्वयन पर भी सवाल उठ सकते हैं।

सूत्रों के अनुसार नीमच की 320 मेगावाट परियोजना पूरी तरह तैयार है और इसके उद्घाटन की तैयारी चल रही है। आरोप है कि इस परियोजना में भी चीनी मॉड्यूल लगाए गए हैं। यदि जांच में यह दावा सही पाया जाता है तो मामला केवल टेंडर नियमों के उल्लंघन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि केंद्र सरकार की ‘मेक इन इंडिया’ नीति के पालन पर भी गंभीर प्रश्न खड़े करेगा।