विधायक मधु वर्मा के प्रतिनिधि के अवैध होर्डिंग से गंभीर रूप से घायल हुई 11 वर्षीय बच्ची, हादसे के बाद भी नहीं हटा पाया नगर निगम

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By Raj RathorePublished On: June 26, 2026
Bhanu Pratap Singh Chauhan

इंदौर में अवैध होर्डिंगों का जाल एक बार फिर आम नागरिकों की जान पर भारी पड़ता हुआ दिख रहा है। इस बार हादसे का शिकार एक मासूम बच्ची बनी, जो सड़क किनारे लगे एक भारी-भरकम अवैध होर्डिंग के अचानक गिरने से गंभीर रूप से घायल हो गई।

जानकारी के अनुसार, पालदा क्षेत्र में भाजपा विधायक प्रतिनिधि भानु प्रताप सिंह चौहान के जन्मदिन की शुभकामनाओं वाला अवैध होर्डिंग सड़क किनारे लगाया गया था। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक यह होर्डिंग अचानक भरभराकर गिर पड़ा, जिसकी चपेट में एक 11 वर्षीय मासूम बच्ची आ गई। हादसे में बच्ची के सिर पर गंभीर चोट आई और उसे तत्काल अस्पताल में भर्ती कराया गया।

घटना के बाद क्षेत्र में अफरा-तफरी मच गई। स्थानीय लोगों ने निगम प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि शहर में लंबे समय से बिना अनुमति और सुरक्षा मानकों की अनदेखी कर बड़े-बड़े होर्डिंग लगाए जा रहे हैं, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी आंखें मूंदे बैठे हैं।

हादसे के बाद नहीं जागा निगम

स्थानीय लोगों का आरोप है कि जिस होर्डिंग ने बच्ची को घायल किया, वह लंबे समय से सड़क किनारे लगा हुआ था। लेकिन हादसे के बाद ही नगर निगम की टीम मौके पर पहुंची और बिना कार्रवाई किए ही वापस लौट गई।

नागरिकों का कहना है कि यह घटना कोई अकेली दुर्घटना नहीं, बल्कि शहर में फैली अव्यवस्था का परिणाम है। पिछले कुछ समय में पाइपलाइन खुदाई, खुले गड्ढे, जर्जर सड़कें और अवैध होर्डिंगों के कारण कई हादसे हो चुके हैं। इसके बावजूद जिम्मेदार विभागों की कार्यशैली में कोई सुधार दिखाई नहीं दे रहा।

निगम प्रशासन पर उठे सवाल

शहरवासियों का आरोप है कि राजनीतिक कार्यक्रमों, जन्मदिनों और स्वागत-सम्मान के नाम पर नियमों को ताक पर रखकर सार्वजनिक स्थानों पर बड़े-बड़े होर्डिंग लगाए जाते हैं। ऐसे होर्डिंग लोगों की जान के लिए भी खतरा साबित हो रहे हैं।

नगर निगम आयुक्त क्षितिज सिंघल के प्रशासनिक नियंत्रण पर भी सवाल उठ रहे हैं। लोगों का कहना है कि इतना बड़ा हादसा होने के बाद भी कार्रवाई नहीं हुई है, जबकि अवैध होर्डिंग लगाने वालों के खिलाफ पहले से प्रभावी निगरानी और सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।

जवाबदेही तय करने की मांग

घटना के बाद स्थानीय नागरिकों ने दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। लोगों का कहना है कि केवल होर्डिंग हटाने से जिम्मेदारी पूरी नहीं होगी, बल्कि जिन लोगों ने नियमों का उल्लंघन कर होर्डिंग लगाया और जिन अधिकारियों ने इसे नजरअंदाज किया, उनकी जवाबदेही भी तय की जानी चाहिए।

यह हादसा एक बार फिर इस सवाल को सामने लाता है कि क्या शहर में राजनीतिक प्रभाव के चलते नियमों की अनदेखी की जा रही है? और यदि ऐसा है, तो इसकी कीमत आखिर आम जनता और मासूम बच्चों को कब तक चुकानी पड़ेगी?