जहां आज छोटी-सी यात्रा के लिए भी लोग आधुनिक सुविधाओं पर निर्भर हैं, वहीं इंदौर के आदर्श इंदिरा नगर निवासी 67 वर्षीय नरेंद्र कसेरा आस्था और संकल्प की अनूठी मिसाल पेश कर रहे हैं। वे साइकिल से करीब दो वर्ष लंबी अखिल भारतीय तीर्थयात्रा पर निकले हैं।
इस दौरान वे देश के 12 ज्योतिर्लिंग, चारधाम, परली वैजनाथ, अयोध्या, जगन्नाथ पुरी, तिरुपति बालाजी, पद्मनाभस्वामी मंदिर सहित नेपाल के प्रमुख धार्मिक स्थलों के दर्शन करेंगे। उनकी यात्रा का समापन उज्जैन स्थित महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग में होगा।
गुरुवार को नरेंद्र कसेरा ओंकारेश्वर पहुंचे, जहां भगवान ओंकारेश्वर के दर्शन-पूजन के बाद उन्होंने अपनी यात्रा का अगला पड़ाव महाराष्ट्र की ओर तय किया। यहां वे विभिन्न प्रमुख धार्मिक स्थलों के दर्शन करेंगे।
साइकिल बनी चलता-फिरता मंदिर
नरेंद्र कसेरा की साइकिल लोगों के आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। साइकिल पर भगवान भोलेनाथ का ध्वज, तुलसी और बेलपत्र के पौधे, मां नर्मदा की प्रतिमा, नर्मदेश्वर एवं चंद्रमौलेश्वर शिवलिंग स्थापित हैं। वे जहां भी रुकते हैं, सबसे पहले पूजा-अर्चना कर भगवान का स्मरण करते हैं और उसके बाद ही विश्राम या भोजन करते हैं।
रात्रि विश्राम के लिए वे मंदिर, आश्रम, टोल प्लाजा या पेट्रोल पंप जैसी सुरक्षित जगहों का चयन करते हैं।
पहले भी कर चुके हैं 14 माह की तीर्थयात्रा
यह नरेंद्र कसेरा की पहली धार्मिक यात्रा नहीं है। इससे पहले भी वे 14 महीने की साइकिल तीर्थयात्रा सफलतापूर्वक पूरी कर चुके हैं। उनका कहना है कि तीर्थयात्रा केवल धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि, अनुशासन, सेवा और भारतीय संस्कृति को समझने का माध्यम है।
उन्होंने कहा कि सदियों से संत-महात्मा और ऋषि-मुनि पदयात्राओं के जरिए समाज को यह संदेश देते आए हैं कि जीवन का वास्तविक सुख भौतिक साधनों में नहीं, बल्कि श्रद्धा, साधना, सेवा और आध्यात्मिक जीवन में निहित है।
युवाओं को दे रहे प्रेरणा
नरेंद्र कसेरा का मानना है कि यदि संकल्प मजबूत हो तो उम्र कभी बाधा नहीं बनती। वे अपनी इस यात्रा के माध्यम से युवाओं को भारतीय संस्कृति, पर्यावरण संरक्षण और आध्यात्मिक जीवन से जुड़ने का संदेश भी दे रहे हैं।










